IPL 2026 में खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के 'स्मार्ट ग्लासेस' पहनने पर BCCI ने लगाई पूर्ण पाबंदी

बीसीसीआई द्वारा सभी दस आईपीएल फ्रेंचाइजी को भेजे गए आधिकारिक दिशा-निर्देशों में इस बात का साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि इन स्मार्ट गॉगल्स को आईपीएल के 'खिलाड़ी और मैच अधिकारी क्षेत्र' (पीएमओए) के न्यूनतम मानकों के तहत प्रतिबंधित किया जाएगा। बोर्ड ने नि

May 31, 2026 - 11:31
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IPL 2026 में खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के 'स्मार्ट ग्लासेस' पहनने पर BCCI ने लगाई पूर्ण पाबंदी
IPL 2026 में खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के 'स्मार्ट ग्लासेस' पहनने पर BCCI ने लगाई पूर्ण पाबंदी

  • लाइव स्ट्रीमिंग और गुप्त संचार की क्षमताओं से लैस चश्मों को भ्रष्टाचार निरोधक इकाई ने माना खेल की शुचिता के लिए बड़ा खतरा
  • ड्रेसिंग रूम और डगआउट में प्रवेश से पहले मोबाइल और स्मार्टवॉच की तरह सुरक्षा अधिकारियों को सौंपने होंगे हाई-टेक गॉगल्स

दुनिया की  सबसे अमीर और लोकप्रिय क्रिकेट लीग IPL 2026 के अंतिम चरण में खेल की शुचिता, सुरक्षा और गोपनीयता को बनाए रखने के लिए एक अभूतपूर्व प्रशासनिक फैसला लिया गया है। आधुनिक युग में तकनीक के बढ़ते प्रभाव और इसके संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की भ्रष्टाचार निरोधक और सुरक्षा इकाई (एसीएसयू) ने एक नया और कड़ा नियम लागू किया है। इस नए आदेश के तहत टूर्नामेंट में भाग ले रहे सभी खिलाड़ियों, कोचों और सहायक स्टाफ के मैच के दौरान विशेष प्रकार के 'स्मार्ट ग्लासेस' या अत्याधुनिक चश्मे पहनने और उन्हें अपने पास रखने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। बोर्ड का मानना है कि यह कदम खेल में किसी भी प्रकार की बाहरी संदेहास्पद गतिविधियों को रोकने और खिलाड़ियों के विशेषाधिकार वाले क्षेत्रों को पूरी तरह से डिजिटल दखल से मुक्त रखने के लिए अनिवार्य हो गया था।BCCI की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई ने यह कड़ा कदम तब उठाया जब टूर्नामेंट के दौरान यह बात सामने आई कि कई बड़ी तकनीकी कंपनियां विशेष रूप से IPL खिलाड़ियों और फ्रेंचाइजी के प्रमुख सदस्यों को अपने आधुनिक 'स्मार्ट सनग्लासेस' और गॉगल्स का प्रचार कर रही थीं और उन्हें बेच रही थीं। दिखने में ये चश्मे बिल्कुल सामान्य और स्टाइलिश धूप के चश्मों की तरह ही नजर आते हैं, लेकिन इनके भीतर छिपी हुई अत्याधुनिक तकनीक बेहद संवेदनशील है। सुरक्षा विंग को इस बात की आशंका थी कि इन चश्मों का उपयोग लाइव मैच के दौरान ड्रेसिंग रूम या डगआउट से रणनीतिक जानकारियों को बाहर भेजने या सट्टेबाजों के साथ गुप्त संपर्क साधने के लिए किया जा सकता है। इसी संभावित खतरे को भांपते हुए बोर्ड ने बिना किसी देरी के टूर्नामेंट के नॉकआउट और फाइनल मुकाबलों से ठीक पहले इस नए नियम को तत्काल प्रभाव से लागू करने की घोषणा कर दी।

