लुधियाना में घरेलू नौकरानी की निकली 3 करोड़ की लॉटरी, बेटी के जन्मदिन पर गहने गिरवी रख खरीदे टिकट साबित हुए भाग्यशाली। 

पंजाब के लुधियाना शहर में एक साधारण घरेलू नौकरानी की जिंदगी रातोंरात बदल गई। 42 वर्षीय महिला अमृत कौर ने अपनी बेटी हरप्रीत कौर के जन्मदिन

Nov 24, 2025 - 12:45
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लुधियाना में घरेलू नौकरानी की निकली 3 करोड़ की लॉटरी, बेटी के जन्मदिन पर गहने गिरवी रख खरीदे टिकट साबित हुए भाग्यशाली। 
लुधियाना में घरेलू नौकरानी की निकली 3 करोड़ की लॉटरी, बेटी के जन्मदिन पर गहने गिरवी रख खरीदे टिकट साबित हुए भाग्यशाली। 

पंजाब के लुधियाना शहर में एक साधारण घरेलू नौकरानी की जिंदगी रातोंरात बदल गई। 42 वर्षीय महिला अमृत कौर ने अपनी बेटी हरप्रीत कौर के जन्मदिन पर खुशी से कुछ गहने गिरवी रखकर चार लॉटरी टिकट खरीदे थे। महज 12 दिन बाद उन्हें पता चला कि उनमें से एक टिकट पर 3 करोड़ रुपये का बंपर इनाम लग गया है। यह खबर शहर में तेजी से फैली और अमृत कौर को रातोंरात अमीर बना दिया। लॉटरी पंजाब राज्य लॉटरी की थी, जो वैध और सरकारी है। अमृत कौर ने बताया कि बेटी ही उनकी लकी चार्म साबित हुई। यह घटना मेहनत और किस्मत के मेल को दर्शाती है, जहां एक छोटा सा उपहार पूरे परिवार की तकदीर बदल गया।

घटना नवंबर 2025 की है। अमृत कौर लुधियाना के एक पॉश इलाके में कई घरों में झाड़ू-पोंछा और बर्तन साफ करने का काम करती हैं। उनका पति बलजीत सिंह एक फैक्ट्री में लेबर हैं। परिवार में दो बच्चे हैं- बेटी हरप्रीत 12 साल की और बेटा जसप्रीत 10 साल का। अमृत कौर की मासिक कमाई मात्र 15 हजार रुपये है। वे किराए के एक छोटे से दो कमरों के घर में रहते हैं। हरप्रीत का जन्मदिन 10 नवंबर को था। अमृत कौर के पास बेटी को अच्छा तोहफा देने के पैसे नहीं थे। बाजार जाकर कपड़े या खिलौना खरीदने की सोच रही थीं, लेकिन जेब खाली थी। फिर उन्हें याद आया कि पास के दुकान पर लॉटरी टिकट बिकते हैं। उन्होंने सोचा कि टिकट खरीदकर बेटी को सरप्राइज दूंगी।

अमृत कौर ने अपने सोने के झुमके और चूड़ियां गिरवी रखीं। इनकी कीमत करीब 5 हजार रुपये थी। इससे मिले पैसे से उन्होंने चार टिकट खरीदे, प्रत्येक 1000 रुपये का। टिकट नंबर थे- PB-123456, PB-123457, PB-123458 और PB-123459। हरप्रीत को टिकट दिखाकर कहा कि यह तुम्हारा जन्मदिन गिफ्ट है। बेटी खुश हो गई। परिवार ने टिकट को संभालकर रख दिया। लॉटरी का ड्रॉ 22 नवंबर को लुधियाना में हुआ। अमृत कौर को काम के चक्कर में ड्रॉ के बारे में भूल ही गईं। 12 दिन बाद, यानी 22 नवंबर को शाम को वे घर लौटीं। पड़ोसन ने बताया कि लॉटरी रिजल्ट आ गया है। अमृत कौर ने हंसते हुए कहा कि हमारा तो टिकट भी नहीं है। लेकिन पड़ोसन ने जोर दिया कि चेक कर लो।

अमृत कौर ने टिकट निकाला और मोबाइल पर पंजाब स्टेट लॉटरी की वेबसाइट चेक की। पहला टिकट चेक किया- कुछ नहीं। दूसरा- कुछ नहीं। तीसरा- छोटा इनाम। फिर आखिरी टिकट PB-123459। स्क्रीन पर लिखा आया- फर्स्ट प्राइज: 3 करोड़ रुपये। अमृत कौर के हाथ कांपने लगे। वे चिल्लाईं और रोने लगीं। पति बलजीत घर आया तो पत्नी को रोते देख चिंता हुई। अमृत कौर ने टिकट थमाया। बलजीत ने दोबारा चेक किया। सच्चाई सामने आ गई। पूरा परिवार गले मिलकर रोया। हरप्रीत ने कहा कि मम्मी, मैंने कहा था ना कि मैं लकी हूं। अमृत कौर ने बेटी को गले लगाया और कहा कि तू ही मेरा भाग्य है।

यह लॉटरी पंजाब राज्य लॉटरी का 'पंजाब बंपर' सीरीज का हिस्सा थी। राज्य सरकार द्वारा संचालित यह लॉटरी वैध है और टैक्स के बाद नेट राशि विजेता को मिलती है। अमृत कौर को 3 करोड़ में से 30 प्रतिशत टैक्स कटौती के बाद करीब 2.1 करोड़ रुपये मिलेंगे। दावा करने के लिए उन्हें लुधियाना के लॉटरी ऑफिस जाना पड़ेगा। अधिकारी ने बताया कि प्रक्रिया 7 से 10 दिन में पूरी हो जाएगी। अमृत कौर ने कहा कि पहले गहने वापस लूंगी। फिर बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दूंगी। घर खरीदने का सपना था, अब वो पूरा होगा। पति बलजीत ने कहा कि अब फैक्ट्री का काम छोड़ दूंगा। परिवार मिलकर कोई छोटा बिजनेस शुरू करेंगे।

