Special Report : दिल्ली के खानपुर और महरौली में ड्रग्स का 'नाइजीरियन सिंडिकेट': 8 महीनों में 65 गिरफ्तारियां, रिहायशी इलाकों में फैला मौत का जाल।

दक्षिण दिल्ली के महरौली और खानपुर जैसे इलाकों में पिछले कुछ महीनों से दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने नशे के सौदागरों के खिलाफ एक

Mar 27, 2026 - 12:19
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Special Report : दिल्ली के खानपुर और महरौली में ड्रग्स का 'नाइजीरियन सिंडिकेट': 8 महीनों में 65 गिरफ्तारियां, रिहायशी इलाकों में फैला मौत का जाल।
दिल्ली के खानपुर और महरौली में ड्रग्स का 'नाइजीरियन सिंडिकेट': 8 महीनों में 65 गिरफ्तारियां, रिहायशी इलाकों में फैला मौत का जाल।
  • फर्जी वीजा और जाली स्टैंप का काला साम्राज्य: अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों ने दक्षिण दिल्ली को बनाया नशे का अड्डा, पुलिस ने तोड़ी कमर
  • खानपुर से महरौली तक 'सफेद जहर' की सप्लाई चेन: 65 नाइजीरियाई नागरिक पुलिस के हत्थे चढ़े, हाई-प्रोफाइल ड्रग्स की बरामदगी से मचा हड़कंप

दक्षिण दिल्ली के महरौली और खानपुर जैसे इलाकों में पिछले कुछ महीनों से दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने नशे के सौदागरों के खिलाफ एक निर्णायक जंग छेड़ रखी है। पिछले 8 महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस क्षेत्र से लगभग 65 नाइजीरियाई नागरिकों को मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध रूप से रहने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह आंकड़ा डराने वाला है क्योंकि यह केवल एक सीमित क्षेत्र में सक्रिय गिरोह की गहराई को दर्शाता है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि ये तस्कर बेहद शातिर तरीके से अपना नेटवर्क चलाते हैं। ये लोग अक्सर रिहायशी इमारतों में किराए पर कमरे लेते हैं और वहां से कोकीन, एमडीएमए (MDMA) और हेरोइन जैसी महंगी नशीली दवाओं का वितरण करते हैं। इनके निशाने पर मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर के कॉलेज छात्र और हाई-प्रोफाइल पार्टियों में जाने वाले लोग होते हैं।

तस्करी के इस खेल में सबसे चौंकाने वाला पहलू 'दस्तावेजी धोखाधड़ी' का है। पुलिस को छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकली रबर स्टैंप, फर्जी वीजा पेपर और जाली पासपोर्ट बरामद हुए हैं। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इनमें से अधिकांश नाइजीरियाई नागरिक भारत में बिजनेस या मेडिकल वीजा पर आए थे, लेकिन वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वे वापस नहीं गए। कानून से बचने के लिए इन लोगों ने फर्जी स्टैंप तैयार कर लिए हैं, जिनकी मदद से वे अपने पासपोर्ट पर 'एग्जिट' (निकासी) और 'री-एंट्री' (पुनः प्रवेश) की नकली मुहर लगा लेते हैं। इस तरह वे सुरक्षा एजेंसियों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि वे कानूनी रूप से भारत में रह रहे हैं। फर्जी दस्तावेजों का यह काला कारोबार महरौली की तंग गलियों से संचालित हो रहा है, जिससे उन्हें पहचान छुपाने में आसानी होती है।