तकनीकी रूप से इन स्मार्ट ग्लासेस की क्षमताओं का विश्लेषण करने के बाद क्रिकेट बोर्ड ने इन्हें सामान्य एक्सेसरी मानने से साफ इनकार कर दिया है। यह चश्मे केवल आंखों को धूप से बचाने का काम नहीं करते, बल्कि इनके फ्रेम और ग्लास में मिनी स्मार्टफोन जैसी उन्नत प्रणालियां इनबिल्ट होती हैं। ये उपकरण मोबाइल डेटा या इन-स्टेडियम वाई-फाई नेटवर्क का उपयोग करके सीधे इंटरनेट से जुड़ सकते हैं, जिससे उपयोगकर्ता बिना किसी को भनक लगे रीयल-टाइम में वीडियो और ऑडियो की लाइव स्ट्रीमिंग कर सकता है। इसके अलावा, इनमें वॉयस कमांड के जरिए टेक्स्ट मैसेज भेजने और प्राप्त करने के साथ-साथ सीधे ऑडियो और वीडियो कॉल करने की भी सुविधा होती है, जो इसे पूरी तरह से एक उन्नत संचार उपकरण की श्रेणी में खड़ा कर देती है।

BCCI द्वारा सभी दस IPL फ्रेंचाइजी को भेजे गए आधिकारिक दिशा-निर्देशों में इस बात का साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि इन स्मार्ट गॉगल्स को IPL के 'खिलाड़ी और मैच अधिकारी क्षेत्र' (पीएमओए) के न्यूनतम मानकों के तहत प्रतिबंधित किया जाएगा। बोर्ड ने नियमों के तहत इन्हें संयुक्त रूप से 'ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस' और 'कम्युनिकेशन डिवाइस' के रूप में वर्गीकृत किया है। नए सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार, मैच के दिन स्टेडियम परिसर में प्रवेश करते ही खिलाड़ियों और सहायक स्टाफ को अपने मोबाइल फोन और स्मार्टवॉच के साथ-साथ इन स्मार्ट चश्मों को भी अनिवार्य रूप से सुरक्षा संपर्क अधिकारी (एसएलओ) के पास जमा कराना होगा। यदि कोई खिलाड़ी इन उपकरणों को जमा नहीं करता है, तो इसे सुरक्षा प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा और उन पर भारी व्यक्तिगत जुर्माना और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

इस सीजन में तकनीकी उपकरणों पर बरती जा रही यह सख्ती कुछ हालिया विवादों और नियमों के उल्लंघन की घटनाओं के बाद और अधिक बढ़ गई है। इसी IPL 2026 के शुरुआती चरण में राजस्थान रॉयल्स के टीम मैनेजर रोमी भिंडर को मैच के दौरान टीम डगआउट में मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए लाइव प्रसारण कैमरों में पकड़ा गया था, जिसके बाद BCCI ने उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने के साथ-साथ सख्त चेतावनी जारी की थी। इसके अलावा, खेल के मैदान और ड्रेसिंग रूम के भीतर अनुशासन बनाए रखने के लिए बोर्ड पहले से ही काफी कड़े कदम उठा रहा है, जिसमें खिलाड़ियों के आचरण पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। ऐसी परिस्थितियों में स्मार्ट वियरेबल्स का बढ़ता चलन सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती बन गया था, जिसे समय रहते नियंत्रित करना बेहद जरूरी था। BCCI ने इस सीजन में सट्टेबाजी और हनी-ट्रैपिंग जैसी अवैध गतिविधियों से खिलाड़ियों को सुरक्षित रखने के लिए होटल के कमरों में बाहरी मेहमानों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी है। इसके साथ ही, देर रात बिना सुरक्षा टीम की पूर्व अनुमति के खिलाड़ियों के बाहर जाने पर पाबंदी लगाई गई है, ताकि किसी भी अनधिकृत संपर्क की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

क्रिकेट की दुनिया में जैसे-जैसे डिजिटल और वियरेबल तकनीक अधिक परिष्कृत होती जा रही है, वैसे-वैसे खेल की अखंडता को बनाए रखने वाले सुरक्षा तंत्रों को भी खुद को अपग्रेड करना पड़ रहा है। वर्ष 2013 के स्पॉट-फिक्सिंग विवाद के बाद से IPL के भ्रष्टाचार निरोधक नियमों को लगातार कड़ा किया गया है, लेकिन चश्मे जैसी रोजमर्रा की वस्तु में इस तरह के संचार फीचर्स का आ जाना एक बिल्कुल नया और अनोखा खतरा था। सुरक्षा अधिकारियों की चिंता विशेष रूप से उन बाहरी तत्वों को लेकर भी थी, जो नेट बॉलर्स, लॉजिस्टिक्स स्टाफ या थ्रोडाउन विशेषज्ञों के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों में पैठ बनाने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि अब डगआउट और अभ्यास क्षेत्रों के आस-पास गैर-जरूरी लोगों की आवाजाही और ऐसे गैजेट्स के उपयोग पर पूरी तरह से नजर रखी जा रही है।

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