114 मुकदमों का बोझ, पत्नी पर 80-85 केस, 'मुर्गी डकैती' का जिक्र कर आंखें हुईं नम, आजम खान का भावुक बयान
आजम खान का राजनीतिक सफर लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वे रामपुर से दस बार विधायक चुने गए। 2019 में लोकसभा सदस्य भी बने। लेकिन 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद उनके खिलाफ मु
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान इन दिनों अपनी कानूनी लड़ाई के कारण सुर्खियों में हैं। हाल ही में जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने एक साक्षात्कार में अपनी और अपनी पत्नी तजीन फातिमा पर दर्ज मुकदमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन पर 114 मुकदमे चल रहे हैं, जबकि उनकी प्रोफेसर पत्नी पर 80 से 85 केस हैं। भावुक होते हुए उन्होंने एक पुराने मामले का हवाला दिया, जिसमें उन्हें 'मुर्गी डकैती' के आरोप में फंसाया गया। खान ने इसे राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि ये सब उनकी आवाज दबाने के लिए हैं। यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा रहा है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी इन मुकदमों को बदले की कार्रवाई करार दिया है। आजम खान का यह इमोशनल अंदाज उनके समर्थकों को भावुक कर रहा है।
आजम खान का राजनीतिक सफर लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वे रामपुर से दस बार विधायक चुने गए। 2019 में लोकसभा सदस्य भी बने। लेकिन 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद उनके खिलाफ मुकदमों की बाढ़ आ गई। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, रामपुर में ही 106 केस दर्ज हैं। बाकी पांच मामले लखनऊ, फिरोजाबाद और मुरादाबाद में हैं। इनमें ज्यादातर भूमि हड़पने, धोखाधड़ी, आपराधिक धमकी और भ्रष्टाचार के आरोप हैं। खान का कहना है कि ये सब झूठे हैं। वे कहते हैं कि सरकार ने उन्हें तोड़ने की कोशिश की, लेकिन वे मजबूत हैं। उनकी पत्नी तजीन फातिमा भी कई मामलों में सहआरोपी हैं। वे रामपुर सदर से विधायक रह चुकी हैं। खान ने कहा कि उनकी पत्नी एक सम्मानित प्रोफेसर हैं, लेकिन राजनीति में आने के बाद उन्हें भी निशाना बनाया गया।
जेल से बाहर आने के बाद खान का पहला बड़ा बयान 24 सितंबर 2025 को आया। उन्होंने कहा कि वे सभी मुकदमों से बरी होकर साफ निकलेंगे। लेकिन बातों-बातों में उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने 'मुर्गी डकैती' वाले केस का जिक्र किया। यह मामला 2019 का है। रामपुर के डुंगरपुर बस्ती में एक घर से कथित तौर पर 15 हजार रुपये और मुर्गियां चुराने का आरोप लगा। एक महिला ने शिकायत की कि खान और उनके साथियों ने घर तोड़ा और लूटपाट की। पुलिस ने खान को मुख्य आरोपी बनाया। लेकिन 2024 में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने सबूतों के अभाव में उन्हें और छह अन्य को बरी कर दिया। खान के वकील नसीर सुल्तान ने कहा कि यह पूरी तरह झूठा केस था। खान ने इसे उदाहरण बताते हुए कहा कि इतने छोटे-मोटे आरोपों से उन्हें फंसाया गया। वे बोले, मुर्गी डकैती जैसी बातें भी बनाई गईं।
यह केस खान के लिए सिर्फ एक नहीं, बल्कि सैकड़ों झूठे मुकदमों का प्रतीक है। डुंगरपुर कॉलोनी से जुड़े कुल 12 मुकदमे थे। इनमें मारपीट, लूट और धमकी के आरोप थे। खान पर आरोप था कि उन्होंने कॉलोनी के निवासियों को जबरन बेदखल किया। लेकिन अदालत ने पाया कि कोई ठोस सबूत नहीं। सितंबर 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अन्य डुंगरपुर मामले में उन्हें जमानत दी। यह केस 10 साल की सजा से जुड़ा था। खान ने कहा कि जेल में उन्होंने 22 किलो वजन कम कर लिया। लेकिन उनकी हिम्मत नहीं टूटी। वे कहते हैं कि ये मुकदमे उनकी राजनीतिक ताकत से डरने वालों की चाल हैं।
