गाजियाबाद में कांवड़ियों को जूस में पेशाब मिलाकर बेचने का मामला: दो विक्रेता गिरफ्तार, जांच शुरू।
Ghaziabad Crime News: गाजियाबाद के नंदग्राम इलाके में 13 जुलाई 2025 को एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसमें कांवड़ यात्रा मार्ग पर जूस में पेशाब और...
गाजियाबाद के नंदग्राम इलाके में 13 जुलाई 2025 को एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसमें कांवड़ यात्रा मार्ग पर जूस में पेशाब और थूक मिलाकर बेचने के आरोप में दो जूस विक्रेताओं, जीशान और महताब, को पुलिस ने गिरफ्तार किया। यह घटना दिल्ली-मेरठ राजमार्ग पर सिहानी चुंगी के पास 'दिल्ली जूस कॉर्नर' नामक दुकान पर हुई, जो कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की, दुकान से संदिग्ध सामग्री जब्त की, और खाद्य सुरक्षा विभाग ने जूस के नमूने जांच के लिए भेजे। इस घटना ने न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत किया, बल्कि खाद्य सुरक्षा और सामाजिक विश्वास पर भी गंभीर सवाल उठाए।
13 जुलाई 2025, रविवार को गाजियाबाद के नंदग्राम थाना क्षेत्र में दिल्ली-मेरठ राजमार्ग पर सिहानी चुंगी के पास 'दिल्ली जूस कॉर्नर' पर हंगामा मच गया। विश्व हिंदू परिषद के महानगर प्रचार प्रमुख अश्वनी शर्मा के नेतृत्व में कुछ स्थानीय लोग और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता दुकान पर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि दुकान पर काम करने वाले दो कर्मचारी, जीशान और महताब, कांवड़ियों को जूस में पेशाब और थूक मिलाकर बेच रहे थे। शिकायत के अनुसार, दो युवकों ने दुकान पर जूस पीने के दौरान विक्रेताओं को संदिग्ध गतिविधि में शामिल देखा और इसका वीडियो बनाया। इस वीडियो में कथित तौर पर विक्रेता जूस में थूकते हुए दिखाई दिए।
सूचना मिलते ही बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने "हर हर महादेव" और "जय श्री राम" के नारे लगाए और दुकान को बंद करने की मांग की। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। नंदग्राम थाना पुलिस ने जीशान और महताब को हिरासत में लिया। दुकान की तलाशी के दौरान एक बोतल में संदिग्ध तरल पदार्थ मिला, जिसे हिंदू संगठनों ने पेशाब बताया। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जूस और अन्य सामग्री के नमूने लिए, जिन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। अपर पुलिस आयुक्त पूनम मिश्रा ने बताया कि नमूनों की रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर आने की उम्मीद है, और प्रारंभिक जांच में दुकान में गंदगी और अनियमितताएं पाई गई हैं, जिसके कारण दुकान को सील कर दिया गया है।
'दिल्ली जूस कॉर्नर' का मालिक सलमान बताया गया है, जो बहराइच का निवासी है। दुकान पर जीशान और महताब कर्मचारी के रूप में काम करते थे। विश्व हिंदू परिषद के अश्वनी शर्मा ने बताया कि यह दुकान कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित है, जहां सावन के महीने में लाखों कांवड़िए गुजरते हैं। उनकी शिकायत थी कि विक्रेता जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और माहौल बिगाड़ने की साजिश कर रहे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दुकान का नाम 'दिल्ली जूस कॉर्नर' रखकर ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा था, क्योंकि यह नाम हिंदू-प्रेरित लगता है, जबकि विक्रेता दूसरे समुदाय से हैं।
यह पहली बार नहीं है जब गाजियाबाद में इस तरह का मामला सामने आया है। 12 जुलाई 2025 को विजयनगर थाना क्षेत्र के सिद्धार्थ विहार में 'भारत जूस कॉर्नर' पर भी जूस में थूक मिलाने का आरोप लगा था। उस मामले में लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन जांच में आरोप झूठे पाए गए। इस बार, नंदग्राम की घटना ने कांवड़ यात्रा के संवेदनशील समय के कारण और अधिक ध्यान आकर्षित किया।
पुलिस ने तुरंत दोनों आरोपियों, जीशान और महताब, को हिरासत में लिया और नंदग्राम थाने में पूछताछ शुरू की। अपर पुलिस आयुक्त पूनम मिश्रा ने बताया कि शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी भावना अगरिया की अगुवाई में एक टीम ने दुकान से जूस, पानी, और संदिग्ध बोतल के नमूने लिए। ये नमूने प्रयोगशाला में भेजे गए हैं ताकि यह पुष्टि हो सके कि क्या उनमें पेशाब या अन्य हानिकारक पदार्थ मौजूद थे।
पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि अफवाहें फैलाने या साम्प्रदायिक तनाव भड़काने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। दुकान को फिलहाल सील कर दिया गया है, और जांच पूरी होने तक इसे बंद रखा जाएगा।
