दिल्ली में मामूली बात पर खूनी संघर्ष: पेशाब करने के विवाद में दो युवकों को अधमरा होने तक पीटा, शरीर पर आए 35 टांके।
देश की राजधानी दिल्ली में छोटी-छोटी बातों पर बढ़ती हिंसा और असहिष्णुता का एक दहला देने वाला मामला सामने आया है। दक्षिण-पश्चिमी
- बाबा हरिदास नगर में सरेआम गुंडागर्दी: विवाद के बाद धारदार हथियारों से हमला, अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे घायल
- राजधानी में छोटी सी चिंगारी बनी बड़ी आग: दो पक्षों में छिड़ी लड़ाई ने लिया हिंसक रूप, दबंगों के कहर से इलाके में दहशत
देश की राजधानी दिल्ली में छोटी-छोटी बातों पर बढ़ती हिंसा और असहिष्णुता का एक दहला देने वाला मामला सामने आया है। दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के बाबा हरिदास नगर इलाके में पेशाब करने जैसी मामूली बात पर शुरू हुआ विवाद इस कदर बढ़ गया कि दबंगों ने दो युवकों पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हिंसक झड़प में दोनों युवक लहूलुहान हो गए और उनकी हालत इतनी गंभीर हो गई कि अस्पताल में उपचार के दौरान उनके शरीर पर 35 टांके लगाने पड़े। पुलिस ने इस मामले में हत्या के प्रयास और मारपीट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली की कानून-व्यवस्था और लोगों के भीतर खत्म होते धैर्य पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली के बाबा हरिदास नगर थाना क्षेत्र में घटित यह वारदात रात के समय हुई, जब दो दोस्त अपने काम से वापस लौट रहे थे। पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, पीड़ित युवकों में से एक ने सड़क किनारे एक दीवार के पास पेशाब करना शुरू किया, जिसका वहां मौजूद कुछ स्थानीय दबंगों ने विरोध किया। हालांकि, विरोध के बाद युवक वहां से हटने ही वाले थे कि तभी आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। बात सिर्फ जुबानी जंग तक सीमित नहीं रही और देखते ही देखते आरोपियों ने अपने अन्य साथियों को बुला लिया। हमलावरों ने लाठी, डंडों और कुछ धारदार वस्तुओं से दोनों युवकों पर हमला बोल दिया, जिससे वे बुरी तरह घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पीड़ितों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। चश्मदीदों के अनुसार, हमलावर संख्या में ज्यादा थे और वे दोनों युवकों को तब तक पीटते रहे जब तक कि वे अचेत नहीं हो गए। शोर सुनकर जब आसपास के लोग इकट्ठा होने लगे, तो आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायल युवकों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि चोटें काफी गहरी थीं, विशेष रूप से सिर और पीठ के हिस्से में गंभीर घाव हुए थे। खून का रिसाव रोकने और घावों को भरने के लिए दोनों पीड़ितों के शरीर पर कुल मिलाकर 35 टांके लगाने पड़े, जो हमले की बर्बरता को बयां करते हैं।
इस घटना की सूचना मिलने के बाद बाबा हरिदास नगर पुलिस टीम अस्पताल पहुँची और घायलों के बयान दर्ज किए। पुलिस के अनुसार, आरोपियों की पहचान के लिए इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि हमलावर उसी क्षेत्र के रहने वाले अपराधी प्रवृत्ति के युवक हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। हालांकि, घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से पीड़ित परिवार में गहरा रोष और असुरक्षा की भावना बनी हुई है। परिवार का आरोप है कि आरोपियों का इलाके में दबदबा है, जिसके कारण वे खुलेआम ऐसी वारदातों को अंजाम देते हैं। दिल्ली के विभिन्न इलाकों में पिछले कुछ समय में ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है जहाँ पार्किंग, थूकने या पेशाब करने जैसी तुच्छ बातों पर लोगों ने एक-दूसरे की जान लेने की कोशिश की। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ता मानसिक तनाव और कानून का कम होता खौफ लोगों को छोटी-सी बात पर हिंसक बना रहा है।
वारदात के बाद बाबा हरिदास नगर और आसपास के इलाकों में तनावपूर्ण सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलिस की गश्त कम होने के कारण रात के समय असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ जाता है। लोग अपने घरों से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। पीड़ित युवकों के दोस्तों ने बताया कि वे साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उनकी किसी से कोई पुरानी दुश्मनी नहीं थी। यह पूरी तरह से एक तात्कालिक विवाद था जिसे बातचीत से सुलझाया जा सकता था, लेकिन आरोपियों ने कानून हाथ में लेते हुए उन्हें मरणासन्न स्थिति में पहुंचा दिया। फिलहाल, दोनों घायलों की स्थिति स्थिर है लेकिन वे गहरे मानसिक सदमे में हैं।
अस्पताल में भर्ती युवकों की मेडिकल रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई है, जिसमें गंभीर चोटों का विस्तार से विवरण दिया गया है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है और जल्द ही वे सलाखों के पीछे होंगे। इस मामले में पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या हमलावरों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं ताकि इस घटना के बाद किसी भी तरह की जवाबी हिंसा या सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश को रोका जा सके। यह मामला दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा के दावों की पोल खोलता है। सरेआम हुई इस पिटाई ने नागरिक सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेष रूप से बाहरी दिल्ली और ग्रामीण परिवेश वाले इलाकों में ऐसी घटनाएं अक्सर प्रशासन की सुस्ती के कारण बड़ी हो जाती हैं। यदि समय रहते पुलिस ने क्षेत्र में अवैध शराब और असामाजिक तत्वों के जमावड़े पर लगाम लगाई होती, तो शायद यह वारदात नहीं होती। पीड़ितों के परिजनों ने मांग की है कि मामले को फास्ट ट्रैक मोड में चलाया जाए ताकि अपराधियों को कड़ी सजा मिल सके और समाज में एक सख्त संदेश जाए।
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