Viral: 2 दिन में 7 वारदाते और 1 घंटे में 2 लूट, पुलिस की नाक में दम करने वाले शातिर लुटेरे गैंग का पर्दाफाश
Jaipur News: जयपुर, राजस्थान की राजधानी, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन हाल ही में यह शहर एक अनोखी और शातिर लुटेरी गैंग के कारण सुर्खियों ...
Jaipur News: जयपुर, राजस्थान की राजधानी, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन हाल ही में यह शहर एक अनोखी और शातिर लुटेरी गैंग के कारण सुर्खियों में आया। जयपुर की विधायकपुरी थाना पुलिस ने एक ऐसी अंतर्राज्यीय गैंग का पर्दाफाश किया है, जो दिल्ली से लग्जरी बसों के जरिए जयपुर पहुंचकर सुनियोजित और अजीबोगरीब तरीके से लूटपाट की वारदातों को अंजाम देती थी। इस गैंग की कार्यप्रणाली इतनी चतुर थी कि यह न केवल स्थानीय पुलिस के लिए चुनौती बन गई, बल्कि इसने आम लोगों में भी दहशत फैला दी थी। इस लुटेरी गैंग की सबसे बड़ी खासियत थी इसकी अनोखी और सुनियोजित कार्यप्रणाली। गैंग का सरगना खुद ऑटो रिक्शा चलाता था, जो इस पूरी साजिश का केंद्र बिंदु था। यह गैंग दिल्ली से लग्जरी बसों में जयपुर आता और स्थानीय बस स्टैंडों, खासकर 200 फीट चौराहा, कुम्भा मार्ग, 14 नंबर बस स्टैंड और ट्रांसपोर्ट चौराहे जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों को अपना निशाना बनाता। गैंग का मुख्य उद्देश्य उन सवारियों को टारगेट करना था, जो इन बस स्टैंडों पर अपने गंतव्य के लिए वाहन की तलाश में होते थे।
गैंग की रणनीति बेहद चालाक थी। सरगना ऑटो में अपने ही साथी बदमाशों को डमी सवारी के रूप में पहले से बैठा लेता। इसके बाद वह राह चलती सवारियों को कम किराए का लालच देकर अपने ऑटो में बिठाता। ऑटो में सवारी के बैठने के बाद गैंग के सदस्य आपस में झगड़ा शुरू कर देते, जिससे सवारी का ध्यान भटक जाता। इस दौरान गैंग के सदस्य सवारी के कीमती सामान, जैसे गहने, नकदी या मोबाइल, चुरा लेते। कई बार यह लोग सुनसान रास्तों पर सवारी को उतार देते और अगर सवारी विरोध करती, तो उसे डराने-धमकाने या मारपीट का सहारा लेते। इस गैंग की एक और खासियत थी कि यह अपनी पहचान छिपाने के लिए वारदात के बाद दाढ़ी-मूंछ और बाल मुंडवा लेता। इसके बाद यह लोग दिल्ली वापस लौट जाते और वहां मौज-मस्ती में समय बिताते। लगभग एक सप्ताह बाद यह गैंग फिर से जयपुर लौटकर नई वारदातों को अंजाम देता। इस तरह की चतुराई ने इस गैंग को लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से दूर रखा।
- दो दिन में सात वारदातें, एक घंटे में दो लूट
पुलिस के अनुसार, इस गैंग ने जयपुर में केवल दो दिनों के भीतर सात लूटपाट की वारदातें अंजाम दीं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से दो वारदातें एक ही जगह पर एक घंटे के भीतर हुईं, जो इस गैंग की बेखौफ और साहसी कार्यशैली को दर्शाता है। इन वारदातों में गैंग ने मुख्य रूप से बुजुर्ग महिलाओं को निशाना बनाया, जिन्हें कम किराए का लालच देकर ऑटो में बिठाया जाता और फिर उनके गहने या अन्य कीमती सामान लूट लिया जाता। इस तरह की वारदातों ने स्थानीय पुलिस के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी, क्योंकि गैंग की चालाकी और बार-बार पहचान बदलने की रणनीति ने उनकी गिरफ्तारी को मुश्किल बना दिया था।
जयपुर की विधायकपुरी थाना पुलिस ने इस गैंग को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया, जिसका नेतृत्व डीसीपी साउथ दिगंत आनंद ने किया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी संसाधनों और मुखबिरों की मदद से इस गैंग के ठिकानों का पता लगाया। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि यह गैंग दिल्ली से संचालित हो रही है। इसके बाद पुलिस ने दिल्ली में दबिश देकर दो मुख्य आरोपियों को हिरासत में लिया। इनके कब्जे से लूटा गया सामान, जिसमें गहने और नकदी शामिल थे, बरामद किया गया। साथ ही, वारदात में इस्तेमाल किया गया ऑटो भी जब्त कर लिया गया। पुलिस ने इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 379 (चोरी) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मुकदमा दर्ज किया। पूछताछ में सामने आया कि इस गैंग के अधिकांश सदस्य गुजरात के रहने वाले थे, इसलिए इसे "गुजराती गैंग" के रूप में भी जाना गया। यह गैंग मुख्य रूप से आर्थिक लाभ के लिए लूटपाट की वारदातें करता था। गैंग के सदस्यों ने बताया कि वे जयपुर के भीड़भाड़ वाले इलाकों को इसलिए चुनते थे, क्योंकि वहां सवारी आसानी से मिल जाती थी और पुलिस की नजर से बचना भी आसान था। गैंग की रणनीति में शामिल डमी सवारी और झूठे झगड़े की रणनीति ने इसे और भी प्रभावी बना दिया था।
इस गैंग को पकड़ना पुलिस के लिए आसान नहीं था। बार-बार पहचान बदलने, दिल्ली और जयपुर के बीच आवाजाही, और चालाकी भरी रणनीति ने पुलिस की जांच को जटिल बना दिया था। हालांकि, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी संसाधनों की मदद से पुलिस ने इस गैंग को पकड़ने में सफलता हासिल की। भविष्य में ऐसी वारदातों को रोकने के लिए पुलिस ने बस स्टैंडों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में निगरानी बढ़ाने और सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई है। साथ ही, दिल्ली और जयपुर पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि अंतर्राज्यीय अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके। जयपुर की विधायकपुरी थाना पुलिस द्वारा इस अनोखी लुटेरी गैंग का पर्दाफाश न केवल एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह आम जनता के लिए भी राहत की बात है।
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