काशी के कोतवाल के दर पर प्रधानमंत्री- श्रद्धा और विश्वास का संगम, 14 किलोमीटर लंबे रोड शो से उमड़ा जनसैलाब
मंदिर दर्शन से पहले प्रधानमंत्री ने बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) से लेकर काशी विश्वनाथ धाम तक लगभग 14 किलोमीटर लंबा एक भव्य रोड शो किया। इस विशाल जनसमूह ने वाराणसी की सड़कों को केसरिया रंग में सराबोर कर दिया। लहरतारा, कचहरी, अंबेडकर चौराहा, चौ
आस्था और आधुनिकता की जुगलबंदी: काशी विश्वनाथ धाम में पीएम मोदी ने की विशेष पूजा, बनारस को मिली हजारों करोड़ की सौगात
जनसंपर्क का नया कीर्तिमान: काशी की गलियों में गूंजा 'हर-हर महादेव', प्रधानमंत्री के भव्य स्वागत ने बनाया वैश्विक रिकॉर्ड
धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हालिया दौरा न केवल उनकी आध्यात्मिक निष्ठा का परिचायक बना, बल्कि इसने जनसंपर्क के नए आयाम भी स्थापित किए। बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री ने अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया, जिसे उनकी आस्था और जनता के प्रति उनके समर्पण का एक बड़ा प्रतीक माना जा रहा है। सुबह करीब 9:50 बजे जब प्रधानमंत्री मंदिर के प्रवेश द्वार पर पहुंचे, तो 108 बटुकों ने शंखध्वनि और डमरू वादन के साथ उनका पारंपरिक स्वागत किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के गर्भगृह में मुख्य पुजारी पंडित ओम प्रकाश मिश्रा के नेतृत्व में प्रधानमंत्री ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और देश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। इस दौरान उनके चेहरे पर जो आध्यात्मिक शांति दिखी, उसने यह संदेश दिया कि काशी के साथ उनका रिश्ता केवल एक सांसद और क्षेत्र का नहीं, बल्कि एक अटूट भावनात्मक और धार्मिक जुड़ाव का है।
मंदिर दर्शन से पहले प्रधानमंत्री ने बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) से लेकर काशी विश्वनाथ धाम तक लगभग 14 किलोमीटर लंबा एक भव्य रोड शो किया। इस विशाल जनसमूह ने वाराणसी की सड़कों को केसरिया रंग में सराबोर कर दिया। लहरतारा, कचहरी, अंबेडकर चौराहा, चौकाघाट, तेलियाबाग, लहुराबीर और मैदागिन जैसे प्रमुख इलाकों से गुजरते हुए प्रधानमंत्री के काफिले पर स्थानीय निवासियों और कार्यकर्ताओं ने पुष्प वर्षा की। सड़कों के दोनों ओर खड़े हजारों लोगों का उत्साह इस कदर था कि पूरा शहर 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठा। प्रधानमंत्री ने भी हाथ हिलाकर और हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन स्वीकार किया। यह रोड शो न केवल उनके प्रति जनता के प्रेम को दर्शाता है, बल्कि यह उनके द्वारा काशी में किए गए अभूतपूर्व बदलावों और विकास कार्यों के प्रति जनता के आभार का भी प्रतीक बना।
प्रधानमंत्री के इस दौरे का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू 'नारी शक्ति' को समर्पित रहा। उन्होंने बीएलडब्ल्यू ग्राउंड में आयोजित एक विशाल 'महिला सम्मेलन' में हिस्सा लिया, जिसमें हजारों की संख्या में महिलाओं ने शिरकत की। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसका पूरा प्रबंधन, सुरक्षा से लेकर मंच संचालन तक, केवल महिलाओं द्वारा किया गया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि काशी की बेटियां और माताएं आज हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं, जो 'विकसित भारत' के संकल्प की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण को समाज की प्रगति का मुख्य आधार बताया और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद भी किया। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि आगामी समय में महिलाओं की भागीदारी देश की राजनीति और सामाजिक संरचना में और अधिक प्रभावी होने वाली है।
काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प
प्रधानमंत्री के प्रयासों से निर्मित काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर ने बनारस की तस्वीर बदल दी है। गंगा तट से सीधे मंदिर तक पहुंचने का मार्ग अब न केवल सुगम हो गया है, बल्कि यह विश्वस्तरीय सुविधाओं से भी लैस है। प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर में माँ अन्नपूर्णा और माँ गंगा की भी वंदना की। उन्होंने मंदिर में मौजूद बच्चों और अन्य श्रद्धालुओं से भी बातचीत की, जिससे उनकी सहजता और सरलता एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी।
इस दौरे के दौरान केवल आस्था ही केंद्र में नहीं रही, बल्कि विकास की रफ्तार को भी नई ऊर्जा मिली। प्रधानमंत्री ने वाराणसी और आसपास के पूर्वांचल क्षेत्र के लिए लगभग 6,300 करोड़ रुपये की 163 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, रेलवे, सड़क बुनियादी ढांचा और हरित ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। विशेष रूप से बनारस को मिलने वाले नए ओवरब्रिज और जलापूर्ति योजनाओं से शहर की बुनियादी समस्याओं का समाधान होगा। प्रधानमंत्री ने अमूल से जुड़े दुग्ध उत्पादकों के लिए 105 करोड़ रुपये के बोनस का हस्तांतरण भी किया, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का एक बड़ा प्रयास है। यह विकास की वह धारा है जो प्रधानमंत्री के विजन 'विरासत भी, विकास भी' को पूरी तरह चरितार्थ करती है।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो इस भव्य आयोजन के लिए सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे। 14 किलोमीटर लंबे रोड शो के मार्ग पर ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से कड़ी निगरानी रखी गई। भारी भीड़ के बावजूद यातायात प्रबंधन को इस तरह से सुव्यवस्थित किया गया कि आम जनता को कम से कम असुविधा हो। प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस की कई कंपनियां तैनात थीं। अधिकारियों ने बताया कि इस बार के रोड शो में पिछली बार की तुलना में कहीं अधिक जनभागीदारी देखी गई, जो यह संकेत देती है कि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता अपने संसदीय क्षेत्र में निरंतर बढ़ती जा रही है। मंदिर परिसर में भी आम दर्शनार्थियों के लिए सुचारू व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी उपलब्धि रही। प्रधानमंत्री का यह 54वां वाराणसी दौरा उनके और उनकी काशी के बीच के गहरे विश्वास को पुन: पुख्ता कर गया। काशी विश्वनाथ मंदिर में त्रिशूल लहराते हुए उनकी तस्वीर ने सोशल मीडिया पर भी काफी सुर्खियां बटोरीं, जिसे लोगों ने धर्म की रक्षा और संकल्प की शक्ति के रूप में देखा। मंदिर दर्शन के उपरांत वे सीधे हरदोई के लिए रवाना हुए, जहां उन्हें देश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करना था।
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