पाकिस्तान की घबराहट- विदेश मंत्री इशाक डार बोले, ‘हम पीछे हटने को तैयार’, भारत की आक्रामकता के सामने झुका इस्लामाबाद।
भारत की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान में बौखलाहट और डर का माहौल साफ दिखाई दे रहा है। 7 मई 2025 को भारत ने पाकिस्तान...
नई दिल्ली/इस्लामाबाद: भारत की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान में बौखलाहट और डर का माहौल साफ दिखाई दे रहा है। 7 मई 2025 को भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के नौ आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था, जिसमें 90 से 100 आतंकवादी मारे गए, जिनमें कई कुख्यात कमांडर शामिल थे। इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने 10 मई को मीडिया से बातचीत में कहा, “भारत को अब आक्रामकता से रुक जाना चाहिए। अगर भारत रुकता है, तो हम भी पीछे हटने को तैयार हैं।” डार के इस बयान को पाकिस्तान की कमजोरी और भारत के दबाव के सामने झुकने की मजबूरी के तौर पर देखा जा रहा है।
- डार का बयान: शांति की गुहार या मजबूरी?
पाकिस्तानी मीडिया को संबोधित करते हुए इशाक डार ने कहा, “हम वाकई शांति चाहते हैं। हमारा उद्देश्य विनाश या धन की बर्बादी नहीं है, बल्कि किसी भी देश की संप्रभुता का सम्मान करना है।” उन्होंने भारत से आग्रह किया कि वह अपनी “आक्रामक नीति” को छोड़े, ताकि दोनों देश तनाव कम कर सकें। डार ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान ने भारत की कार्रवाई का जवाब देने की पूरी तैयारी की थी, लेकिन वह “जिम्मेदार देश” होने के नाते संयम बरत रहा है।
हालांकि, डार का यह बयान उनकी पिछली टिप्पणियों से उलट है। 29 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने पर डार ने पाकिस्तानी संसद में भारत को “युद्ध की धमकी” दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था, “सिंधु का पानी रोका तो जंग तय है।” लेकिन भारत की ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद डार का लहजा नरम पड़ गया है, जो पाकिस्तान की रणनीतिक कमजोरी को दर्शाता है।
- ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान को झटका
7 मई की रात भारतीय वायु सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत बहावलपुर, मुरीदके, मुजफ्फराबाद, कोटली, बाघ, भीमबेर, चेक आमरू, सियालकोट और शकरगढ़ में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। इस ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य, उनके बहनोई हाफिज मुहम्मद जमील, साले मोहम्मद यूसुफ अजहर, और लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कमांडर मुदस्सर खदियान खास और कारी अब्दुल मलिक मारे गए। भारतीय सेना ने दावा किया कि इस कार्रवाई में कोई नागरिक या सैन्य हताहत नहीं हुआ, केवल आतंकी ठिकाने नष्ट किए गए।
पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि भारत ने 24 मिसाइलें दागीं, जिसमें 8 लोग मारे गए और 33 घायल हुए। लेकिन भारतीय सूत्रों ने इसे खारिज करते हुए कहा कि हमले में केवल आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया। इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने लाहौर और सियालकोट में अपने हवाई अड्डों को 48 घंटे के लिए बंद कर दिया और हवाई क्षेत्र को सीमित कर दिया, जो उनकी घबराहट को दर्शाता है।
- पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय गुहार
भारत की इस कार्रवाई से घबराए पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद मांगने की कोशिश की। इशाक डार ने 7 मई को इस्लामाबाद में विदेशी राजदूतों को ब्रीफिंग दी और भारत पर “गैरकानूनी हमले” का आरोप लगाया। उन्होंने ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के महासचिव हिसेन ब्राहिम ताहा से भी बात की और क्षेत्रीय तनाव की स्थिति को बताया। इसके अलावा, डार ने तुर्कiye के विदेश मंत्री हकान फिदान से भी फोन पर बात की थी, जिसमें उन्होंने समर्थन मांगा।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस मामले में तटस्थ रुख अपनाया है। भारत ने साफ किया कि यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ थी, और पहलगाम हमले के सबूत पेश किए, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, “पाकिस्तान आतंकवाद को पनाह देता है, और हमने केवल उन लोगों को निशाना बनाया जिन्होंने हमारे लोगों को मारा।”
भारत ने डार के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि भारत किसी भी तरह की “खोखली धमकी” या “शांति की गुहार” पर ध्यान नहीं देगा। भारतीय सेना की लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है। हमारी कार्रवाई सटीक और प्रभावी थी।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऑपरेशन को पहलगाम हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि बताया और कहा, “न्याय हुआ, जय हिंद।”
भारत में जनता ने ऑपरेशन सिंदूर की जमकर तारीफ की है। पहलगाम हमले की पीड़ित विधवाओं ने इसे “सिंदूर का बदला” बताया। पुणे की संगीता गणबोटे, जिनके पति हमले में मारे गए, ने कहा, “पाकिस्तान अब डर रहा है, और उसे डरना भी चाहिए।” रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डार का बयान पाकिस्तान की सैन्य और कूटनीतिक कमजोरी को दर्शाता है। रिटायर्ड मेजर जनरल जी.डी. बख्शी ने कहा, “पाकिस्तान के पास भारत की कार्रवाई का जवाब देने की क्षमता नहीं है। डार का बयान उनकी हार की स्वीकारोक्ति है।”
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार का ताजा बयान भारत की सैन्य ताकत और कूटनीतिक दबाव के सामने इस्लामाबाद की कमजोरी को उजागर करता है। ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल आतंकी संगठनों की कमर तोड़ी, बल्कि पाकिस्तान को यह अहसास भी कराया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जा सकता है। डार की “पीछे हटने” की बात शांति की इच्छा कम, बल्कि मजबूरी ज्यादा लगती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान अपनी रणनीति में बदलाव करता है या फिर भारत के खिलाफ छद्म युद्ध जारी रखता है।
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