युद्धविराम के बीच अमेरिका और ईरान में सीधे मोर्चे पर जबरदस्त गोलाबारी, फारस की खाड़ी में कई युद्धपोत और फाइटर जेट्स अलर्ट पर।

मध्य पूर्व में पिछले कुछ समय से जारी अस्थिरता और संघर्ष के बीच वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को हिलाकर रख देने वाला एक और

Jun 1, 2026 - 12:09
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युद्धविराम के बीच अमेरिका और ईरान में सीधे मोर्चे पर जबरदस्त गोलाबारी, फारस की खाड़ी में कई युद्धपोत और फाइटर जेट्स अलर्ट पर।
युद्धविराम के बीच अमेरिका और ईरान में सीधे मोर्चे पर जबरदस्त गोलाबारी, फारस की खाड़ी में कई युद्धपोत और फाइटर जेट्स अलर्ट पर।
  • अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी टोही ड्रोन गिराए जाने से भड़का वॉशिंगटन, मध्य पूर्व के रणनीतिक समुद्री रास्ते पर बढ़ा भारी सैन्य तनाव
  • अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के गोरुक और केश्म द्वीप पर की भीषण बमबारी, एयर डिफेंस सिस्टम समेत ड्रोन कंट्रोल स्टेशन किए तबाह

मध्य पूर्व में पिछले कुछ समय से जारी अस्थिरता और संघर्ष के बीच वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को हिलाकर रख देने वाला एक और बड़ा सैन्य टकराव सामने आया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया है कि उसके लड़ाकू विमानों ने ईरान के दो बेहद संवेदनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीपों पर सिलसिलेवार हवाई हमले किए हैं। इस सैन्य कार्रवाई को अमेरिकी प्रशासन द्वारा एक सीधे और आक्रामक प्रतिशोध के रूप में देखा जा रहा है, जिसने क्षेत्र में पहले से लागू नाजुक युद्धविराम को पूरी तरह से खतरे में डाल दिया है। अमेरिकी विमानों ने यह आक्रामक रुख तब अख्तियार किया जब उनके एक अत्यंत आधुनिक टोही ड्रोन को समुद्री सीमा के ऊपर नष्ट कर दिया गया, जिसके बाद वॉशिंगटन ने बिना कोई समय गंवाए ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

हवाई हमलों की इस ताजा और भीषण कमान की शुरुआत सप्ताहांत के दौरान हुई, जब अमेरिकी वायुसेना के अत्याधुनिक एफ-16 और एफ-35 लड़ाकू विमानों ने फारस की खाड़ी के निकट स्थित ईरानी ठिकानों की तरफ उड़ान भरी। अमेरिकी सैन्य मुख्यालय के अनुसार, इन लड़ाकू विमानों ने ईरान के होरमुज़गान प्रांत के अंतर्गत आने वाले गोरुक क्षेत्र और केश्म द्वीप (Qeshm Island) पर बने रडार और ड्रोन कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स पर अचूक निशाना लगाते हुए भारी बमबारी की। इस बमबारी के दौरान अमेरिकी बलों ने न केवल जमीनी नियंत्रण केंद्रों को मलबे में तब्दील कर दिया, बल्कि वहां तैनात ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defense Systems), एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और दो घातक वन-वे अटैक ड्रोन को भी पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया, जिससे ईरानी रक्षा तंत्र को बड़ा नुकसान पहुंचा है।

इस भयंकर सैन्य तनातनी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के ऊपर अमेरिका के एक अत्यंत संवेदनशील मानवरहित विमान, एमक्यू-1 प्रेडेटर (MQ-1 Predator) ड्रोन को मार गिराया जाना था। अमेरिकी अधिकारियों का स्पष्ट दावा है कि उनका यह टोही ड्रोन पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र और समुद्री सीमा के नियमों के तहत अपनी नियमित निगरानी उड़ान पर था, जब उस पर ईरानी मिसाइल डिफेंस सिस्टम द्वारा हमला किया गया। अमेरिका ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से गैर-उचित और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता पर एक बड़ा हमला माना। इसके विपरीत, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अधिकारियों ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए तर्क दिया कि यह विदेशी ड्रोन उनकी संप्रभु क्षेत्रीय हवाई सीमा के भीतर घुसपैठ कर रहा था, जिसके कारण आत्मरक्षा में उसे मार गिराया गया। होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के मुहाने पर स्थित केश्म द्वीप ईरान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य और रडार बेस है, जहां से वह वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे बड़े समुद्री मार्ग की निगरानी और नियंत्रण करता है। इस द्वीप पर अमेरिकी हमला सीधे तौर पर ईरान की रणनीतिक घेराबंदी को दर्शाता है।

इस बड़े हवाई हमले के तुरंत बाद पश्चिम एशिया के पूरे समुद्री और हवाई क्षेत्र में युद्ध जैसी आपातकालीन परिस्थितियां पैदा हो गई हैं। ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में कड़ा रुख अपनाते हुए पास के सिरीक द्वीप पर बने एक संचार टावर पर हुए हमले का बदला लेने के लिए पड़ोसी खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की तरफ बैलिस्टिक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागने का दावा किया है। इस जवाबी कार्रवाई के कारण कुवैत और उसके आसपास के मित्र देशों के एयर डिफेंस सिस्टम पूरी रात सक्रिय रहे, जहां आसमान में कई मिसाइलों को बीच रास्ते में ही मार गिराया गया, जिससे होने वाले बड़े धमाकों की गूंज से पूरा इलाका दहल उठा।

यह भयंकर सैन्य टकराव ऐसे संवेदनशील समय में हुआ है जब दोनों देशों के बीच अप्रैल महीने से एक अस्थाई युद्धविराम लागू था और ओमान तथा कतर जैसे देशों की मध्यस्थता में होरमुज़ जलमार्ग को सुरक्षित खोलने और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए शांति वार्ता अंतिम दौर में चल रही थी। इस हवाई हमले ने उन तमाम कूटनीतिक कोशिशों पर पानी फेर दिया है जो वैश्विक तेल बाजार को स्थिरता देने के लिए की जा रही थीं। अमेरिकी कमान ने दोटूक शब्दों में साफ कर दिया है कि वे युद्धविराम का सम्मान करते हैं, लेकिन अपने किसी भी सैन्य साजो-सामान या सैनिक पर होने वाले हमले को बर्दाश्त नहीं करेंगे और सुरक्षा के लिए इस तरह के आत्मरक्षात्मक प्रहार आगे भी जारी रखे जा सकते हैं।

वैश्विक आर्थिक मोर्चे पर भी इस सैन्य कार्रवाई का तुरंत और व्यापक असर देखने को मिला है, क्योंकि जिस जलमार्ग के किनारे यह पूरी जंग लड़ी जा रही है, वहां से दुनिया का लगभग एक-तिहाई कच्चे तेल का व्यापारिक जहाजों के जरिए परिवहन होता है। अमेरिका और ईरान के बीच सीधी गोलाबारी की खबरों के आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक भारी उछाल दर्ज किया गया है। दुनिया भर की शिपिंग कंपनियों ने एहतियात के तौर पर अपने बड़े जहाजों और कार्गो कंटेनर्स को इस मार्ग से दूर रहने या सुरक्षित बंदरगाहों पर लंगर डालने के निर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के एक बार फिर से पूरी तरह ठप होने का बड़ा खतरा मंडराने लगा है।

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