यूपी कैडर के IAS रिंकू सिंह राही ने वापस लिया इस्तीफा, सरकार के आश्वासन के बाद काम पर लौटने का लिया फैसला।

उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में बीते कुछ दिनों से चल रही अनिश्चितता और चर्चाओं पर अब विराम लग गया है। IAS अधिकारी रिंकू

Apr 28, 2026 - 11:32
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यूपी कैडर के IAS रिंकू सिंह राही ने वापस लिया इस्तीफा, सरकार के आश्वासन के बाद काम पर लौटने का लिया फैसला।
यूपी कैडर के IAS रिंकू सिंह राही ने वापस लिया इस्तीफा, सरकार के आश्वासन के बाद काम पर लौटने का लिया फैसला।
  • तैनाती न मिलने से नाराज IAS अधिकारी के रुख में आया बदलाव, वीआरएस का आवेदन निरस्त करने का भेजा पत्र
  • प्रशासनिक हलकों में मची हलचल के बीच रिंकू सिंह ने बदली अपनी रणनीति, अब नई जिम्मेदारी संभालने को तैयार

उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में बीते कुछ दिनों से चल रही अनिश्चितता और चर्चाओं पर अब विराम लग गया है। IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही, जिन्होंने अपनी उपेक्षा और कार्यभार न मिलने से क्षुब्ध होकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन किया था, उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की नौकरशाही के भीतर पदस्थापन और अधिकारियों की संतुष्टि से जुड़े कई गंभीर पहलुओं को सामने ला दिया है।

उत्तर प्रदेश कैडर के 2007 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही पिछले काफी समय से अपनी कार्यशैली और विभाग में अपनी स्थिति को लेकर चर्चा में बने हुए थे। उन्होंने शासन को पत्र लिखकर समय से पूर्व सेवानिवृत्ति की मांग की थी, जिसके पीछे मुख्य कारण उन्हें लंबे समय तक 'वेटिंग' यानी प्रतीक्षारत सूची में रखा जाना बताया गया था। रिंकू सिंह का तर्क था कि एक सक्षम अधिकारी होने के बावजूद उन्हें कोई ठोस जिम्मेदारी नहीं दी जा रही थी, जिससे वे मानसिक रूप से आहत महसूस कर रहे थे। हालांकि, शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई हालिया बैठक और समन्वय के बाद उन्होंने अपना मन बदल लिया है और आधिकारिक तौर पर अपना इस्तीफा वापस लेने की पुष्टि कर दी है। इस पूरे प्रकरण की जड़ें रिंकू सिंह राही के अतीत और उनके द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए कदमों से जुड़ी हुई हैं। रिंकू सिंह राही वही अधिकारी हैं, जिन्होंने मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण विभाग में तैनाती के दौरान करोड़ों रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश किया था। उस समय उन पर जानलेवा हमला भी हुआ था, जिसमें उन्हें कई गोलियां लगी थीं और उनकी एक आंख की रोशनी चली गई थी। इस वीरता और ईमानदारी के बावजूद, उन्हें अक्सर साइड पोस्टिंग या बिना किसी कार्यभार के रखा गया, जिससे उनके भीतर व्यवस्था के प्रति असंतोष पनपने लगा। हाल ही में जब उन्हें लंबे समय तक कोई विभाग आवंटित नहीं किया गया, तो उन्होंने इसे अपनी ईमानदारी का दंड मानते हुए सेवा छोड़ने का निर्णय लिया था।

इस्तीफा वापस लेने की प्रक्रिया के दौरान यह बात सामने आई कि रिंकू सिंह राही ने नियुक्ति विभाग को पत्र लिखकर सूचित किया है कि वे अपनी सेवाओं को जारी रखना चाहते हैं। उनके इस फैसले के पीछे शासन द्वारा दिए गए सकारात्मक संकेतों को माना जा रहा है। सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, उच्च स्तर पर यह सहमति बनी है कि रिंकू सिंह जैसे अनुभवी और ईमानदार छवि वाले अधिकारी की सेवाओं का उपयोग जनहित में किया जाना आवश्यक है। राज्य सरकार की मंशा को समझते हुए और भविष्य में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना के मद्देनजर, उन्होंने अपने वीआरएस के आवेदन को निरस्त करने का अनुरोध किया है, जिसे विभाग ने स्वीकार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रशासनिक मशीनरी में रिंकू सिंह राही के इस्तीफे की खबर ने अन्य अधिकारियों के बीच भी एक बेचैनी पैदा कर दी थी। कई लोग इसे एक ईमानदार अधिकारी के साथ होने वाले अन्याय के रूप में देख रहे थे। रिंकू सिंह ने अपने कार्यकाल में हमेशा नियमों की कठोरता से पालना की है, जिसके कारण अक्सर वे सत्ता के करीबी लोगों की आंखों की किरकिरी बने रहे। उनकी नाराजगी केवल पद न मिलने से नहीं थी, बल्कि इस बात से थी कि शासन में बैठे कुछ तत्व उनकी कार्यक्षमता को बाधित करने का प्रयास कर रहे थे। अब जब उन्होंने वापसी का फैसला किया है, तो यह उम्मीद की जा रही है कि उन्हें समाज कल्याण या किसी ऐसे विभाग में तैनात किया जाएगा जहां वे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई को और मजबूती दे सकें।

रिंकू सिंह राही की पहचान केवल एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक जुझारू व्यक्तित्व के तौर पर भी रही है। गोली लगने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए IAS अधिकारी बने। उनकी यह यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रही है। ऐसे में उनका इस्तीफा देना और फिर उसे वापस लेना, व्यवस्था के भीतर चलने वाले आंतरिक संघर्ष को दर्शाता है। यह घटना यह भी दिखाती है कि कभी-कभी नौकरशाही के भीतर संवाद की कमी के कारण अधिकारी इस तरह के कठोर कदम उठाने पर मजबूर हो जाते हैं। शासन की सक्रियता ने एक संभावित विवाद को टाल दिया है, जो अन्यथा सरकार की छवि को प्रभावित कर सकता था। नौकरशाही के भीतर इस तरह के मामले पहले भी आए हैं, लेकिन रिंकू सिंह का मामला विशिष्ट है क्योंकि वे एक 'व्हिसलब्लोअर' के रूप में जाने जाते हैं। उनके इस्तीफे की घोषणा ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर काफी ध्यान खींचा था, जिससे शासन पर एक नैतिक दबाव निर्मित हुआ। अधिकारियों का एक वर्ग मानता है कि अगर रिंकू सिंह जैसे अधिकारी व्यवस्था छोड़कर चले जाते हैं, तो इससे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले अन्य कर्मियों का मनोबल गिरता है। वापसी का निर्णय न केवल रिंकू सिंह के लिए व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह विभाग के लिए भी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने का एक अवसर है ताकि प्रतिभा और ईमानदारी को उचित सम्मान मिल सके।

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