आजम खान की पत्नी तजीन फातिमा पर भी मुकदमों का बोझ है। खान ने कहा कि उन पर 80 से 85 केस हैं। इनमें जन्म प्रमाण पत्र फर्जीवाड़ा, भूमि विवाद और धोखाधड़ी शामिल हैं। एक प्रमुख मामला 2018 का है। भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने शिकायत की कि खान परिवार ने बेटे अब्दुल्ला आजम के लिए दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाए। एक में जन्मस्थान रामपुर बताया, दूसरे में संभल। इससे अब्दुल्ला को विधानसभा चुनाव लड़ने में फायदा हुआ। रामपुर कोर्ट ने 2023 में तीनों को दोषी ठहराया। सजा सुनाई गई। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सजा निलंबित कर दी। हालांकि सजा बरकरार रही, जिससे अब्दुल्ला की सदस्यता रद्द हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 में इस पर नोटिस जारी किया। तजीन ने कहा कि यह साजिश है। वे प्रोफेसर हैं, राजनीति में सिर्फ पति के समर्थन में आईं।
खान परिवार की मुश्किलें 2020 से बढ़ीं। फरवरी में वे तीनों जेल गए। जन्म प्रमाण पत्र मामले में सरेंडर किया। खान को सितापुर जेल में रखा गया। वहां उन्होंने 23 महीने काटे। बेटा अब्दुल्ला हार्दोई जेल में 17 महीने रहा। सितंबर 2025 में खान को सभी 79 आपराधिक मुकदमों में जमानत मिल गई। आखिरी जमानत रामपुर के सिविल लाइंस थाने के धोखाधड़ी मामले में मिली। लेकिन कुल 111 मुकदमों में से 81 अभी ट्रायल के चरण में हैं। रामपुर कोर्ट में अक्टूबर 2025 में कई फैसले आने हैं। एक धोखाधड़ी मामले में तजीन के खिलाफ फैसला 8 अक्टूबर को। फंससिंहा इलाके में भूमि हड़पने के केस में आरोप तय होंगे। खान के सहयोगियों पर भी कार्रवाई हो रही।
समाजवादी पार्टी ने खान को अपना पुराना योद्धा माना। अखिलेश यादव ने कहा कि सत्ता में आने पर सभी मुकदमे वापस लेंगे। लेकिन रिहाई के समय अखिलेश या अन्य बड़े नेता नहीं पहुंचे। रामपुर सांसद मोहिबुल्लाह नदवी और मुरादाबाद सांसद रुचि वीरा ही मिले। खान ने कहा कि कोई नाराजगी नहीं। वे अकेले जेल में रहे, लेकिन मजबूत बने। उन्होंने बीएसपी जॉइन करने की अफवाहों को खारिज किया। कहा कि वे समाजवादी ही रहेंगे। खान का कहना है कि रामपुर में उनकी राजनीतिक ताकत अभी बरकरार है। लेकिन जेल ने उन्हें कमजोर किया। पहले सड़कें जाम हो जातीं, अब सैकड़ों समर्थक ही इकट्ठा होते हैं।
यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। समर्थकों ने कहा कि आजम भाई निर्दोष हैं। एक यूजर ने लिखा कि मुर्गी डकैती जैसी हास्यास्पद आरोप भी लगाए गए। विपक्ष ने इसे ड्रामा बताया। भाजपा का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है। खान ने कहा कि वे साफ निकलेंगे। लेकिन लंबी कानूनी लड़ाई बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये मुकदमे राजनीतिक प्रतिशोध हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले नफरत फैलाने वाले भाषण के केस से शुरूआत हुई। उसमें 2023 में बरी हो गए। लेकिन अपील लंबित हैं।
आजम खान का जन्म 1948 में रामपुर में हुआ। वे गरीब परिवार से हैं। बीड़ी मजदूरों और रिक्शा चालकों के संघ बनाए। नवाब परिवार की राजनीतिक पकड़ तोड़ी। समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य हैं। मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे। लेकिन हाल के वर्षों में पार्टी में मतभेद की खबरें आईं। खान ने कहा कि वे अकेले लड़े। जेल में पढ़ाई की। कुरान शरीफ सीखी। अब वे रामपुर लौटे हैं। समर्थक उनका स्वागत कर रहे। लेकिन स्वास्थ्य कमजोर है। वजन घटा। डॉक्टरों ने आराम की सलाह दी।
कुल मिलाकर, आजम खान का यह भावुक बयान उनकी पीड़ा बयान करता है। 114 मुकदमों का जिक्र कर वे कहते हैं कि सच्चाई जीतेगी। पत्नी पर 80-85 केसों से परिवार टूटने की कगार पर। 'मुर्गी डकैती' जैसे केस हंसी उड़ाते हैं। लेकिन खान हार नहीं मान रहे। वे कहते हैं कि राजनीति में संघर्ष तो होता है। समाजवादी पार्टी उन्हें समर्थन दे रही। अखिलेश ने वादा किया कि न्याय होगा। रामपुर की जनता देख रही कि क्या होता है। उम्मीद है कि कानूनी प्रक्रिया निष्पक्ष चले। खान फिर मजबूत लौटें।
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