महरौली और खानपुर की भौगोलिक स्थिति इन तस्करों के लिए वरदान साबित हो रही है। यहाँ की संकरी गलियां और घनी आबादी पुलिस के लिए छापेमारी को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। गिरफ्तार किए गए 65 नाइजीरियाई नागरिकों में से कई ऐसे हैं जो पहले भी नशीली दवाओं के मामलों में जेल जा चुके हैं। जेल से बाहर आने के बाद वे फिर से इसी धंधे में लग जाते हैं, लेकिन हर बार वे अपनी कार्यप्रणाली बदल लेते हैं। पुलिस ने पाया है कि ये लोग अब सीधे संपर्क के बजाय सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। ड्रग्स की डिलीवरी के लिए ये लोग अक्सर कैब ड्राइवरों या स्थानीय छोटे अपराधियों को मोहरा बनाते हैं, ताकि मुख्य सरगना तक पुलिस न पहुँच सके। दिल्ली पुलिस के अनुसार, महरौली और खानपुर के अलावा छतरपुर, देवली और संगम विहार जैसे इलाकों में भी इस सिंडिकेट की सक्रियता देखी गई है। इन इलाकों में किराए पर घर देने वाले मकान मालिकों के लिए अब सख्त हिदायत जारी की गई है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि यदि कोई मकान मालिक बिना पुलिस वेरिफिकेशन (सत्यापन) के किसी विदेशी नागरिक को कमरा देता है और वह अपराधी पाया जाता है, तो मकान मालिक के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस ड्रग नेटवर्क के तार अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े हुए हैं। पूछताछ के दौरान पकड़े गए आरोपियों ने खुलासा किया है कि वे नाइजीरिया में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर काम करते हैं। ड्रग्स की खेप अक्सर 'गिफ्ट पैक' या खिलौनों के भीतर छुपाकर कूरियर के जरिए भारत भेजी जाती है। दिल्ली पहुँचने के बाद, इसे छोटे-छोटे पैकेटों में बांटा जाता है और फिर स्थानीय पैडलर्स को सप्लाई किया जाता है। हालिया कार्रवाई में पुलिस ने करीब ₹5 करोड़ से अधिक मूल्य की कोकीन और एमडीएमए टैबलेट्स बरामद की हैं। यह बरामदगी इस बात का प्रमाण है कि दक्षिण दिल्ली का यह इलाका न केवल स्थानीय खपत का केंद्र है, बल्कि यहाँ से अन्य राज्यों जैसे पंजाब और हरियाणा में भी नशे की खेप भेजी जा रही है।

फर्जी वीजा और पासपोर्ट बनाने के लिए इन गिरोहों ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। हाई-क्वालिटी स्कैनर्स और प्रिंटर्स की मदद से ये लोग हूबहू असली जैसे दिखने वाले वीजा स्टिकर तैयार कर लेते हैं। कई बार ये लोग खुद को छात्र बताकर स्थानीय लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर उनके घरों को अपना ठिकाना बना लेते हैं। 8 माह में हुई 65 गिरफ्तारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह समस्या केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संगठित अपराध का रूप ले चुका है। पुलिस अब उन 'मास्टरमाइंड' की तलाश कर रही है जो इन नाइजीरियाई नागरिकों को लॉजिस्टिक सहायता और जाली दस्तावेज उपलब्ध कराते हैं।

इस समस्या से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने 'ऑपरेशन ईगल' जैसे विशेष अभियान शुरू किए हैं। इसके तहत संदिग्धों की पहचान के लिए तकनीकी निगरानी और मुखबिरों के जाल को मजबूत किया गया है। पुलिस ने जनता से भी अपील की है कि यदि उनके पड़ोस में किसी विदेशी नागरिक की गतिविधियां संदिग्ध लगती हैं या वे बिना किसी स्पष्ट आय के स्रोत के लग्जरी लाइफ जी रहे हैं, तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय थाने को दें। 65 नाइजीरियाई तस्करों की गिरफ्तारी एक बड़ी कामयाबी जरूर है, लेकिन खानपुर से महरौली तक फैले इस नेटवर्क की जड़ों को पूरी तरह खोदना अभी बाकी है। सुरक्षा एजेंसियां अब इन प्रवासियों के बैंक खातों और मनी लॉन्ड्रिंग के कोणों की भी जांच कर रही हैं।

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