अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड पर योगी का अब तक का सबसे बड़ा बयान, बोले— आस्था से खिलवाड़ करने वाला अपराधी कोई भी हो, बचेगा नहीं
जैसे-जैसे विशेष जांच दल की तफ्तीश के नए-नए चरण सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे यह साफ होता जा रहा है कि इस चोरी को अंजाम देने के लिए बेहद शातिराना और संगठित तरीके अपनाए जा रहे थे। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि नोटों की गिनती (काउंटिंग प्रोसेस) के दौरान कुछ विशेष कर्मचारियों द्वारा सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया जा रहा
- उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल को दी पूरी छूट, दोषियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और गैंगस्टर एक्ट के तहत होगी कठोरतम कार्रवाई
- धार्मिक और राजनैतिक हलकों में मची भारी खलबली, विपक्ष के तीखे हमलों के बीच मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का दिया भरोसा
उत्तर प्रदेश की पावन धार्मिक नगरी अयोध्या में नवनिर्मित प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर से जुड़े चढ़ावे और दान राशि में हुई भारी वित्तीय हेराफेरी के मामले ने अब एक बहुत बड़ा राजनैतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया है। देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था के केंद्र बिंदु राम मंदिर के भीतर घटित इस अति-संवेदनशील घटनाक्रम पर राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी बेहद कड़ी और दोटूक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने इस गंभीर मामले पर एक बहुत बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि भगवान के चरणों में अर्पित किए जाने वाले पवित्र चढ़ावे पर डाका डालने वाला व्यक्ति चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, या उसकी पहुंच प्रशासनिक और प्रबंधकीय व्यवस्था में कितनी ही गहरी क्यों न हो, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री के इस कड़े और आक्रामक रुख के बाद से ही पूरे प्रदेश के प्रशासनिक अमले और मामले से जुड़े संदिग्धों के बीच एक बहुत भारी खलबली मच गई है।
इस बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर राज्य सरकार ने अपनी मंशा पूरी तरह से स्पष्ट कर दी है कि पवित्र धार्मिक स्थलों की गरिमा और उनके वित्तीय प्रबंधन से खिलवाड़ करने वालों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' (शून्य सहनशीलता) की नीति अपनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि जब पूरी दुनिया से राम भक्त अपनी श्रद्धा, निष्ठा और मेहनत की कमाई का एक-एक अंश इस ऐतिहासिक मंदिर के निर्माण और संचालन के लिए समर्पित कर रहे हैं, तब इस तरह की आपराधिक और संदेहास्पद गतिविधियां अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आती हैं। इस पूरे प्रकरण की त्वरित और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस की एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन पहले ही किया जा चुका है, जिसे अब राज्य सरकार की तरफ से स्वतंत्र रूप से काम करने और किसी भी स्तर पर समझौता न करने के कड़े विधिक निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के मुख्य विपक्षी दलों, जिनमें समाजवादी पार्टी और कांग्रेस शामिल हैं, ने सरकार और मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन पर तीखे राजनैतिक हमले शुरू कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि इतने कड़े सुरक्षा घेरे और करोड़ों रुपए के आधुनिक डिजिटल सर्विलांस बजट के बावजूद मंदिर के भीतर महीनों तक इस तरह की धांधली का चलते रहना एक बहुत बड़ी प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। राजनैतिक गलियारों में उठ रहे इन तीखे सवालों और भक्त समुदाय के भीतर पनप रहे गहरे असंतोष का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्वस्त किया है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जा रही है। जांच एजेंसियां बिना किसी राजनैतिक या प्रशासनिक दबाव के पूरी निष्पक्षता के साथ काम कर रही हैं, और बहुत जल्द इस पूरे सुनियोजित खेल के मुख्य सूत्रधारों को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
जैसे-जैसे विशेष जांच दल की तफ्तीश के नए-नए चरण सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे यह साफ होता जा रहा है कि इस चोरी को अंजाम देने के लिए बेहद शातिराना और संगठित तरीके अपनाए जा रहे थे। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि नोटों की गिनती (काउंटिंग प्रोसेस) के दौरान कुछ विशेष कर्मचारियों द्वारा सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था और कड़े शारीरिक तलाशी तंत्र में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर भारी मात्रा में नकदी को बाहर ठिकाने लगाया जा रहा था। इस पूरे मामले में अनुबंधित बैंकिंग संस्थान की भूमिका और उसके प्रशासनिक नियंत्रण पर भी निर्माण समिति के अध्यक्ष द्वारा पहले ही गंभीर सवाल उठाए जा चुके हैं। अब मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद एसआईटी ने बैंक प्रबंधन और आउटसोर्सिंग कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों को भी पूछताछ के दायरे में शामिल कर लिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस बड़ी चूक के पीछे कहीं आंतरिक मिलीभगत तो नहीं थी।
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अयोध्या के स्थानीय संत समाज, मठाधीशों और विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रमुखों में भी गहरा रोष व्याप्त है। संतों का मानना है कि अयोध्या की पावन भूमि और प्रभु श्री राम का मंदिर पूरे विश्व के सनातन धर्मावलंबियों के स्वाभिमान का प्रतीक है, और इसके पवित्र कोष में सेंधमारी करने वाले लोग समाज और धर्म के सबसे बड़े शत्रु हैं। स्थानीय धार्मिक संगठनों ने मुख्यमंत्री के इस कड़े बयान का स्वागत किया है और मांग की है कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ ऐसी दंडात्मक मिसाल पेश की जानी चाहिए जो भविष्य में किसी भी अन्य पावन धार्मिक स्थल की तरफ आंख उठाने वालों के मन में खौफ पैदा कर सके। जनभावनाओं के इस भारी दबाव को देखते हुए ही मुख्यमंत्री ने अपने बयान में अपराधियों के खिलाफ कठोरतम राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं।
प्रशासनिक स्तर पर इस घटना से सबक लेते हुए अब भविष्य के लिए कई बड़े और अभूतपूर्व सुधारात्मक कदम उठाए जाने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और राज्य के गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया है, जिसमें मंदिर परिसर की आंतरिक वित्तीय सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से री-स्ट्रक्चर (पुनर्गठित) करने का निर्णय लिया गया है। अब दान पेटियों से धन निकालने और उसकी गिनती करने की पूरी व्यवस्था को आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कैमरों और बायोमेट्रिक लॉक सिस्टम से लैस किया जा रहा है, जिसमें मानवीय हस्तक्षेप को लगभग खत्म कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, बिना किसी रसीद वाले गुप्त दान और सोने-चांदी के आभूषणों के भौतिक सत्यापन के लिए एक स्वतंत्र ऑडिट विंग की नियुक्ति भी अनिवार्य की जा रही है।
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