उन्नाव गैंगरेप मामले में बड़ा फैसला- राउज एवेन्यू कोर्ट ने पीड़िता के वॉयस सैंपल की फॉरेंसिक जांच को दी मंजूरी।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्नाव गैंगरेप मामले से जुड़े एक अलग केस में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने पीड़िता के वॉयस सैंपल लेकर उसकी फॉरेंसिक
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्नाव गैंगरेप मामले से जुड़े एक अलग केस में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने पीड़िता के वॉयस सैंपल लेकर उसकी फॉरेंसिक जांच कराने की अनुमति दे दी है। यह आदेश आरोपी शुभम सिंह की ओर से दायर आवेदन पर दिया गया। शुभम सिंह, शशि सिंह का बेटा है, जिन्हें पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का करीबी बताया जाता है। स्पेशल जज (पीसी एक्ट) मुरारी प्रसाद सिंह ने पीड़िता का वॉयस सैंपल लेने और उसे सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (सीएफएसएल) भेजने का निर्देश दिया है। यह तुलना केस रिकॉर्ड का हिस्सा बन चुकी विवादित ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग्स से की जाएगी।
यह मामला जून 2017 में हुई कथित गैंगरेप की घटना से संबंधित है, जब पीड़िता नाबालिग थी। यह केस कुलदीप सिंह सेंगर द्वारा पीड़िता के साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामले से अलग है। आरोप है कि सेंगर द्वारा रेप किए जाने के एक सप्ताह बाद पीड़िता के साथ गैंगरेप किया गया। शुभम सिंह इस अलग गैंगरेप केस में आरोपी है। आवेदन में बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि पीड़िता ने गवाही में कुछ रिकॉर्डेड बातचीत में अपनी आवाज होने से इनकार किया है, जबकि ट्रायल के दौरान इन रिकॉर्डिंग्स पर भरोसा किया जा रहा है।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि इन विवादित रिकॉर्डिंग्स में पीड़िता कथित तौर पर कहती सुनाई देती है कि वह अपना घर स्वेच्छा से छोड़कर गई थी, जो आरोपी के लिए महत्वपूर्ण सबूत हो सकता है। बचाव पक्ष ने कहा कि फॉरेंसिक वॉयस एनालिसिस पीड़िता की गवाही की विश्वसनीयता जांचने के लिए जरूरी है और वैज्ञानिक जांच से इनकार करने से अदालत को महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ सबूत से वंचित रखा जाएगा। बचाव पक्ष ने आरोपी के निष्पक्ष ट्रायल के अधिकार पर जोर दिया और कहा कि सीएफएसएल द्वारा विशेषज्ञ वॉयस स्पेक्ट्रोग्राफिक एनालिसिस से रिकॉर्डिंग्स की प्रामाणिकता की स्वतंत्र जांच हो सकेगी।
कोर्ट ने कानूनी स्थिति और वॉयस सैंपलिंग तथा फॉरेंसिक तुलना से संबंधित न्यायिक मिसालों पर विचार करने के बाद आवेदन मंजूर किया। जज ने माना कि वैज्ञानिक जांच की अनुमति देने से सत्य की खोज में मदद मिलेगी और इससे अभियोजन पक्ष को कोई पूर्वाग्रह नहीं होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह अनुमति केवल न्यायिक प्रक्रिया को सहायता पहुंचाने के लिए दी जा रही है। आवेदन शुभम सिंह की ओर से अधिवक्ता अखंड प्रताप सिंह, समृद्धि डोभाल और हृत्विक मौर्या ने दायर किया था। दूसरे आरोपी नरेश तिवारी की ओर से अधिवक्ता हेमंत शाह पेश हुए।
यह मामला 2017 की उन्नाव घटना से जुड़ा है, जिसमें पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसे नौकरी के लालच में ले जाया गया और गैंगरेप किया गया। यह केस कुलदीप सिंह सेंगर के मुख्य रेप केस से अलग चल रहा है, जिसमें सेंगर को पहले ही सजा हो चुकी है। वर्तमान आवेदन इसी अलग गैंगरेप केस में विवादित रिकॉर्डिंग्स की जांच से संबंधित है। कोर्ट का यह आदेश ट्रायल को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है क्योंकि फॉरेंसिक रिपोर्ट से रिकॉर्डिंग्स की प्रामाणिकता स्पष्ट हो सकेगी।
उन्नाव मामला मूल रूप से 2017 में सामने आया था, जब पीड़िता नाबालिग थी। गैंगरेप का आरोप शुभम सिंह और अन्य पर लगा था। यह घटना सेंगर के रेप केस के बाद की बताई जाती है। शुभम सिंह शशि सिंह का बेटा है, जो सेंगर की करीबी रही हैं। कोर्ट ने वॉयस सैंपल की जांच को मंजूरी देकर बचाव पक्ष के तर्क को स्वीकार किया कि वैज्ञानिक सबूत ट्रायल में उपयोगी होंगे। सीएफएसएल को भेजी जाने वाली रिपोर्ट से ऑडियो-वीडियो की मैचिंग की जांच होगी। कोर्ट ने यह भी माना कि ऐसी जांच से ट्रायल की निष्पक्षता बनी रहेगी।
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