ईरान युद्ध से पाकिस्तान में पैनिक: स्कूल-कॉलेज दो हफ्ते बंद, WFH अनिवार्य।
पाकिस्तान में मिडिल ईस्ट संकट के कारण ईरान युद्ध से वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे देश में गंभीर फ्यूल
- तेल 100 डॉलर पार, PM शहबाज शरीफ के 13-14 पॉइंट्स प्लान से आम आदमी पर बोझ
- फ्यूल संकट गहराया: सरकारी दफ्तर 4 दिन काम, सैलरी कटौती, वाहन 60% ऑफ रोड
पाकिस्तान में मिडिल ईस्ट संकट के कारण ईरान युद्ध से वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे देश में गंभीर फ्यूल संकट पैदा हो गया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 9 मार्च 2026 को राष्ट्र को संबोधित करते हुए ऊर्जा बचत और सरकारी खर्च कम करने के लिए व्यापक कठोर उपायों की घोषणा की। ये फैसले तत्काल फ्यूल खपत को 30 प्रतिशत तक कम करने के उद्देश्य से लिए गए हैं। स्कूलों को दो हफ्ते के लिए बंद करने, विश्वविद्यालयों को ऑनलाइन क्लासेस पर शिफ्ट करने, सरकारी दफ्तरों में चार दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने और आधे कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम पर भेजने जैसे कदम उठाए गए हैं। सरकारी वाहनों की फ्यूल अलाउंस 50 प्रतिशत कम की गई है और 60 प्रतिशत आधिकारिक वाहनों को सड़क से हटा दिया जाएगा, सिवाय बसों और एम्बुलेंस के। कैबिनेट सदस्यों, मंत्रियों, सलाहकारों और विशेष सहायकों की दो महीने की सैलरी रोकी जाएगी, जबकि सांसदों की सैलरी में 25 प्रतिशत कटौती होगी। ग्रेड-20 और उससे ऊपर के अधिकारियों, जिनकी मासिक सैलरी 3 लाख रुपये से अधिक है, की दो दिन की सैलरी काटी जाएगी। ये उपाय ईरान युद्ध से होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के कारण हुए हैं, जहां पाकिस्तान अपनी अधिकांश तेल और गैस आयात करता है।
प्रधानमंत्री के फैसलों का मुख्य उद्देश्य फ्यूल और ऊर्जा की बचत करना है, क्योंकि पाकिस्तान ऊर्जा का बड़ा आयातक है और वैश्विक कीमतों में उछाल से आयात बिल भारी पड़ रहा है। स्कूलों को 16 मार्च से दो हफ्ते बंद रखने का आदेश दिया गया है, जबकि उच्च शिक्षा संस्थान तुरंत ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट हो गए हैं। इससे यात्रा कम होगी और फ्यूल की बचत होगी। सरकारी और निजी क्षेत्रों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रम होम पर रखा जाएगा, सिवाय आवश्यक सेवाओं जैसे बैंक, अस्पताल, कृषि और उद्योग के। सरकारी दफ्तर अब चार दिन काम करेंगे, जिससे यात्रा और बिजली दोनों की खपत घटेगी। फ्यूल अलाउंस में 50 प्रतिशत कटौती दो महीने के लिए लागू है, और आधिकारिक वाहनों का उपयोग सीमित करने से सरकारी खर्च में बड़ी कमी आएगी। ये कदम तेल कीमतों में रिकॉर्ड उछाल के बाद लिए गए, जहां ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गया और पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 55 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गईं, जो अब 321 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं। इससे पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगीं और कुछ जगहों पर हिंसा भी हुई।
सरकारी खर्च कम करने के लिए कैबिनेट और उच्च अधिकारियों की सैलरी रोकने का फैसला लिया गया है। कैबिनेट सदस्यों की दो महीने की सैलरी नहीं मिलेगी, जबकि संसद सदस्यों की 25 प्रतिशत कटौती होगी। उच्च ग्रेड के अफसरों की दो दिन की सैलरी काटी जाएगी। ये उपाय नेतृत्व स्तर पर बलिदान दिखाने के लिए हैं, ताकि आम जनता पर बोझ कम लगे। प्रांतों को भी समान उपाय अपनाने की सलाह दी गई है, और पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा तथा बलूचिस्तान ने कुछ कदम उठाए हैं। सिंध कैबिनेट ने भी बैठक की। विदेशी दौरों पर प्रतिबंध लगाया गया है और गैर-जरूरी सरकारी खर्च रोके गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये कठिन फैसले अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए जरूरी हैं, क्योंकि वैश्विक बाजार पाकिस्तान के नियंत्रण में नहीं है। फ्यूल स्टॉक पर्याप्त बताए जा रहे हैं, लेकिन लंबे संघर्ष की स्थिति में समस्या गंभीर हो सकती है।
मुख्य उपायों की सूची
स्कूल दो हफ्ते बंद।
विश्वविद्यालय ऑनलाइन क्लासेस।
सरकारी दफ्तर चार दिवसीय कार्य सप्ताह।
50 प्रतिशत कर्मचारी WFH।
सरकारी वाहनों की फ्यूल अलाउंस 50 प्रतिशत कम।
60 प्रतिशत आधिकारिक वाहन ऑफ रोड।
कैबिनेट सदस्यों की दो महीने सैलरी रोकी।
सांसदों की सैलरी 25 प्रतिशत कम।
उच्च ग्रेड अफसरों की दो दिन सैलरी कटौती।
विदेशी दौरों पर रोक।
गैर-जरूरी खर्च बंद।
आवश्यक सेवाओं को छूट।
प्रांतों में समान उपाय। ये लगभग 13-14 पॉइंट्स वाले प्लान का हिस्सा हैं, जो फ्यूल बचत पर केंद्रित हैं।
इस संकट ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को गहरा झटका दिया है, क्योंकि देश तेल का 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर है। कीमतें बढ़ने से मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और आयात बिल में उछाल आएगा। पेट्रोल पंपों पर पैनिक बाइंग से हिंसा की घटनाएं हुईं, जैसे सियालकोट और कराची में। सरकार ने होर्डिंग रोकने के लिए सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों से आयात की कोशिश की जा रही है, लेकिन लागत अधिक है। अपडेट्स के अनुसार, ये उपाय तत्काल प्रभावी हैं और फ्यूल खपत में कमी आ रही है।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को आश्वासन दिया कि स्टॉक पर्याप्त हैं और राशनिंग नहीं होगी, लेकिन बचत जरूरी है। ये फैसले IMF कार्यक्रम के तहत अर्थव्यवस्था स्थिर रखने में मदद करेंगे। आम जनता पर प्रभाव पड़ेगा, लेकिन आवश्यक सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी। प्रांतों में भी स्कूल बंदी और अन्य उपाय लागू हो रहे हैं।
Also Read- अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट प्रदान की।
What's Your Reaction?







