लेह में कर्फ्यू में सात घंटे की ढील, हफ्ते भर की सख्ती के बाद लोगों को मिली बड़ी राहत

30 सितंबर को सात घंटे की ढील दी गई। लोग बाजारों में उमड़ पड़े। किराने का सामान, सब्जियां, हार्डवेयर सामान खरीदा। दुकानदारों ने कहा कि स्टॉक खत्म हो रहा था। एक स्थानीय ने बताया कि परि

Oct 1, 2025 - 12:18
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लेह में कर्फ्यू में सात घंटे की ढील, हफ्ते भर की सख्ती के बाद लोगों को मिली बड़ी राहत
लेह में कर्फ्यू में सात घंटे की ढील, हफ्ते भर की सख्ती के बाद लोगों को मिली बड़ी राहत

लद्दाख के लेह शहर में हालात धीरे धीरे सामान्य हो रहे हैं। हिंसा प्रभावित इस क्षेत्र में लगे कर्फ्यू को सात घंटे के लिए ढीला कर दिया गया है। यह फैसला स्थानीय प्रशासन ने लिया है ताकि लोग जरूरी सामान खरीद सकें। कर्फ्यू 24 सितंबर को लगाया गया था जब राज्यhood की मांग को लेकर प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। एक हफ्ते बाद यह ढील लोगों को राहत देने वाली खबर है। सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक दुकानें खुली रहेंगी। लेकिन निषेधाज्ञा अभी भी लागू है। मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 3 अक्टूबर तक बंद रहेंगी। लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता लगातार सुरक्षा समीक्षा बैठकें चला रहे हैं। उन्होंने कहा है कि शांति बनाए रखना विकास की कुंजी है।

यह घटना 24 सितंबर को शुरू हुई जब लेह एपेक्स बॉडी ने राज्यhood और संविधान की छठी अनुसूची के विस्तार की मांग को लेकर हड़ताल बुलाई। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हो गई। चार लोग मारे गए जिनमें एक रिटायर्ड आर्मी जवान भी था। नब्बे से ज्यादा लोग घायल हुए। बीजेपी कार्यालय में आग लगा दी गई। सोनम वांगचुक जैसे कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर थे। प्रशासन ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया। कहा गया कि उनकी उकसाने वाली स्पीच ने हिंसा भड़काई। वांगचुक ने इनकार किया है। उसके बाद से लेह में कर्फ्यू लगा रहा। पहले चार दिनों तक सख्ती रही। फिर चरणबद्ध ढील दी गई।

30 सितंबर को सात घंटे की ढील दी गई। लोग बाजारों में उमड़ पड़े। किराने का सामान, सब्जियां, हार्डवेयर सामान खरीदा। दुकानदारों ने कहा कि स्टॉक खत्म हो रहा था। एक स्थानीय ने बताया कि परिवार के लिए दूध और आटा लाना जरूरी था। प्रशासन ने आदेश जारी किया कि ग्रॉसरी, आवश्यक सेवाओं की दुकानें खुलेंगी। लेकिन भीड़ न लगे इसके लिए समयबद्ध तरीके से। कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स सतर्क हैं। संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई। डीजीपी एसडी सिंह जमवाल ने कहा कि स्थिति शांतिपूर्ण है। अगर सब ठीक रहा तो ढील बढ़ाई जा सकती है।

कर्फ्यू लगने के बाद जीवन ठप हो गया था। स्कूल, कॉलेज, आंगनवाड़ी केंद्र 1 अक्टूबर तक बंद रहेंगे। बाजार बंद, यातायात रुका। लोग घरों में कैद थे। आवश्यक वस्तुओं की कमी हो रही थी। पहले 27 सितंबर को दो चरणों में चार घंटे की ढील दी गई। पुराने शहर में दोपहर एक से तीन बजे और नए इलाकों में तीन बजकर तीस मिनट से पांच बजकर तीस मिनट तक। वह भी शांतिपूर्ण रहा। 29 सितंबर को दो घंटे की ढील दोपहर चार बजे से मिली। मृतकों के अंतिम संस्कार के बाद यह फैसला लिया गया। दो और प्रदर्शनकारियों के शव लेह लाए गए। परिवारों को सांत्वना दी गई।

