पश्चिम एशिया संकट में होर्डिंग रोकने के लिए 25 दिन का लॉक-इन, रिफाइनरी को उत्पादन बढ़ाने का आदेश।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ईंधन आपूर्ति श्रृंखला में आई गंभीर बाधाओं के कारण भारत में एलपीजी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है। इस

Mar 10, 2026 - 13:29
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पश्चिम एशिया संकट में होर्डिंग रोकने के लिए 25 दिन का लॉक-इन, रिफाइनरी को उत्पादन बढ़ाने का आदेश।
पश्चिम एशिया संकट में होर्डिंग रोकने के लिए 25 दिन का लॉक-इन, रिफाइनरी को उत्पादन बढ़ाने का आदेश।
  • पेट्रोलियम मंत्रालय का बड़ा कदम: घरेलू एलपीजी बुकिंग में 25 दिन का अनिवार्य अंतर
  • एलपीजी किल्लत के बीच घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता, अस्पतालों को आपूर्ति में विशेष स्थान

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ईंधन आपूर्ति श्रृंखला में आई गंभीर बाधाओं के कारण भारत में एलपीजी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है। इस स्थिति में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घरेलू उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्य रूप से घरेलू रसोई गैस की कालाबाजारी और होर्डिंग को रोकने के लिए बुकिंग के बीच न्यूनतम 25 दिनों का अंतर अनिवार्य कर दिया गया है। पहले यह अंतर 21 दिनों का था, लेकिन मांग में अचानक उछाल और अनियमित बुकिंग पैटर्न देखने के बाद इसे बढ़ाया गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम राशनिंग नहीं बल्कि निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित करने के लिए है। घरेलू उपभोक्ता हमेशा प्राथमिकता में रहेंगे, जबकि अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक क्षेत्रों को आयातित एलपीजी की आपूर्ति में विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। यह फैसला मार्च 2026 की शुरुआत में लिया गया, जब वैश्विक स्तर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से आपूर्ति प्रभावित हुई। मंत्रालय ने तत्काल कदम उठाते हुए रिफाइनरियों को अधिक उत्पादन करने और अतिरिक्त मात्रा को घरेलू उपयोग के लिए निर्देशित करने का आदेश दिया।

इस संकट की जड़ पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव में है, जहां ईरान-इजराइल संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया। भारत एलपीजी का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसका अधिकांश भाग होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है, जहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई। इससे घरेलू बाजार में मांग 15-20 प्रतिशत तक बढ़ गई, क्योंकि लोग संभावित कमी के डर से पहले से बुकिंग कर रहे थे। कुछ उपभोक्ता जो सामान्यतः 55 दिनों में बुकिंग करते थे, अब 15 दिनों में कर रहे थे, जिससे होर्डिंग का खतरा बढ़ गया। मंत्रालय ने इस अनियमितता को देखते हुए 25 दिनों का लॉक-इन पीरियड लागू किया। यह नियम मुख्य रूप से दोहरे कनेक्शन वाले घरेलू उपभोक्ताओं पर लागू होता है, ताकि वे अनावश्यक स्टॉक न जमा कर सकें। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने इस नियम को तुरंत लागू कर दिया। इससे डिस्ट्रीब्यूटर्स को भी सख्ती से पालन करना पड़ रहा है और बुकिंग सिस्टम में स्वचालित रूप से चेक लग रहा है।

रिफाइनरियों को दिए गए निर्देशों में प्रोपेन और ब्यूटेन स्ट्रीम्स को अधिकतम एलपीजी उत्पादन के लिए उपयोग करने को कहा गया है। पहले इनका कुछ हिस्सा पेट्रोकेमिकल्स या अन्य उत्पादों में जाता था, लेकिन अब इसे पूरी तरह घरेलू एलपीजी के लिए डायवर्ट किया जा रहा है। यह आदेश एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के तहत जारी किया गया, जो आपात स्थिति में उत्पादन और आपूर्ति नियंत्रित करने की शक्ति देता है। सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों को विशेष रूप से लक्षित किया गया है, लेकिन निजी रिफाइनरियां भी इसमें शामिल हैं। अतिरिक्त उत्पादन को सीधे घरेलू वितरण के लिए भेजा जाएगा। मंत्रालय ने यह भी सुनिश्चित किया कि घरेलू कनेक्शन को व्यावसायिक कनेक्शनों पर प्राथमिकता मिले। व्यावसायिक क्षेत्र जैसे होटल, रेस्तरां और उद्योगों के लिए एक समिति गठित की गई है, जो उनकी मांगों की समीक्षा करेगी और आवश्यकता अनुसार आपूर्ति करेगी।

इनसेट: एलपीजी आपूर्ति में प्राथमिकता व्यवस्था घरेलू उपभोक्ता सबसे ऊपर हैं, जिनके लिए घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी जा रही है। अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को आयातित एलपीजी की आपूर्ति में विशेष स्थान मिलेगा, क्योंकि ये आवश्यक सेवाएं हैं। अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए तीन एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स की समिति आवेदनों की जांच करेगी। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि संकट में भी महत्वपूर्ण क्षेत्र प्रभावित न हों।

सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों से एलपीजी आयात बढ़ाने के प्रयास भी तेज कर दिए हैं। अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नॉर्वे जैसे देशों से बातचीत चल रही है ताकि अतिरिक्त मात्रा हासिल की जा सके। इससे घरेलू स्टॉक को मजबूत किया जा रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह 25 दिनों का अंतर राशनिंग नहीं है, बल्कि होर्डिंग रोकने का उपाय है। सामान्य उपभोग वाले घरों पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि औसतन एक सिलेंडर 30-45 दिनों में खत्म होता है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए सब्सिडी जारी रहेगी और सिलेंडर की कीमत में हालिया वृद्धि के बावजूद आपूर्ति पर्याप्त बताई जा रही है। कुछ शहरों में डिलीवरी में 8 दिनों तक की देरी देखी गई, लेकिन नई व्यवस्था से स्थिति सुधरने की उम्मीद है।

इस फैसले का प्रभाव बाजार पर सकारात्मक दिख रहा है। होर्डिंग के डर से पैदा हुई अतिरिक्त मांग अब नियंत्रित हो रही है। डिस्ट्रीब्यूटर्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे 25 दिनों का सख्ती से पालन करें, अन्यथा कार्रवाई होगी। कुछ क्षेत्रों में व्यावसायिक सिलेंडर की आपूर्ति अस्थायी रूप से प्रभावित हुई है, जैसे मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता में, जहां होटल एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि वे सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। लेकिन मंत्रालय ने कहा कि आवश्यक सेवाओं जैसे अस्पतालों को कोई कमी नहीं होगी। रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ने से घरेलू स्टॉक में सुधार आ रहा है। अपडेट्स के अनुसार, यह नियम पूरे देश में लागू है और पोर्टल पर बुकिंग सिस्टम अपडेट कर दिया गया है।

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