श्रीगंगानगर पुलिस की बड़ी कामयाबी- चार महीने बाद हिस्ट्रीशीटर गिरफ्तार, शहीद लांस हवलदार शीशपाल सिंह का अशोक चक्र बरामद
पुलिस ने चार महीने की निरंतर मेहनत के बाद आरोपी हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार किया। आरोपी की निशानदेही पर छापेमारी की गई, जहां से अशोक चक्र बरामद हुआ। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ क्षेत्र में पुलिस ने एक भावुक और ऐतिहासिक मामले में बड़ी सफलता हासिल की है, जहां गोवा मुक्ति संग्राम में शहीद हुए लांस हवलदार शीशपाल सिंह को मरणोपरांत प्रदान किया गया अशोक चक्र चोरी हो गया था। पुलिस ने चार महीने की लगातार जांच और प्रयासों के बाद आरोपी हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार कर लिया और चुराया गया अशोक चक्र सफलतापूर्वक बरामद कर लिया। यह घटना भावनात्मक रूप से पूरे क्षेत्र को झकझोर देने वाली थी, क्योंकि अशोक चक्र न केवल एक पुरस्कार था बल्कि शहीद की वीरता और देशभक्ति का प्रतीक था। चोरी की शिकायत 1 नवंबर 2025 को विक्रम सिंह ने अनूपगढ़ पुलिस थाने में दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार पिछले आठ महीनों से श्रीगंगानगर में रह रहा है और घर खाली रहने के कारण चोरों ने मौका देखकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर छापेमारी की और अशोक चक्र को सुरक्षित बरामद किया। इस सफलता से शहीद परिवार को गहरा संतोष मिला है और स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यकुशलता की सराहना हो रही है।
शहीद लांस हवलदार शीशपाल सिंह का नाम गोवा मुक्ति संग्राम के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। 1961 में भारत ने गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराने के लिए सैन्य अभियान चलाया था, जिसमें शीशपाल सिंह ने अदम्य साहस दिखाया। इस अभियान के दौरान वे गंभीर रूप से घायल हो गए और शहीद हो गए। उनकी वीरता को मान्यता देते हुए भारत सरकार ने 15 अगस्त 1962 को उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया। यह सम्मान शहीद की बहादुरी और बलिदान का प्रतीक था, जिसे परिवार पीढ़ियों से संभालकर रख रहा था। विक्रम सिंह, जो शहीद के पोते हैं, ने बताया कि अशोक चक्र परिवार के लिए सबसे कीमती धरोहर था। चोरी की घटना ने परिवार को गहरा आघात पहुंचाया, क्योंकि यह सिर्फ एक धातु का पदक नहीं था बल्कि पूर्वजों की वीर गाथा से जुड़ा हुआ था। पुलिस ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए उच्च प्राथमिकता दी और जांच को तेजी से आगे बढ़ाया।
चोरी की घटना पिछले साल अक्टूबर-नवंबर के आसपास हुई थी, जब परिवार श्रीगंगानगर में स्थानांतरित होकर रह रहा था। विक्रम सिंह वन विभाग में कनिष्ठ सहायक के पद पर तैनात हैं और उनका पूरा परिवार पिछले आठ महीनों से श्रीगंगानगर में ही बस गया था। अनूपगढ़ स्थित पैतृक घर लंबे समय तक खाली पड़ा रहा, जिसका फायदा चोरों ने उठाया। उन्होंने घर में घुसकर अलमारी और अन्य जगहों से अशोक चक्र सहित अन्य कीमती सामान चुरा लिया। विक्रम सिंह ने 1 नवंबर 2025 को अनूपगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने पूरी घटना का विवरण दिया। पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। शुरुआत में चोरों का कोई सुराग नहीं मिला, लेकिन पुलिस ने स्थानीय अपराधियों की सूची बनाई और हिस्ट्रीशीटरों पर नजर रखी। जांच के दौरान कुछ संदिग्धों की पूछताछ हुई, जिससे पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले। अशोक चक्र भारत का सर्वोच्च शांति कालीन वीरता पुरस्कार है, जो मरणोपरांत भी प्रदान किया जाता है। गोवा मुक्ति संग्राम में कई सैनिकों को यह सम्मान मिला, और शीशपाल सिंह का नाम उनमें शामिल है।
पुलिस ने चार महीने की निरंतर मेहनत के बाद आरोपी हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार किया। आरोपी की निशानदेही पर छापेमारी की गई, जहां से अशोक चक्र बरामद हुआ। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने चोरी के बाद पदक को छिपाकर रखा था, लेकिन लगातार दबाव और तकनीकी जांच से वह टूट गया। बरामदगी के बाद अशोक चक्र को परिवार को सौंप दिया गया। विक्रम सिंह ने पुलिस की सराहना की और कहा कि यह उनके परिवार के लिए बड़ी राहत की बात है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ चोरी, घर में घुसने और अन्य धाराओं में चार्जशीट तैयार की जा रही है। पुलिस ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए तेजी से कार्रवाई की, जिससे अन्य पुरानी चोरियों के मामलों में भी प्रेरणा मिली है।
इस घटना ने श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि त्योहारों और लंबे समय तक घर खाली रहने पर चोर सक्रिय हो जाते हैं। पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ाने और सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है। विक्रम सिंह ने कहा कि अशोक चक्र अब सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा और परिवार इसे आने वाली पीढ़ियों तक संभालकर रखेगा। यह बरामदगी न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे देश के लिए भावुक क्षण था, क्योंकि यह शहीदों के सम्मान से जुड़ा मामला था। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों में भावनाओं का सम्मान करते हुए जांच की जाती है।
शहीद लांस हवलदार शीशपाल सिंह की कहानी गोवा मुक्ति संग्राम की वीर गाथाओं में शामिल है। 1961 में भारत ने ऑपरेशन विजय चलाकर गोवा को आजाद कराया था, जिसमें शीशपाल सिंह जैसे सैनिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी शहादत के बाद परिवार को अशोक चक्र मिला, जो 1962 में राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया। विक्रम सिंह ने बताया कि यह पदक परिवार की सबसे बड़ी पूंजी था और चोरी से पूरा परिवार सदमे में था। अब बरामदगी से परिवार में खुशी की लहर है और वे पुलिस का आभार व्यक्त कर रहे हैं। यह घटना दिखाती है कि पुलिस कितनी संवेदनशीलता से काम कर सकती है।
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