ओडिशा के कोरकुंडा गांव में बच्चे का सिर स्टील के बर्तन में फंसा, दमकल कर्मियों ने सुरक्षित निकाला
परिवार ने तुरंत स्थानीय पुलिस और अग्निशमन विभाग को सूचना दी। मलकानगिरी अग्निशमन केंद्र की टीम तुरंत मौके पर पहुंची, लेकिन बच्चे की हालत को देखते हुए उसे अग्नि
25 जुलाई 2025 को ओडिशा के मलकानगिरी जिले के कोरकुंडा गांव में एक हैरान करने वाली घटना घटी। एक चार साल का बच्चा खेलते समय अपना सिर स्टील के बर्तन में फंसा बैठा। बच्चा दर्द से रोने और चिल्लाने लगा। परिवार वाले और पड़ोसी उसे निकालने की कोशिश में नाकाम रहे। बाद में बच्चे को मलकानगिरी अग्निशमन केंद्र ले जाया गया, जहां दमकल कर्मियों ने कटर की मदद से बर्तन काटकर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, और लोग दमकल कर्मियों की तारीफ कर रहे हैं।
यह घटना मलकानगिरी जिले के माथिली ब्लॉक के कोरकुंडा गांव में हुई। बच्चा, जिसका नाम स्थानीय स्रोतों ने प्रदीप मांझी बताया, अपने घर में खेल रहा था। खेल-खेल में उसने स्टील के एक गोल बर्तन में सिर डाल लिया, जो उसके गले में फंस गया। बर्तन इतना तंग था कि बच्चे का सिर बाहर नहीं निकल पा रहा था। बच्चे की चीख सुनकर परिवार वाले और पड़ोसी इकट्ठा हो गए। कई कोशिशों के बावजूद वे बर्तन हटा नहीं पाए। बच्चा दर्द और डर से लगातार रो रहा था।
परिवार ने तुरंत स्थानीय पुलिस और अग्निशमन विभाग को सूचना दी। मलकानगिरी अग्निशमन केंद्र की टीम तुरंत मौके पर पहुंची, लेकिन बच्चे की हालत को देखते हुए उसे अग्निशमन केंद्र ले जाने का फैसला किया गया। वहां दमकल कर्मियों ने सावधानी से एक विशेष कटर मशीन का इस्तेमाल किया। उन्होंने बर्तन को काटकर बच्चे को सुरक्षित निकाला। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 30 मिनट लगे। बच्चे को मामूली खरोंच आई, लेकिन कोई गंभीर चोट नहीं थी।
मलकानगिरी अग्निशमन केंद्र के प्रमुख रमेश चंद्र साहू ने बताया कि उनकी टीम को सुबह करीब 10 बजे सूचना मिली थी। बच्चे की हालत देखकर उन्होंने तुरंत कार्रवाई शुरू की। दमकल कर्मियों ने पहले बच्चे को शांत करने की कोशिश की और फिर सावधानी से बर्तन काटा ताकि बच्चे को कोई नुकसान न हो। साहू ने कहा, "हमारी प्राथमिकता बच्चे की सुरक्षा थी। हमने सुनिश्चित किया कि कटिंग के दौरान बच्चे को कोई चोट न पहुंचे।"
बच्चे को बचाने के बाद उसे मलकानगिरी के जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जांच की। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है और उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई। परिवार ने दमकल कर्मियों और अस्पताल के स्टाफ का दिल से आभार जताया।
बच्चे के पिता, रमेश मांझी, ने बताया कि प्रदीप उनके तीन बच्चों में सबसे छोटा है। उन्होंने कहा, "हम बहुत डर गए थे। बच्चा दर्द से चिल्ला रहा था और हम कुछ नहीं कर पा रहे थे। दमकल कर्मियों ने समय पर पहुंचकर हमारे बेटे की जान बचाई। हम उनके बहुत आभारी हैं।" गांव वालों ने भी इस घटना को चमत्कार बताया और दमकल कर्मियों की तारीफ की। एक पड़ोसी ने कहा, "यह देखकर बहुत डर लग रहा था, लेकिन दमकल वालों ने बहुत समझदारी से काम किया।"
इस घटना का वीडियो स्थानीय लोगों ने रिकॉर्ड किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। वीडियो में दमकल कर्मी सावधानी से बर्तन काटते हुए दिख रहे हैं, जबकि बच्चा उनकी गोद में बैठा है। वीडियो के साथ लोग दमकल कर्मियों की बहादुरी और त्वरित कार्रवाई की प्रशंसा कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "मलकानगिरी अग्निशमन विभाग को सलाम। आपने एक बच्चे की जान बचाई।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "यह वीडियो दिखाता है कि हमारे दमकल कर्मी कितने समर्पित हैं।"
यह पहली बार नहीं है जब ओडिशा में ऐसा मामला सामने आया है। मार्च 2025 में सुंदरगढ़ जिले के बोनाई में भी एक चार साल के बच्चे का सिर स्टील के बर्तन में फंस गया था। उस समय भी परिवार ने बच्चे को बोनाई उप-मंडल अस्पताल ले जाया, जहां डॉक्टरों ने बर्तन काटकर बच्चे को बचाया। इस तरह की घटनाएं बच्चों के जिज्ञासु स्वभाव और घर में उपलब्ध वस्तुओं के कारण हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को बच्चों को ऐसी चीजों से दूर रखना चाहिए, जिनमें उनका सिर या शरीर फंस सकता हो।
ओडिशा अग्निशमन सेवा का गठन 1944 में हुआ था और यह राज्य में आग बुझाने और बचाव कार्यों के लिए जाना जाता है। मलकानगिरी जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में भी दमकल कर्मी आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई करते हैं। इस घटना ने एक बार फिर उनकी मेहनत और समर्पण को सामने लाया। ओडिशा अग्निशमन विभाग के पास 153 स्टेशन और 350 से अधिक फायर उपकरण हैं, जो ऐसी घटनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कोरकुंडा गांव की इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि समय पर कार्रवाई और समर्पण से किसी की जान बचाई जा सकती है। मलकानगिरी अग्निशमन विभाग ने अपनी कुशलता और मानवता का परिचय दिया। यह घटना माता-पिता के लिए भी एक सबक है कि बच्चों को ऐसी वस्तुओं से दूर रखें, जो उनके लिए खतरनाक हो सकती हैं।
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