प्रशासन का कहना है कि हिंसा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। कानून अपना कोर्स लेगा। सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। लेह हमेशा शांतिप्रिय रहा है। यहां बौद्ध और मुस्लिम समुदाय सदियों से साथ रहते हैं। लेफ्टिनेंट गवर्नर ने लोगों की परिपक्वता की सराहना की। कहा कि सामान्य स्थिति जल्द बहाल होगी। केंद्र सरकार भी सक्रिय है। गृह मंत्रालय ने स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ बातचीत का प्रस्ताव दिया। लेकिन बॉडी ने कहा कि शांति बहाल होने तक चर्चा नहीं।

सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी ने विवाद बढ़ाया। वे जलवायु कार्यकर्ता हैं और लद्दाख के मुद्दों पर मुखर। 10 सितंबर से भूख हड़ताल कर रहे थे। प्रशासन ने कहा कि नेपाल आंदोलन और अरब स्प्रिंग का जिक्र करके भड़काया। वीडियो वायरल किए। लेकिन वांगचुक के समर्थक कहते हैं कि सरकार दबंग है। वे जोधपुर जेल में हैं। एनएसए के तहत दो महीने की हिरासत। कई अन्य गिरफ्तारियां हुईं। पचास से ज्यादा लोग हिरासत में। दो कांग्रेसी काउंसलर समेत चार लोग सरेंडर कर चुके। पुलिस हिरासत में भेजे गए। छापेमारी चल रही है। फरार गुंडों को पकड़ने की कोशिश।

लद्दाख 2019 में जम्मू कश्मीर से अलग केंद्र शासित प्रदेश बना। तब से स्थानीय मांगें बढ़ीं। राज्यhood, नौकरियों में आरक्षण, जमीन के अधिकार। छठी अनुसूची का विस्तार जो आदिवासी क्षेत्रों को सुरक्षा देती है। लेह में बौद्ध बहुल, कारगिल में मुस्लिम। दोनों एकजुट हैं। आबादी तीन लाख है। चीन और पाकिस्तान से सीमा। पर्यटन पर निर्भर। लेकिन बेरोजगारी बढ़ी। युवा नाराज हैं। लेह बौद्ध एसोसिएशन के चेयरमैन छेरिंग दोर्जे ने कहा कि युवा हिंसा के खिलाफ हैं। शांति से हल निकले।

सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है। लोग वीडियो शेयर कर रहे। एक यूजर ने लिखा कि सात घंटे की ढील अच्छी शुरुआत है। लेकिन इंटरनेट कब खुलेगा। दूसरे ने कहा कि मांगें जायज हैं, हिंसा गलत। एनआई ने बाजारों की क्लिप पोस्ट की। दुकानें खुलीं, लोग खरीदारी कर रहे। लेकिन सुरक्षा बल सतर्क। गश्त जारी। बीजेपी ने जांच की मांग की। जवाबदेही हो। कांग्रेस ने शांति बनाए रखने की अपील की। कहा कि गलत सूचना से बचें।

प्रशासन ने बाजारों को 1 अक्टूबर को सुबह दस से शाम छह तक खोलने का आदेश दिया। लेकिन कर्फ्यू रात को सख्त। पांच या इससे ज्यादा लोगों का जमावड़ा वर्जित। कारगिल जैसे इलाकों में भी निषेधाज्ञा। इंटरनेट सस्पेंशन से संचार प्रभावित। लोग परेशान। लेकिन सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। आर्मी ने तैयारी की समीक्षा की। सैन्य एकीकरण पर जोर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एकता जरूरी।

यह घटना लद्दाख की राजनीति को प्रभावित करेगी। केंद्र ने हाई पावर्ड कमिटी बनाई। लेकिन बातचीत रुकी। अगर शांति बनी रही तो चर्चा आगे बढ़ सकती। लोग उम्मीद कर रहे कि मांगें सुनी जाएं। पर्यटन प्रभावित हुआ। सर्दी नजदीक है। सड़कें बंद हो सकतीं। जल्द सामान्यता जरूरी। लेफ्टिनेंट गवर्नर ने अपील की कि एकता रखें। भाईचारा बनाए रखें। लद्दाख की संस्कृति अमीर है। शांति से ही विकास होगा।

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