कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की औपचारिक शुरुआत, बेंगलुरु में आज शाम जुटेगा कांग्रेस विधायक दल।
कर्नाटक की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। राज्य में सत्ता और नेतृत्व के हस्तांतरण की प्रक्रिया को
- डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय, विधायक दल के नए नेता के रूप में होगा औपचारिक चयन
- निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में होगी महत्वपूर्ण बैठक, नए मंत्रिमंडल के गठन पर भी मंथन तेज
कर्नाटक की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। राज्य में सत्ता और नेतृत्व के हस्तांतरण की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए आज बेंगलुरु में कांग्रेस विधायक दल की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आधिकारिक तौर पर विधायक दल के नए नेता का चुनाव करना है। कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों के बाद यह पूरी तरह से साफ हो चुका है कि राज्य के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डीके शिवकुमार को विधायक दल का नया नेता चुना जाएगा, जिसके बाद उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा। इस राजनीतिक बदलाव को लेकर पूरे राज्य की निगाहें बेंगलुरु पर टिकी हुई हैं।
यह महत्वपूर्ण बैठक बेंगलुरु के विधान सौधा स्थित सम्मेलन सभागार में आयोजित की जा रही है। निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं, क्योंकि वे अभी भी विधायक दल के मौजूदा नेता हैं। इस बैठक के आयोजन को लेकर सभी कांग्रेसी विधायकों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के लिए पहले ही व्हिप और परिपत्र जारी किया जा चुका है। बैठक में भाग लेने के लिए राज्य के सभी 136 कांग्रेस विधायक बेंगलुरु पहुंच चुके हैं। इस बैठक में केवल नेता का चुनाव ही नहीं होगा, बल्कि सिद्धारमैया के कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों और उनके योगदान की सराहना करते हुए एक धन्यवाद प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा।
नेतृत्व परिवर्तन की यह पटकथा अचानक नहीं लिखी गई है, बल्कि इसके पीछे पिछले कई दिनों से दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक चली लंबी मैराथन बैठकें और आपसी समझ शामिल है। सिद्धारमैया ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा देकर इस बदलाव का मार्ग प्रशस्त किया था, जिसे राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्वीकार भी कर लिया था। इसके बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों नेताओं ने दिल्ली जाकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सहित केंद्रीय नेतृत्व से विस्तार से चर्चा की। केंद्रीय आलाकमान की मंजूरी के बाद ही सिद्धारमैया ने स्वयं डीके शिवकुमार को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था, जिससे आज होने वाली बैठक महज एक औपचारिक औपचारिकता बनकर रह गई है। नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। डीके शिवकुमार ने इस विषय में परामर्श किया है, जिसके आधार पर रविवार (31 मई), सोमवार (1 जून) या शुक्रवार (5 जून) को शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। अंतिम तिथि केंद्रीय नेताओं की उपलब्धता के आधार पर तय होगी।
इस बैठक के दौरान केंद्रीय आलाकमान की ओर से नियुक्त विशेष पर्यवेक्षक भी उपस्थित रहेंगे, जिनमें पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और राज्य प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला शामिल हैं। इन वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में सभी विधायकों से नए नेता के नाम पर सहमति ली जाएगी और उनके हस्ताक्षर युक्त समर्थन पत्र तैयार किए जाएंगे। इसके बाद डीके शिवकुमार विधायकों के इस समर्थन पत्र को लेकर राजभवन जाएंगे और राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और अनुशासित तरीके से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि पार्टी के भीतर किसी भी तरह के असंतोष की गुंजाइश न बचे।
नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही अब राज्य में नए मंत्रिमंडल के गठन को लेकर भी सरगर्मियां बेहद तेज हो गई हैं। डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली होने वाले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद और नए मंत्रियों के नामों को लेकर लाबिंग शुरू हो चुकी है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों और जातिगत समीकरणों को साधने के लिए मंत्रिमंडल में व्यापक बदलाव की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही राज्य में एक से अधिक उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में तैर रही हैं, जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के वरिष्ठ नेताओं को शामिल करने की मांग उठ रही है। सिद्धारमैया के खेमे के विधायकों को भी नए मंत्रिमंडल में उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए बातचीत चल रही है।
सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि वे राष्ट्रीय राजनीति में जाने के बजाय राज्य की राजनीति में ही सक्रिय रहेंगे। केंद्रीय नेतृत्व की ओर से उन्हें राज्यसभा में भेजने की पेशकश की गई थी, जिसे उन्होंने ससम्मान अस्वीकार कर दिया। वे राज्य में रहकर नई सरकार को अपना मार्गदर्शन देते रहेंगे। डीके शिवकुमार ने भी सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक संदेश साझा करते हुए सिद्धारमैया के योगदान को सराहा और कहा कि वे भविष्य में भी राज्य के विकास और पार्टी की मजबूती के लिए उनका मार्गदर्शन प्राप्त करते रहेंगे। दोनों नेताओं के बीच दिखाई दे रही यह आपसी समझदारी पार्टी के भविष्य के लिए बेहद सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
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