नेपाल यात्रा के नियमों में हुआ बड़ा प्रशासनिक बदलाव, अब सिर्फ आधार कार्ड दिखाने से भारतीय नागरिकों को नहीं मिलेगी सीधी एंट्री।

भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों और 'रोटी-बेटी के रिश्ते' के बीच दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे

Jun 2, 2026 - 12:09
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नेपाल यात्रा के नियमों में हुआ बड़ा प्रशासनिक बदलाव, अब सिर्फ आधार कार्ड दिखाने से भारतीय नागरिकों को नहीं मिलेगी सीधी एंट्री।
नेपाल यात्रा के नियमों में हुआ बड़ा प्रशासनिक बदलाव, अब सिर्फ आधार कार्ड दिखाने से भारतीय नागरिकों को नहीं मिलेगी सीधी एंट्री।
  • काठमांडू महानगरपालिका और सीमा अधिकारियों ने कड़े किए नियम, एंट्री के लिए वैध पासपोर्ट या मूल मतदाता पहचान पत्र हुआ अनिवार्य
  • खुली सीमा के बावजूद सुरक्षा और नागरिकता सत्यापन को लेकर नया आदेश, पर्यटकों, व्यवसायियों और आम यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी

भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों और 'रोटी-बेटी के रिश्ते' के बीच दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे के देश में आने-जाने के लिए विशेष रियायतें मिलती रही हैं। सन् 1950 की ऐतिहासिक शांति और मित्रता संधि के तहत दोनों देशों के बीच एक खुली सीमा (Open Border) की व्यवस्था लागू है, जिसके कारण भारतीय नागरिकों को नेपाल जाने के लिए किसी भी तरह के वीजा की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, पिछले कुछ समय से सुरक्षा परिदृश्यों और तकनीकी सत्यापन की जटिलताओं को देखते हुए नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन ने एंट्री नियमों में एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित बदलाव कर दिया है। नए प्रशासनिक आदेशों के अनुसार, अब नेपाल की सीमा में प्रवेश करने के लिए सिर्फ आधार कार्ड (Aadhaar Card) को एकमात्र पहचान पत्र के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों और हवाई मार्ग से यात्रा करने वाले हजारों भारतीयों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।

इस कड़े फैसले के पीछे मुख्य रूप से काठमांडू के स्थानीय प्रशासन और मेयर बालेन्द्र शाह (बालेन सरकार) की सुरक्षा नीतियों तथा केंद्रीय आव्रजन विभाग के नए दिशा-निर्देशों को जिम्मेदार माना जा रहा है। काठमांडू महानगरपालिका क्षेत्र के भीतर आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था, होटल पंजीकरण और विदेशी नागरिकों के ठहरने के नियमों को बेहद सख्त किया जा रहा है। स्थानीय निकाय के स्तर पर यह देखा गया कि बिना किसी ठोस राष्ट्रीयता प्रमाण के केवल एक डिजिटल या कागजी पहचान पत्र के सहारे बड़ी संख्या में लोग राजधानी क्षेत्र में ठहर रहे थे, जिससे नागरिक पहचान स्थापित करने में सुरक्षा एजेंसियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए अब काठमांडू और उसके आसपास के पर्यटक स्थलों पर प्रवेश और ठहरने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के पुराने नियमों को पूरी तरह से और कड़ाई से लागू करने का फैसला लिया गया है।

आधिकारिक आव्रजन (Immigration) नियमों के अनुसार, भारत सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला आधार कार्ड देश के भीतर नागरिक विशिष्ट पहचान और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का एक बेहद मजबूत माध्यम है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए नागरिकता के अकाट्य प्रमाण के रूप में डिजाइन नहीं किया गया है। आधार कार्ड के विवरण वाले हिस्से में स्पष्ट रूप से दर्ज होता है कि यह केवल पहचान का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं। इसके अतिरिक्त, कई पुराने आधार कार्डों पर 'भारत' या 'भारतीय राष्ट्रीयता' का स्पष्ट उल्लेख नहीं होता है, जिसे तकनीकी रूप से आधार बनाकर नेपाल के सीमा जांच चौकियों और त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने इसे प्राथमिक यात्रा दस्तावेज मानने से पूरी तरह इंकार कर दिया है।

नए नियम और स्वीकार्य दस्तावेज

नेपाल में वैध रूप से प्रवेश करने और वहां किसी भी प्रकार की कानूनी अड़चन से बचने के लिए अब प्रत्येक भारतीय नागरिक के पास भारत सरकार द्वारा जारी वैध मूल पासपोर्ट (Valid Indian Passport) या भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी मूल मतदाता पहचान पत्र (Original Voter ID Card) होना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। इन दोनों में से किसी एक मूल दस्तावेज के बिना किसी भी भारतीय यात्री को सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

यह नया नियम लागू होने के बाद सबसे ज्यादा असर उन मध्यमवर्गीय पर्यटकों और तीर्थयात्रियों पर पड़ने जा रहा है जो उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों जैसे सोनौली, रक्सौल, जयनगर और जोगबनी के रास्ते सड़क मार्ग से अक्सर नेपाल की यात्रा करते थे। अब तक इन भूमि सीमाओं (Land Borders) पर सुरक्षा जांच के दौरान आधार कार्ड दिखाकर लोग आसानी से प्रवेश पा लेते थे, लेकिन अब सीमा पर तैनात नेपाल सशस्त्र प्रहरी बल (APF) के जवानों ने बिना पासपोर्ट या वोटर आईडी के वाहनों और पैदल यात्रियों को वापस लौटाना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही, यदि कोई भारतीय नागरिक निजी वाहन से नेपाल जा रहा है, तो उसे सीमा चेकपोस्ट पर 'भंसार' (सीमा शुल्क) और 'यातायात अनुमति' प्राप्त करने के लिए भी इन्हीं दोनों अनिवार्य पहचान पत्रों को प्रस्तुत करना होगा।

हवाई मार्ग से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए तो यह नियम और भी ज्यादा सख्त तरीके से लागू किया जा रहा है, जहां दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे हवाई अड्डों पर ही विमानन कंपनियों (Airlines) ने केवल आधार कार्ड लेकर पहुंचने वाले यात्रियों को बोर्डिंग पास जारी करने से मना कर दिया है। हवाई अड्डों पर आव्रजन काउंटरों पर तैनात अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल कॉपियां, डिजीलॉकर के दस्तावेज, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या राशन कार्ड को भी प्राथमिक यात्रा दस्तावेज के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी। केवल 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और 65 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को ही आयु और संबंध स्थापित करने वाले अन्य फोटो पहचान पत्रों के आधार पर थोड़ी शिथिलता दी जाएगी, बशर्ते वे अपने परिवार के किसी ऐसे वयस्क के साथ यात्रा कर रहे हों जिसके पास पासपोर्ट या वोटर आईडी मौजूद हो।

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