लुधियाना शहर में यह खबर आग की तरह फैली। अमृत कौर के घर पर ग्रामीण और पड़ोसी जमा हो गए। सभी बधाई दे रहे थे। मीडिया वाले पहुंचे तो अमृत कौर शर्माईं। उन्होंने बताया कि कभी सोचा भी नहीं था। हम गरीब हैं, लेकिन ईमानदार। लॉटरी टिकट कभी-कभी खरीदते हैं, लेकिन इतना बड़ा इनाम पहली बार। डॉ. महेन्द्र सिंह, लॉटरी विभाग के अधिकारी ने कहा कि अमृत कौर की कहानी प्रेरणादायक है। कई लोग लॉटरी से अमीर बने, लेकिन ज्यादातर छोटे इनाम। यह बंपर जीत दुर्लभ है। विभाग ने अमृत कौर को बधाई दी और सुरक्षा की सलाह दी। कहा कि पैसे मिलने के बाद फ्रॉड से बचें।

अमृत कौर का परिवार मूल रूप से अमृतसर जिले का है। 15 साल पहले लुधियाना आए। यहां काम की तलाश में थे। अमृत कौर ने शादी के बाद पढ़ाई छोड़ दी। लेकिन बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहती हैं। हरप्रीत सरकारी स्कूल में पढ़ती है। जसप्रीत भी उसी स्कूल में। अमृत कौर रोज सुबह 5 बजे उठती हैं। तीन घरों में काम करती हैं। शाम को बाजार जाती हैं। बलजीत रात 10 बजे घर लौटते हैं। परिवार का खर्च मुश्किल से चलता था। किराया 6 हजार, पढ़ाई 2 हजार, बिजली-पानी 3 हजार। बाकी राशन पर। लॉटरी जीत से सब बदल गया। अमृत कौर ने कहा कि अब बेटी को प्राइवेट स्कूल में डालूंगी। बेटे को कोचिंग दिलवाऊंगी।

सोशल मीडिया पर यह कहानी वायरल हो गई। लोग अमृत कौर को 'लकी मॉम' कह रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि बेटी का जन्मदिन पूरे परिवार का जन्मदिन बन गया। दूसरे ने कहा कि गरीबी में भी खुश रहना सीखें। वीडियो में अमृत कौर रोते हुए बेटी को गले लगाती नजर आ रही हैं। दैनिक भास्कर और एबीपी न्यूज ने प्रमुखता से छापा। पंजाब में लॉटरी संस्कृति पुरानी है। लोग छोटे-मोटे इनाम जीतते रहते हैं। लेकिन 3 करोड़ जैसी रकम कम ही सुनने को मिलती। 2019 में एक महिला को 1.5 करोड़ मिले थे। अमृत कौर की जीत ने उम्मीद जगाई। कई लोग अब टिकट खरीद रहे हैं।

अमृत कौर की जिंदगी अब नई राह पर है। वे बोलीं कि पहले तो गहने छुड़ाऊंगी। फिर बैंक में पैसे जमा करूंगी। निवेश की सलाह लूंगी। परिवार ने फैसला किया कि दिखावे से दूर रहेंगे। पड़ोसी बनवारी लाल ने कहा कि अमृत बहन हमेशा मुस्कुराती रहती। अब उनकी खुशी दोगुनी हो गई। हरप्रीत ने स्कूल में दोस्तों को बताया। टीचर ने क्लास में सराहा। जसप्रीत उत्साहित है कि अब नया साइकिल मिलेगा। अमृत कौर ने धन्यवाद दिया भगवान को। कहा कि मेहनत का फल मिला। बेटी के बिना यह संभव न था।

यह घटना पंजाब की महिलाओं के संघर्ष को दिखाती है। अमृत कौर जैसी हजारों महिलाएं घर-घर काम करके परिवार चलाती हैं। लॉटरी ने उन्हें मौका दिया। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि लॉटरी पर निर्भर न रहें। बचत और कौशल विकास जरूरी। पंजाब सरकार लॉटरी से राजस्व कमाती है। यह शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च होता। अमृत कौर अब आत्मनिर्भर बनेंगी। वे सिलाई सीखना चाहती हैं। छोटा बोटिक खोलने का प्लान है। पति बलजीत ड्राइविंग सीखेंगे। बच्चे पढ़ाई पर फोकस करेंगे। परिवार की एकता ही उनकी ताकत।

लुधियाना के लॉटरी ऑफिस में अमृत कौर दावा करने गईं। अधिकारी ने दस्तावेज चेक किए। टिकट वैध पाया। प्रक्रिया शुरू हो गई। अमृत कौर ने कहा कि पैसे मिलने पर मंदिर में धन्यवाद दूंगी। गरीबों को दान दूंगी। पड़ोस में भोज करूंगी। यह जीत न केवल आर्थिक बल्कि भावनात्मक भी है। अमृत कौर ने बताया कि गहने गिरवी रखते वक्त डर लग रहा था। लेकिन बेटी की खुशी के लिए किया। अब वो गहने लौट आएंगे। हरप्रीत ने मां को गले लगाया। कहा कि अगला जन्मदिन और भी स्पेशल होगा।

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