यह घटना सावन के पवित्र महीने में हुई, जब कांवड़ यात्रा अपने चरम पर होती है। कांवड़िए, जो भगवान शिव के भक्त हैं, हरिद्वार और अन्य तीर्थ स्थानों से गंगा जल लेकर अपने गंतव्य की ओर जाते हैं। गाजियाबाद का दिल्ली-मेरठ राजमार्ग इस यात्रा का एक प्रमुख मार्ग है, और इस तरह की घटना ने धार्मिक भावनाओं को गहरा आघात पहुंचाया है। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने इसे 'थूक जिहाद' करार दिया और आरोप लगाया कि यह कांवड़ियों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने की साजिश है।
सोशल मीडिया पर इस घटना ने व्यापक आक्रोश पैदा किया। कई उपयोगकर्ताओं ने इसे "शर्मनाक" और "सामाजिक विश्वास के साथ धोखा" बताया। कुछ ने लिखा, "यह सिर्फ खाद्य सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की साजिश है।" हालांकि, कुछ लोगों ने जांच पूरी होने तक संयम बरतने की सलाह दी और कहा कि अफवाहों से बचना चाहिए।
गाजियाबाद में हाल के महीनों में खाद्य पदार्थों में मिलावट के कई मामले सामने आए हैं। सितंबर 2024 में लोनी बॉर्डर के इंद्रापुरी कॉलोनी में 'खुशी जूस कॉर्नर' पर जूस में पेशाब मिलाने का मामला सामने आया था। उस मामले में दुकानदार आमिर और उसके एक सहयोगी को गिरफ्तार किया गया था, और दुकान से एक लीटर पेशाब से भरा कंटेनर बरामद हुआ था। इसके अलावा, विजयनगर में भी जूस में थूक मिलाने की शिकायतें दर्ज की गई थीं, लेकिन कुछ मामलों में आरोप झूठे पाए गए।
इन घटनाओं ने स्थानीय लोगों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और विक्रेताओं की विश्वसनीयता को लेकर अविश्वास पैदा किया है। कुछ संगठनों ने मांग की है कि दुकानदारों को अपनी पहचान स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी चाहिए ताकि ग्राहकों को गुमराह न किया जाए।
इस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 272 (खाद्य पदार्थों में मिलावट), 274 (हानिकारक पदार्थों का उपयोग), और 275 (स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सामग्री बेचना) के तहत मामला दर्ज किया है। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि कांवड़ियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस तरह के मामलों में सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। सितंबर 2024 में लोनी की घटना के बाद उन्होंने विधायक नंदकिशोर गुर्जर से कार्रवाई की जानकारी ली थी और दोषियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने की मांग का समर्थन किया था।
यह घटना न केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ी है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है। जूस में पेशाब या थूक जैसे पदार्थ मिलाना न केवल अस्वच्छ है, बल्कि इससे गंभीर बीमारियां, जैसे बैक्टीरियल इन्फेक्शन, वायरल हेपेटाइटिस, या अन्य पेट संबंधी रोग फैल सकते हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच से यह स्पष्ट होगा कि जूस में वास्तव में क्या मिलाया गया था।
इसके अलावा, इस तरह की घटनाएं सामाजिक विश्वास को कमजोर करती हैं। लोग सड़क किनारे की दुकानों से खाद्य पदार्थ खरीदने में हिचकिचाने लगे हैं। हिंदू संगठनों ने मांग की है कि सभी खाद्य विक्रेताओं को लाइसेंस और स्वच्छता मानकों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
कठोर खाद्य सुरक्षा नियम: खाद्य विक्रेताओं के लिए नियमित निरीक्षण और लाइसेंस अनिवार्य किया जाए।
सार्वजनिक जागरूकता: लोगों को संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत शिकायत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
सीसीटीवी निगरानी: कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
कानूनी कार्रवाई: दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई, जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, लागू की जाए।
सामुदायिक संयम: लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने और जांच के नतीजों का इंतजार करने की अपील की जाए।
गाजियाबाद के नंदग्राम में जूस में पेशाब और थूक मिलाने का मामला न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक विश्वास के लिए भी खतरा है। पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की त्वरित कार्रवाई से स्थिति को नियंत्रित किया गया, लेकिन यह घटना समाज में गहरे अविश्वास को दर्शाती है। जांच के नतीजे इस मामले की सच्चाई को सामने लाएंगे, लेकिन तब तक लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की गई है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि खाद्य सुरक्षा और धार्मिक संवेदनशीलता को बनाए रखने के लिए और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
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