यूपी में गर्मी का प्रचंड प्रहार: लखनऊ और प्रयागराज में पारा 45.2 डिग्री के पार, आसमान से बरस रही है आग।
उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। राज्य की
- मौसम विभाग का रेड अलर्ट: उत्तर प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में भीषण हीट वेव की चेतावनी, लू के थपेड़ों से जनजीवन अस्त-व्यस्त
- तपती धूप और गर्म हवाओं का कहर: प्रयागराज बना प्रदेश का सबसे गर्म शहर, जानिए कब मिलेगी चिलचिलाती गर्मी से राहत
उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। राज्य की राजधानी लखनऊ और संगम नगरी प्रयागराज में तापमान के रिकॉर्ड टूटते नजर आ रहे हैं। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इन दोनों प्रमुख शहरों में अधिकतम पारा 45.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो सामान्य से कई डिग्री अधिक है। सुबह आठ बजे से ही सूरज की किरणें तीखी होने लगती हैं और दोपहर होते-होते सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। गर्म हवाओं और उच्च आर्द्रता के मेल ने वातावरण को एक भट्टी जैसा बना दिया है, जिससे न केवल इंसान बल्कि पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। मैदानी इलाकों में चल रही पछुआ हवाओं ने आग में घी डालने का काम किया है। राजस्थान और पड़ोसी राज्यों से आने वाली शुष्क और गर्म हवाएं उत्तर प्रदेश के वायुमंडल में प्रवेश कर रही हैं, जिससे 'लू' की तीव्रता कई गुना बढ़ गई है। प्रयागराज, वाराणसी, झांसी और आगरा जैसे जिलों में तापमान लगातार 45 डिग्री के ऊपर बना हुआ है। रात के समय भी न्यूनतम तापमान में अपेक्षित गिरावट नहीं हो रही है, जिससे लोगों को चौबीसों घंटे गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग और स्थानीय पारिस्थितिक परिवर्तनों के कारण इस वर्ष गर्मी के सीजन में तापमान में असामान्य वृद्धि देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें। हीट वेव के दौरान शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) और हीट स्ट्रोक का खतरा सबसे अधिक होता है, जो बुजुर्गों और बच्चों के लिए घातक साबित हो सकता है।
भीषण गर्मी का सबसे बुरा प्रभाव कृषि और बिजली आपूर्ति पर पड़ा है। प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिसके कारण ट्रांसफार्मर फुंकने और लोकल फॉल्ट की खबरें आम हो गई हैं। ग्रामीण इलाकों में 10 से 12 घंटे की बिजली कटौती ने किसानों की समस्याओं को बढ़ा दिया है। फसलों को बचाने के लिए सिंचाई की आवश्यकता बढ़ गई है, लेकिन पानी का स्तर नीचे जाने और बिजली न होने से फसलें सूखने की कगार पर हैं। विशेष रूप से सब्जियों और आम की बागवानी करने वाले किसान इस चिलचिलाती धूप से काफी चिंतित हैं, क्योंकि अधिक गर्मी के कारण फल समय से पहले गिर रहे हैं। मौसम विभाग ने आगामी 48 से 72 घंटों के लिए प्रदेश के पश्चिमी और मध्य भागों में 'सीवियर हीट वेव' का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, वर्तमान में कोई सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ न होने के कारण बारिश की कोई संभावना नहीं दिख रही है। आसमान पूरी तरह साफ रहेगा, जिससे सौर विकिरण सीधे जमीन तक पहुंचेगा। अगले कुछ दिनों में कानपुर, फतेहपुर, बांदा और चित्रकूट जैसे जिलों में पारा 46 डिग्री सेल्सियस को भी छू सकता है। प्रशासन ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए और मनरेगा श्रमिकों के काम के घंटों में बदलाव किया जाए।
शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट के जंगलों और वाहनों के धुएं ने 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव पैदा कर दिया है। लखनऊ जैसे महानगरों में ऊँची इमारतों के कारण हवा का संचार बाधित होता है, जिससे शाम के समय भी गर्मी कम महसूस नहीं होती। सड़कों पर डामर पिघलने जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है और दोपहिया वाहन चालकों के लिए सफर करना सजा जैसा हो गया है। अस्पतालों में लू लगने, तेज बुखार, उल्टी-दस्त और चक्कर आने वाले मरीजों की संख्या में 30 से 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और 'हीट वेव वार्ड' अलग से बनाने के आदेश दिए गए हैं ताकि आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत उपचार मिल सके। गर्मी के इस भीषण दौर में जीवनशैली में बदलाव अनिवार्य हो गया है। लोग शीतल पेय, मट्ठा, लस्सी और तरबूज जैसे फलों का सहारा ले रहे हैं ताकि शरीर का तापमान संतुलित रहे। बाजारों में कूलर और एयर कंडीशनर की मांग में जबरदस्त उछाल आया है, लेकिन निम्न मध्यम वर्ग के लिए बिजली के बिल और उपकरणों की कीमत एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सामाजिक संस्थाएं और नगर निगम कई स्थानों पर प्याऊ लगा रहे हैं और आवारा पशुओं के लिए पानी की नांदें भर रहे हैं। वन्यजीव अभयारण्यों में भी कृत्रिम तालाबों के जरिए जंगली जानवरों को राहत देने की कोशिशें की जा रही हैं।
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