ईंधन दरों का आकलन: दिल्ली-NCR से लेकर दक्षिण भारत तक क्या कहते हैं आंकड़े?
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले कई दिनों से लगभग स्थिर बनी हुई हैं, जिससे आम उपभोक्ता को कुछ राहत मिल रही
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले कई दिनों से लगभग स्थिर बनी हुई हैं, जिससे आम उपभोक्ता को कुछ राहत मिल रही है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारतीय तेल कंपनियों ने आज भी कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर टिका हुआ है, जबकि मुंबई जैसे महानगरों में ये दरें 103 रुपये के पार पहुंच चुकी हैं। यह स्थिरता राज्य चुनावों से पहले की राजनीतिक संवेदनशीलता को भी दर्शाती है। उपभोक्ता अब ईंधन की कीमतों को लेकर सतर्क हो गए हैं क्योंकि छोटे-छोटे बदलाव भी मासिक बजट को प्रभावित करते हैं। आइए जानते हैं कि 28 अप्रैल 2026 को आपके शहर या राज्य में पेट्रोल-डीजल का क्या हाल है-
आज के प्रमुख शहरों और राज्यों में पेट्रोल-डीजल दरें (रुपये प्रति लीटर)
| जगह/शहर | पेट्रोल (रू./लीटर) | डीजल (रू./लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 94.77 | 87.67 |
| नोएडा | 94.77 | 88.00 (लगभग) |
| लखनऊ | 94.69 | 88.50 |
| कानपुर (UP औसत) | 94.80 (लगभग) | 88.20 (लगभग) |
| बरेली | 94.43 - 95.25 | 88.13 - 88.47 |
| शाहजहांपुर | 94.81 | 87.91 |
| बाराबंकी | 94.81 - 94.90 | 87.95 - 88.10 |
| मुरादाबाद | 94.68 - 95.20 | 88.18 - 88.43 |
| आगरा | 94.80 (लगभग) | 87.57 |
| हरदोई | 94.51 - 95.24 | 88.10 - 88.17 |
| कोलकाता | 105.41 | 92.02 |
| पुणे | 104.62 - 104.83 | 90.34 - 90.57 |
| मुम्बई | 103.50 - 103.54 | 90.03 |
| चेन्नई | 100.80 - 101.06 | 92.39 - 92.61 |
| तमिलनाडु (औसत) | 101.81 | 92.39 |
| मध्य प्रदेश (औसत) | 106.97 - 107.83 | 91.60 - 92.67 |
| राजस्थान (औसत) | 104.75 - 106.05 | 90.49 |
| असम (औसत) | 98.87 - 98.88 | 89.46 - 89.50 |
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें प्रतिदिन सुबह 6 बजे अपडेट होती हैं। ये दरें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, डॉलर-रुपये का एक्सचेंज रेट, सरकारी टैक्स (एक्साइज ड्यूटी और VAT) और तेल कंपनियों के मार्जिन पर निर्भर करती हैं। अप्रैल 2026 में वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें करीब 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही हैं, लेकिन घरेलू स्तर पर कोई बड़ा संशोधन नहीं हुआ। दिल्ली-NCR क्षेत्र में कीमतें पड़ोसी राज्यों की तुलना में अपेक्षाकृत कम हैं क्योंकि यहां VAT दरें नियंत्रित हैं। वहीं, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में उच्च VAT और अन्य स्थानीय करों के कारण पेट्रोल 100-105 रुपये के पार चला गया है। दक्षिण भारत में चेन्नई और तमिलनाडु में डीजल की दरें थोड़ी ऊंची हैं, जो ट्रांसपोर्ट और कृषि क्षेत्र को प्रभावित करती हैं।
उत्तर प्रदेश के छोटे शहरों जैसे बरेली, मुरादाबाद, हरदोई, बाराबंकी और शाहजहांपुर में कीमतें दिल्ली के काफी करीब हैं, लेकिन लॉजिस्टिक खर्च के कारण 0.20-0.70 रुपये का अंतर देखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, बरेली में पेट्रोल कभी-कभी 94.43 रुपये तक गिर जाता है, जबकि मुरादाबाद में यह 95.20 तक जा सकता है। ये छोटे अंतर लंबी दूरी की यात्रा करने वालों के लिए मायने रखते हैं। असम में पेट्रोल की कीमतें अपेक्षाकृत कम (लगभग 98.87 रुपये) हैं, जो पूर्वोत्तर राज्यों की भौगोलिक और कर संरचना को दर्शाता है। वहीं, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्य जहां परिवहन दूरी ज्यादा है, वहां पेट्रोल 104-107 रुपये के आसपास है। तमिलनाडु में औसत पेट्रोल 101.81 रुपये है, जो औद्योगिक गतिविधियों और उच्च मांग के कारण है। पुणे और मुंबई महाराष्ट्र में सबसे महंगे ईंधन वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। पुणे में पेट्रोल 104 रुपये के पार है, जो IT और ऑटोमोबाइल हब होने के कारण मांग बढ़ने से जुड़ा हो सकता है।
स्थिर कीमतों के बावजूद, ईंधन का खर्च परिवार के बजट का बड़ा हिस्सा लेता है। अगर आप रोजाना 50 किलोमीटर ड्राइव करते हैं, तो दिल्ली में पेट्रोल पर मासिक खर्च हजारों रुपये में हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि CNG या इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट करने से लंबे समय में बचत हो सकती है। कृषि क्षेत्र में डीजल की कीमतें सीधे प्रभाव डालती हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश के किसान डीजल पर निर्भर रहते हैं, इसलिए यहां की दरें उनकी लागत बढ़ाती हैं। वहीं, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर निर्भरता बढ़ रही है ताकि व्यक्तिगत वाहन खर्च कम किया जा सके। वैश्विक स्तर पर OPEC+ देशों की उत्पादन नीति और भू-राजनीतिक तनाव तेल की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। अगर कच्चा तेल 105-110 डॉलर प्रति बैरल पहुंचता है, तो भारत में भी कीमतें बढ़ सकती हैं। हालांकि, सरकार ने पिछले वर्षों में एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके उपभोक्ताओं को राहत दी है।
आम आदमी के नजरिए से देखें तो ईंधन की कीमतें सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा हैं। ऑफिस जाने वाले, ट्रक ड्राइवर, किसान और टैक्सी वाले सभी इससे प्रभावित होते हैं। स्थिरता अच्छी खबर है, लेकिन लंबे समय तक कोई कमी न आने से महंगाई का दबाव बना रहता है। इस रिपोर्ट को तैयार करते समय विभिन्न विश्वसनीय प्लेटफॉर्म्स से डेटा क्रॉस-चेक किया गया है ताकि कोई त्रुटि न रहे। कीमतें रोजाना बदल सकती हैं, इसलिए टैंक भरने से पहले अपने नजदीकी पेट्रोल पंप या आधिकारिक ऐप्स पर कन्फर्म कर लें। ईंधन की ये दरें अर्थव्यवस्था की नब्ज हैं। चाहे आप दिल्ली की व्यस्त सड़कों पर हों, लखनऊ की गलियों में, या मुंबई के ट्रैफिक में फंसे हों – हर लीटर ईंधन आपकी जेब और देश की प्रगति दोनों को छूता है। आने वाले दिनों में अगर कोई बदलाव होता है, तो यह वैश्विक बाजार और घरेलू नीतियों पर निर्भर करेगा।
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