राजस्थान के अलवर में दर्दनाक बिजली हादसा, बीच सड़क पर 11 हजार केवी हाईटेंशन लाइन का तार टूटने से 2 बाइक सवारों की जिंदा जलकर मौत।

राजस्थान के अलवर जिले के ग्रामीण अंचलों में बुनियादी ढांचे के रखरखाव और बिजली विभाग की कथित लापरवाही के कारण

Jun 2, 2026 - 12:30
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राजस्थान के अलवर में दर्दनाक बिजली हादसा, बीच सड़क पर 11 हजार केवी हाईटेंशन लाइन का तार टूटने से 2 बाइक सवारों की जिंदा जलकर मौत।
राजस्थान के अलवर में दर्दनाक बिजली हादसा, बीच सड़क पर 11 हजार केवी हाईटेंशन लाइन का तार टूटने से 2 बाइक सवारों की जिंदा जलकर मौत।
  • धीरोडा-दरोगाला मार्ग पर काल बनकर गिरा मौत का लाइव तार, देखते ही देखते धूं-धूं कर जली मोटरसाइकिल, टहला क्षेत्र में पसरा मातम
  • बिजली विभाग की घोर लापरवाही के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, शवों को सड़क पर रखकर लगाया जाम, मुआवजे और कार्रवाई की मांग

राजस्थान के अलवर जिले के ग्रामीण अंचलों में बुनियादी ढांचे के रखरखाव और बिजली विभाग की कथित लापरवाही के कारण एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा सामने आया है। अलवर के टहला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक प्रमुख ग्रामीण मार्ग पर सोमवार को हाईटेंशन बिजली की लाइन अचानक टूटकर मौत का जाल बन गई। इस मार्ग से गुजर रहे दो बेकसूर मोटरसाइकिल सवार इस बेहद ऊंचे वोल्टेज वाले तार की चपेट में आ गए, जिससे मौके पर ही दोनों की जिंदा जलकर अत्यंत दर्दनाक मौत हो गई। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से पूरे टहला क्षेत्र और आसपास के गांवों में भारी शोक की लहर दौड़ गई है, वहीं दूसरी तरफ जर्जर तारों को समय पर न बदलने के कारण स्थानीय बिजली निगम के खिलाफ लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

यह भीषण और दुखद हादसा सोमवार 1 जून 2026 की दोपहर के समय धीरोडा से दरोगाला की तरफ जाने वाले मुख्य संपर्क मार्ग पर घटित हुआ। चश्मदीदों और स्थानीय ग्रामीणों से प्राप्त विवरण के अनुसार, उस समय मौसम पूरी तरह सामान्य था और बिजली की आपूर्ति सुचारू रूप से चल रही थी कि अचानक सड़क के ऊपर से गुजर रही 11 हजार केवी (11 KV) की हाईटेंशन लाइन का एक मुख्य तार तेज चिंगारी और धमाके के साथ टूटकर सीधे पक्की सड़क के बीचों-बीच आ गिरा। ठीक उसी पल धीरोडा गांव के रहने वाले दो युवक अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर दरोगाला की तरफ जा रहे थे, जिन्हें रफ्तार में होने के कारण संभलने या ब्रेक लगाने का जरा भी मौका नहीं मिला और उनकी गाड़ी सीधे उस चालू और अत्यधिक संवेदनशील तार के ऊपर चढ़ गई।

जैसे ही मोटरसाइकिल का संपर्क 11 हजार वोल्ट की लाइव बिजली के तार से हुआ, वैसे ही पूरी गाड़ी के भीतर एक अत्यंत शक्तिशाली और भयानक करंट दौड़ गया। हाई वोल्टेज के कारण कुछ ही नैनो-सेकंड के भीतर मोटरसाइकिल की पेट्रोल टंकी में एक जबरदस्त धमाका हुआ और पूरी गाड़ी ने एक विशाल आग के गोले का रूप धारण कर लिया। करंट का झटका इतना तगड़ा था कि दोनों सवारों के शरीर को तुरंत लकवा मार गया, जिससे वे वाहन से अलग होकर भागने में भी पूरी तरह असमर्थ रहे। देखते ही देखते दोनों युवक और उनकी मोटरसाइकिल धूं-धूं कर जलने लगी और महज कुछ ही मिनटों के भीतर दोनों के शरीर पूरी तरह से कंकाल में तब्दील हो गए, जिससे वहां का नजारा बेहद विचलित करने वाला हो गया। सड़क के किनारे खेतों में काम कर रहे किसानों ने जब धमाके की आवाज सुनी और आसमान में काला धुआं उठते देखा, तो वे तुरंत लाठियां और सूखे कपड़े लेकर पीड़ितों को बचाने के लिए दौड़े। हालांकि, तार में बिजली की आपूर्ति लगातार चालू होने और जमीन पर करंट फैले होने के कारण कोई भी व्यक्ति गाड़ी के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका, और लोग बेबसी से दोनों युवाओं को अपनी आंखों के सामने दम तोड़ते देखने पर मजबूर हो गए।

इस भयानक हादसे के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों ने अपने स्तर पर बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता (JE) और सब-स्टेशन के कंट्रोल रूम को फोन कर मुख्य ग्रिड से बिजली आपूर्ति को बंद करवाया। बिजली कटने के बाद जब लोग करीब पहुंचे, तब तक दोनों युवकों के प्राण पखेरू उड़ चुके थे और मोटरसाइकिल का केवल ढांचा ही बचा था। घटना की सूचना मिलते ही टहला थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक आसपास के दर्जनों गांवों से सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित ग्रामीण वहां एकत्र हो चुके थे। ग्रामीणों ने पुलिस को शवों को कब्जे में लेने से रोक दिया और बिजली विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग को लेकर धीरोडा-दरोगाला मार्ग पर पत्थरों और लकड़ियों की मदद से पूरी तरह चक्काजाम कर दिया।

धरने पर बैठे ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों का सीधा आरोप है कि इस मार्ग पर बिजली के तार पिछले कई दशकों पुराने और जर्जर हो चुके थे, जिनके ढीले होकर लटकने की शिकायतें कई बार लिखित रूप से जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) के स्थानीय दफ्तर में दी गई थीं। इसके बावजूद, अधिकारियों ने इन तारों को बदलने या उनकी मरम्मत करने की जहमत नहीं उठाई, जिसका खामियाजा आज दो मासूम परिवारों को अपने चिराग खोकर चुकाना पड़ा है। ग्रामीणों ने मांग रखी है कि जब तक दोषी अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता और पीड़ित परिवारों को उचित सरकारी नौकरी और पचास-पचास लाख रुपये का आर्थिक मुआवजा नहीं मिलता, तब तक वे शवों का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे।

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