Gurdaspur Teacher Suicide: काम के बोझ से परेशान सरकारी शिक्षक ने नहर में कूदकर दी जान, साथी को किया था फोन

पंजाब के गुरदासपुर में सरकारी प्राइमरी शिक्षक गुरप्रीत सिंह ने SIR ड्यूटी और काम के अत्यधिक बोझ से तंग आकर नहर में छलांग लगा दी। देर शाम गोताखोरों ने शव बरामद किया।

Jul 8, 2026 - 12:02
Jul 8, 2026 - 12:03
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Gurdaspur Teacher Suicide: काम के बोझ से परेशान सरकारी शिक्षक ने नहर में कूदकर दी जान, साथी को किया था फोन
Gurdaspur Teacher Suicide Workload
  • पंजाब के गुरदासपुर में दर्दनाक घटना: SIR ड्यूटी के मानसिक तनाव में प्राइमरी स्कूल शिक्षक ने की आत्महत्या
  • "मुझसे अब यह बोझ नहीं संभलता..." साथी को फोन कर पंजाब के सरकारी शिक्षक ने नहर में लगाई छलांग, मौत
  • गुरदासपुर में भारी प्रशासनिक तनाव ने ली जान: सरकारी स्कूल शिक्षक ने नहर में कूदकर की आत्महत्या

पंजाब के गुरदासपुर जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ भैणी मियां खां स्थित एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के शिक्षक गुरप्रीत सिंह ने कथित तौर पर विभाग के काम के अत्यधिक बोझ और मानसिक तनाव से परेशान होकर मंगलवार सुबह भट्टियां पुल के पास नहर में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। इस आत्मघाती कदम को उठाने से ठीक पहले उन्होंने अपने साथी शिक्षक को फोन कर विभाग द्वारा चलाए जा रहे एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) अभियान की ड्यूटी से जुड़े भारी दबाव की व्यथा साझा की थी। देर शाम गोताखोरों की मदद से शिक्षक का शव बरामद कर लिया गया है। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और आने वाले दिनों में शिक्षकों के कार्यबल के मानसिक स्वास्थ्य और विभागीय दबावों पर बड़े सवाल खड़े होने की उम्मीद है।

यह दर्दनाक वाकया मंगलवार सुबह का है, जिसने पंजाब के शिक्षा जगत और प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया है। सरकारी प्राइमरी स्कूल में कार्यरत शिक्षक गुरप्रीत सिंह ने काम के असहनीय बोझ के कारण अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। बताया जा रहा है कि वे पिछले कुछ दिनों से विभागीय कार्यों और विशेष तौर पर गैर-शैक्षणिक या अतिरिक्त सर्वेक्षण संबंधी ड्यूटियों के चलते अत्यधिक मानसिक तनाव का सामना कर रहे थे। इसी अवसाद के चलते उन्होंने भट्टियां नहर में कूदकर आत्मघाती कदम उठाया। देर शाम स्थानीय प्रशासन और गोताखोरों की कड़ी मशक्कत के बाद उनका पार्थिव शरीर पानी से बाहर निकाला जा सका।

विस्तृत विवरण के अनुसार, गांव सल्लोपुर के रहने वाले गुरप्रीत सिंह (पुत्र महिंदर सिंह) रोज की तरह घर से निकले थे, लेकिन वे स्कूल जाने के बजाय भट्टियां पुल के समीप स्थित नहर के पास पहुंच गए। वहाँ उन्होंने नहर में कूदने से ऐन पहले अपने साथी शिक्षक गुरप्रताप सिंह को मोबाइल फोन पर संपर्क किया। फोन कॉल के दौरान गुरप्रीत की आवाज में गहरा डर और हताशा साफ महसूस की जा रही थी। उन्होंने रोते हुए अपने साथी से कहा कि वे भट्टियां नहर के पास खड़े हैं और उनकी गाड़ी पास ही खड़ी है, जिसमें उनका सारा जरूरी सामान और दस्तावेज रखे हैं।

गुरप्रीत ने फोन पर बताया कि प्रदेश में 25 जून से शुरू हुए एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) अभियान के तहत उन्हें जो विशेष जिम्मेदारियां और ड्यूटी सौंपी गई थीं, उसका उन पर भारी दबाव था। उन्होंने व्यथित होकर कहा, "मुझसे अब यह काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है, इस काम का बोझ मेरे बर्दाश्त से बाहर हो चुका है।" साथी शिक्षक कुछ समझ पाते या उन्हें ढांढस बंधा पाते, इससे पहले ही गुरप्रीत ने फोन काट दिया और नहर की तेज लहरों में छलांग लगा दी। इसके बाद तुरंत स्थानीय पुलिस, गोताखोरों और ग्रामीणों को सूचित किया गया, जिन्होंने लंबी खोजबीन के बाद देर शाम उनका शव बरामद किया।

इस भयावह घटना के बाद साथी शिक्षकों और स्थानीय ग्रामीणों में गहरा रोष और शोक व्याप्त है। मृतक शिक्षक के साथी गुरप्रताप सिंह, सिमरन सिंह और गांव के सरपंच कौशल सिंह ने प्रशासनिक रवैये पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, "गुरप्रीत एक बेहद कर्मठ और हंसमुख शिक्षक थे। लेकिन पिछले कुछ दिनों से एसआईआर अभियान की अतिरिक्त ड्यूटी ने उन्हें बुरी तरह तोड़ दिया था। शिक्षा विभाग द्वारा समय सीमा के भीतर काम पूरा करने का जो अनुचित दबाव बनाया जा रहा है, यह आत्महत्या उसी का सीधा नतीजा है।"

स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। परिजनों और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर सीआरपीसी की संबंधित धाराओं के तहत जांच की जा रही है। गाड़ी से मिले सामान और फोन कॉल रिकॉर्ड की भी गहनता से तफ्तीश की जा रही है।

इस दुखद घटना का पंजाब के शिक्षक संगठनों और प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरा असर देखने को मिल रहा है:

शिक्षकों में आक्रोश: राज्य के विभिन्न शिक्षक यूनियनों ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और गैर-शैक्षणिक कार्यों व भारी-भरकम अभियानों के नाम पर शिक्षकों के मानसिक उत्पीड़न को तुरंत रोकने की मांग की है।

मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा: इस घटना ने एक बार फिर सरकारी कर्मचारियों, विशेषकर शिक्षकों के कार्यस्थल पर अत्यधिक तनाव और मानसिक अवसाद के मुद्दे को मुख्यधारा में ला खड़ा किया है।

अभियान पर असर: 25 जून से जारी एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) अभियान की रूपरेखा और इसके क्रियान्वयन के तरीकों को लेकर अब विभाग को कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

पुलिस इस मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका और उन परिस्थितियों की जांच करेगी, जिनकी वजह से शिक्षक इस हद तक मानसिक अवसाद में चले गए। वहीं, विभिन्न शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार से मृतक के परिवार के लिए उचित मुआवजे और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक तूल भी पकड़ सकता है, जहां विपक्ष सरकार को कर्मचारियों की कार्यदशाओं के मुद्दे पर घेरने की रणनीति बना रहा है। उम्मीद है कि इस घटना के बाद शिक्षा विभाग अपनी नीतियों और ड्यूटियों के आवंटन की समय-सीमा पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होगा।

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