LPG का झंझट खत्म, अब रसोई में सीधा पाइप से आएगी गैस, घर-घर PNG पहुँचाने के लिए सरकार का बड़ा दांव।
भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव के माध्यम से देश के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों
- रू.500 की मुफ्त गैस और शून्य सुरक्षा शुल्क; नई सरकारी योजना से परिवारों को मिली बड़ी राहत
- स्वच्छ ईंधन अभियान को नई रफ्तार: पंजीकरण शुल्क की माफी और मुफ्त गैस के साथ PNG अपनाने का सुनहरा मौका
भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव के माध्यम से देश के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के नेटवर्क को विस्तार देने के लिए कई लुभावने प्रस्तावों की घोषणा की है। इस नई रणनीति का सबसे आकर्षक हिस्सा उन नए उपभोक्ताओं को रू.500 मूल्य की मुफ्त गैस प्रदान करना है जो अपने पुराने LPG कनेक्शन को छोड़कर PNG को अपना रहे हैं। यह लाभ सीधे उपभोक्ता के पहले बिल में छूट के रूप में दिया जाएगा, जिससे शुरुआत में ही गैस का खर्च लगभग शून्य हो जाएगा। सरकार का मानना है कि इस तरह के सीधे वित्तीय लाभ मध्यमवर्गीय परिवारों को PNG की ओर आकर्षित करने में प्रभावी साबित होंगे, जो वर्तमान में LPG सिलेंडरों की बुकिंग और डिलीवरी की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं।
आर्थिक प्रोत्साहनों के अलावा, सरकार ने बुनियादी ढांचागत बाधाओं को दूर करने के लिए 'शून्य सुरक्षा शुल्क' और पंजीकरण शुल्क में भारी कटौती की नीति अपनाई है। प्रमुख गैस वितरण कंपनियों ने नए घरेलू कनेक्शनों के लिए लगने वाले रू.500 के पंजीकरण शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही, सुरक्षा जमा राशि (Security Deposit) के मामले में भी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी गई है। अब उपभोक्ताओं को कनेक्शन लेते समय भारी-भरकम राशि अग्रिम रूप से जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। कुछ राज्यों में तो यह सुविधा दी जा रही है कि उपभोक्ता सुरक्षा राशि का भुगतान आसान मासिक किश्तों में कर सकते हैं या कतिपय श्रेणियों के लिए इसे पूरी तरह माफ कर दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य PNG कनेक्शन लेने की शुरुआती लागत को कम करना है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग भी इस सुविधा का लाभ उठा सके।
इस योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए सरकार ने गैस वितरण कंपनियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि जहां भी पाइपलाइन नेटवर्क उपलब्ध है, वहां आवेदन के 48 घंटों के भीतर कनेक्शन प्रदान किया जाए। इसके लिए 'नेचुरल गैस एंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर, 2026' के तहत एक समयबद्ध ढांचा तैयार किया गया है। यदि किसी हाउसिंग सोसाइटी या रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में पाइपलाइन बिछाने के लिए अनुमति की आवश्यकता होती है, तो संबंधित अधिकारियों या प्रबंधन समितियों को तीन कार्य दिवसों के भीतर मंजूरी देना अनिवार्य कर दिया गया है। यह प्रशासनिक सुधार यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि बुनियादी ढांचे की उपलब्धता के बावजूद कोई भी परिवार केवल कागजी कार्रवाई की देरी के कारण स्वच्छ ईंधन से वंचित न रहे।
इनसेट: सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन क्षेत्रों में PNG की पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है और वहां कनेक्शन उपलब्ध है, वहां के परिवारों को अगले तीन महीनों के भीतर PNG पर स्विच करना होगा। ऐसा न करने पर उन क्षेत्रों में LPG सिलेंडर की आपूर्ति चरणबद्ध तरीके से बंद की जा सकती है, हालांकि तकनीकी रूप से असमर्थ घरों के लिए विशेष प्रावधान रखे गए हैं।
PNG को बढ़ावा देने के पीछे एक बड़ा कारण इसकी सुरक्षा और निरंतरता भी है। LPG की तुलना में PNG को अधिक सुरक्षित माना जाता है क्योंकि यह हवा से हल्की होती है और रिसाव की स्थिति में तेजी से वातावरण में घुल जाती है, जिससे आग लगने का खतरा न्यूनतम हो जाता है। इसके अलावा, PNG का उपयोग करने वाले परिवारों को सिलेंडर खत्म होने या रिफिलिंग के लिए बुकिंग करने की चिंता नहीं करनी पड़ती। यह सुविधा 24 घंटे बिना किसी रुकावट के उपलब्ध रहती है। सरकार का तर्क है कि PNG न केवल उपभोक्ता के लिए सुविधाजनक है, बल्कि यह देश के आयात बिल को कम करने और पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी सहायक है क्योंकि यह LPG के मुकाबले अधिक स्वच्छ दहन प्रदान करती है।
वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए भी सरकार ने इसी तरह के प्रोत्साहन मॉडल तैयार किए हैं। होटल, रेस्तरां, अस्पतालों और छात्रावासों जैसे संस्थानों को PNG अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सुरक्षा जमा राशि में रू.1 लाख से रू.5 लाख तक की छूट दी जा रही है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां सड़क बहाली शुल्क और अन्य स्थानीय करों के कारण पाइपलाइन बिछाना महंगा होता था, वहां केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से इन शुल्कों को माफ करने का अनुरोध किया है। अतिरिक्त प्रोत्साहन के रूप में, उन राज्यों को कमर्शियल LPG के कोटे में 10% से 20% तक की अतिरिक्त वृद्धि दी जा रही है जो PNG विस्तार के लिए आवश्यक सुधारों को तेजी से लागू कर रहे हैं।
तकनीकी विकास और डिजिटल इंडिया के समावेश के साथ, अब PNG कनेक्शन के लिए आवेदन करना भी बेहद आसान हो गया है। उपभोक्ता गैस कंपनियों के मोबाइल ऐप, वेबसाइट या टोल-फ्री नंबर के माध्यम से घर बैठे पंजीकरण कर सकते हैं। सरकार ने आधार ई-केवाईसी (e-KYC) को अनिवार्य कर दिया है ताकि सब्सिडी और प्रोत्साहनों का लाभ सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे। इसके अलावा, PNG के उपयोग की निगरानी के लिए अब स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को केवल उतनी ही राशि का भुगतान करना होगा जितनी गैस उन्होंने वास्तव में उपयोग की है। यह पारदर्शिता उपभोक्ताओं के विश्वास को बढ़ाने में एक मील का पत्थर साबित हो रही है, जिससे गैस चोरी और कालाबाजारी जैसी समस्याओं पर भी लगाम लगेगी।
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