सरायकेला में जंगली हाथियों का भीषण कोहराम: मां-बेटी को बेरहमी से कुचलकर मार डाला, गांव में दहशत का माहौल।

झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में मानव-हाथी संघर्ष की एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर

Apr 25, 2026 - 12:26
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सरायकेला में जंगली हाथियों का भीषण कोहराम: मां-बेटी को बेरहमी से कुचलकर मार डाला, गांव में दहशत का माहौल।
सरायकेला में जंगली हाथियों का भीषण कोहराम: मां-बेटी को बेरहमी से कुचलकर मार डाला, गांव में दहशत का माहौल।
  • मौत का तांडव और कुदरत का कहर: सरायकेला के ईचागढ़ में हाथियों ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार, पति ने चौकी के नीचे छिपकर काटी रात
  • झारखंड के जंगलों से आए हाथियों ने बरपाया कहर: मासूम बेटी और पत्नी की दर्दनाक मौत, वन विभाग की सुस्ती पर ग्रामीणों में भारी आक्रोश

झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में मानव-हाथी संघर्ष की एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। जिले के ईचागढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक सुदूरवर्ती गांव में जंगली हाथियों के एक झुंड ने आधी रात को जमकर तांडव मचाया। इस दौरान हाथियों ने एक गरीब परिवार के घर पर धावा बोल दिया और सो रहे मासूम बच्चे व उसकी मां को अपनी चपेट में ले लिया। हाथियों ने कच्चे मकान की दीवारों को ध्वस्त करते हुए अंदर प्रवेश किया और वहां सो रही महिला और उसकी छोटी बेटी को पैरों तले कुचल दिया। इस भयानक हमले में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई जब पूरा गांव गहरी नींद में सोया हुआ था और किसी को भी इस बात का आभास नहीं था कि मौत इतनी करीब है। घटना के समय घर में मौजूद मृतक महिला के पति ने जो आपबीती सुनाई, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। जब हाथियों ने घर की दीवारें तोड़नी शुरू कीं, तो चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। अपनी आंखों के सामने पत्नी और बेटी को काल के गाल में समाते देख पति के पास बचने का कोई रास्ता नहीं था। अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में वह कमरे के कोने में रखी एक मजबूत लकड़ी की चौकी के नीचे घुस गया। हाथी काफी देर तक घर के मलबे को रौंदते रहे और चिंघाड़ते रहे, लेकिन चौकी के नीचे दुबके होने के कारण उस व्यक्ति की जान बाल-बाल बच गई। वह पूरी रात अपनी मृत पत्नी और बेटी के क्षत-विक्षत शवों के पास खामोश और सहमा हुआ बैठा रहा, यह डर उसे सताता रहा कि कहीं हाथी दोबारा वापस न आ जाएं। झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में हाथियों का हमला एक गंभीर समस्या बन चुका है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में हाथियों के हमले में जान गंवाने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य कारण जंगलों का कटान और हाथियों के प्राकृतिक गलियारों (कॉरिडोर) में इंसानी दखल है।

सुबह होते ही जब गांव के अन्य लोग मौके पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देख सबकी रूह कांप गई। हाथियों ने केवल उस मकान को ही नहीं, बल्कि आसपास की फसलों और अन्य संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचाया था। ग्रामीणों ने तुरंत स्थानीय पुलिस और वन विभाग को सूचित किया, लेकिन आक्रोशित लोगों का आरोप है कि सूचना देने के कई घंटों बाद भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। गांव वालों का कहना है कि वे लंबे समय से इस क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही की शिकायत कर रहे थे, लेकिन प्रशासन द्वारा हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इस लापरवाही की वजह से आज एक हंसता-खेलता परिवार पूरी तरह तबाह हो गया है। वन विभाग की टीम जब अंततः घटनास्थल पर पहुंची, तो उन्हें ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने शवों को उठाने से रोक दिया और उचित मुआवजे तथा हाथियों से सुरक्षा की स्थायी व्यवस्था की मांग को लेकर अड़े रहे। विभाग के अधिकारियों ने प्रारंभिक राहत राशि के तौर पर कुछ नकद राशि परिजनों को सौंपी और आश्वासन दिया कि सरकारी नियमों के अनुसार कुल मुआवजे का भुगतान जल्द ही किया जाएगा। हालांकि, ग्रामीणों का तर्क है कि पैसा किसी की जान वापस नहीं ला सकता और उन्हें सुरक्षा चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। क्षेत्र में अभी भी हाथियों का झुंड डेरा डाले हुए है, जिससे लोग शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं।

सरायकेला और आसपास के जंगलों में हाथियों की बढ़ती आक्रामकता के पीछे पारिस्थितिक असंतुलन को एक बड़ा कारण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाथियों को जंगल के भीतर पर्याप्त भोजन और पानी नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण वे रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं। इसके अलावा, हाथियों के परंपरागत रास्तों पर बिजली की लाइनें बिछाने और अवैध खनन गतिविधियों ने भी उन्हें विचलित कर दिया है। हाथियों का यह झुंड अक्सर रात के अंधेरे में गांवों में घुसकर अनाज की तलाश करता है और इस दौरान जो भी उनके रास्ते में आता है, वह उनका कोपभाजन बन जाता है। ईचागढ़ की इस घटना ने एक बार फिर वन प्रबंधन और ग्रामीण सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। प्रशासनिक स्तर पर इस घटना के बाद सुरक्षा ऑडिट की बात कही जा रही है। जिला प्रशासन ने वन विभाग को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित गांवों में 'एलीफेंट वॉच टावर' और सोलर फेंसिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करें ताकि हाथियों के आने की सूचना समय रहते मिल सके। साथ ही, ग्रामीणों को प्रशिक्षित करने की भी योजना बनाई जा रही है कि हाथियों के आमने-सामने होने की स्थिति में वे अपनी जान कैसे बचाएं। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पीड़ित व्यक्ति की मानसिक स्थिति को देखते हुए उसे परामर्श और सहायता प्रदान की जा रही है। गांव में अभी भी सन्नाटा पसरा है और डर के साये में लोग अपने घरों की मरम्मत में जुटे हैं।

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