जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में उफनती लिद्दर नदी में बहा सेना का जांबाज जवान, रेस्क्यू टीम ने मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाला।

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित बेहद खूबसूरत और सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम से एक बेहद रोंगटे खड़े कर

Jun 3, 2026 - 13:23
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में उफनती लिद्दर नदी में बहा सेना का जांबाज जवान, रेस्क्यू टीम ने मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाला।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में उफनती लिद्दर नदी में बहा सेना का जांबाज जवान, रेस्क्यू टीम ने मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाला।
  • लापता नागरिक की तलाश में जुटे खोजी अभियान के दौरान पैर फिसलने से हुआ बड़ा हादसा, सेना के अदम्य साहस और त्वरित सूझबूझ से बची जान
  • बर्फीली नदी की तेज लहरों और खतरनाक चट्टानों के बीच चलाया गया हैरतअंगेज बचाव अभियान, अस्पताल में भर्ती सैन्य कर्मी की हालत अब पूरी तरह स्थिर

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित बेहद खूबसूरत और सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम से एक बेहद रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां भारतीय सेना के एक जांबाज जवान को मौत के मुंह से सकुशल बाहर निकाल लिया गया। घाटी की सबसे प्रसिद्ध और अपनी तेज लहरों के लिए जानी जाने वाली लिद्दर नदी के बेहद ठंडे और उफनते पानी में सेना का एक जवान अचानक संतुलन बिगड़ने के कारण बह गया था। यह हादसा उस समय हुआ जब सेना, स्थानीय पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें संयुक्त रूप से इलाके में लापता हुए एक स्थानीय नागरिक की खोज के लिए एक बेहद सघन और व्यापक तलाशी अभियान चला रही थीं। नदी के बेहद संकरे और फिसलन भरे पत्थरों पर पैर रखते समय अचानक जवान का नियंत्रण खो गया और वह पलक झपकते ही नदी की मुख्य और सबसे तेज धारा की चपेट में आ गया, जिससे वहां मौजूद अन्य सुरक्षाकर्मियों में हड़कंप मच गया।

हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गर्मियों के मौसम में पहाड़ों पर बर्फ पिघलने के कारण इस समय लिद्दर नदी का जलस्तर अपने चरम पर है और पानी की रफ्तार किसी भी भारी वस्तु को बहा ले जाने के लिए पर्याप्त है। जैसे ही जवान नदी में गिरा, पानी के प्रचंड वेग ने उसे कुछ ही सेकंड में घटनास्थल से काफी दूर धकेल दिया और वह उफनती लहरों के बीच अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करने लगा। नदी के भीतर मौजूद नुकीली चट्टानें और पानी का अत्यधिक कम तापमान उसकी शारीरिक क्षमता को लगातार कमजोर कर रहे थे। ऐसे नाजुक और जानलेवा वक्त में वहां तैनात सेना के विशेष बचाव दल ने बिना एक पल गंवाए अपनी जान जोखिम में डाली और बेहद त्वरित व रणनीतिक कार्रवाई शुरू की, जिसने अंततः इस जांबाज सैनिक के जीवन की रक्षा करने में सफलता पाई।

इस बेहद जटिल और खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए मौके पर मौजूद कमांडर ने तुरंत सूझबूझ दिखाई और नदी के बहाव की दिशा में आगे की तरफ एक सुरक्षा घेरा तैयार करने का निर्देश दिया। सेना के गोताखोरों और आपदा राहत कर्मियों ने नदी के निचले हिस्से में तेजी से दौड़कर 'लाइफ-लाइन' रस्सियों और सुरक्षा जालों को पानी के भीतर फैला दिया ताकि बहकर आ रहे जवान को किसी भी तरह थामा जा सके। पानी के तेज शोर और भारी दबाव के बीच बचाव दल के दो जवानों ने अपनी कमर में सुरक्षा रस्सियां बांधीं और उफनती नदी के बीचों-बीच छलांग लगा दी। लहरों से लड़ते हुए आखिरकार इन जांबाज बचावकर्मियों ने बह रहे जवान को मजबूती से पकड़ लिया और किनारे पर मौजूद बाकी टीम ने सामूहिक ताकत लगाते हुए रस्सियों के सहारे तीनों को सुरक्षित जमीन पर खींच लिया।

बचाव दल द्वारा नदी से बाहर निकाले जाने के तुरंत बाद सैन्य डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ ने जवान की शारीरिक स्थिति का गहन परीक्षण किया, क्योंकि बर्फीले पानी में लंबे समय तक रहने के कारण वह 'हाइपोथर्मिया' यानी शरीर के तापमान में अत्यधिक गिरावट का शिकार हो रहा था। इसके अलावा नदी के भीतर मौजूद पत्थरों से टकराने के कारण उसके शरीर पर कई जगह अंदरूनी और बाहरी चोटें भी आई थीं। घटनास्थल पर ही प्राथमिक चिकित्सा सहायता प्रदान करने और शरीर को गर्म कपड़ों से ढकने के बाद, उसे तुरंत एम्बुलेंस के जरिए पास के सेना के फील्ड अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों के मुताबिक, समय रहते पानी से बाहर निकाले जाने और तत्काल जरूरी दवाइयां मिलने के कारण जवान की हालत अब पूरी तरह स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रहा है।

यह पूरी घटना उस बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण माहौल को बयां करती है जिसमें भारतीय सेना के जवान जम्मू-कश्मीर के दुर्गम इलाकों में नागरिक सुरक्षा और राहत कार्यों को अंजाम देते हैं। जिस लापता व्यक्ति की तलाश के लिए यह अभियान चलाया जा रहा था, वह पिछले कुछ दिनों से पहलगाम के जंगलों और नदी के आसपास के इलाकों से लापता है, जिसकी खोज में सेना की राष्ट्रीय राइफल्स और स्थानीय प्रशासन की टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं। घाटी के ये पहाड़ी क्षेत्र जितने सुंदर दिखाई देते हैं, सामरिक और भौगोलिक दृष्टि से उतने ही खतरनाक और अनिश्चितताओं से भरे होते हैं, जहां एक छोटी सी चूक भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसके बावजूद सुरक्षा बल स्थानीय आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भारतीय सेना ने सुरक्षा मानकों को और अधिक कड़ा कर दिया है, विशेष रूप से उन इलाकों में जहां नदियां उफान पर हैं और तलाशी अभियान जारी रखना अनिवार्य है। अब नदी के किनारों पर होने वाले किसी भी ऑपरेशन के दौरान जवानों के लिए विशेष सुरक्षा हार्नेस, फ्लोटेशन वेस्ट (लाइफ जैकेट) और एन्टी-स्लिप बूट्स का उपयोग पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। स्थानीय सैन्य अधिकारियों ने इस सफल बचाव कार्य के लिए रेस्क्यू टीम के सदस्यों के अदम्य साहस, अद्वितीय तालमेल और असाधारण वीरता की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी एक-दूसरे की जान बचाने का यह जज्बा ही भारतीय सेना को दुनिया की सबसे अनुशासित और सर्वश्रेष्ठ ताकतों में से एक बनाता है।

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