महराजगंज हादसा- गूगल मैप की गलती से कार निर्माणाधीन पुल पर लटकी, चालक बाल-बाल बचा। 

उत्तर प्रदेश के महराजगंज में गूगल मैप ने एक कार चालक को निर्माणाधीन फ्लाईओवर पर चढ़ा दिया, जिससे कार पुल के किनारे लटक गई....

Jun 10, 2025 - 13:28
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महराजगंज हादसा- गूगल मैप की गलती से कार निर्माणाधीन पुल पर लटकी, चालक बाल-बाल बचा। 

हाइलाइट्स:

  • हादसा गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-24) पर फरेंदा थाना क्षेत्र के भैया फरेंदा के पास रात 1 बजे हुआ।
  • अंधेरे और अपर्याप्त साइनेज के कारण चालक को अधूरे पुल का पता नहीं चला; समय रहते ब्रेक लगाने से बड़ा हादसा टला।
  • स्थानीय लोगों और पुलिस ने कार को क्रेन की मदद से निकाला; चालक सुरक्षित, लेकिन हादसे के बाद मौके से चला गया।
  • निर्माण एजेंसी की लापरवाही पर सवाल: फ्लाईओवर पर न बैरिकेडिंग थी, न ही डायवर्जन साइन।
  • गूगल मैप की गलत नेविगेशन पर उठे सवाल, पहले भी बरेली में इसी तरह के हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है।

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-24) पर रविवार देर रात एक खतरनाक हादसा होते-होते टल गया। एक कार चालक, जो गूगल मैप के सहारे लखनऊ से गोरखपुर की ओर जा रहा था, निर्माणाधीन फ्लाईओवर पर चढ़ गया और उसकी कार पुल के किनारे लटक गई। यह हादसा फरेंदा थाना क्षेत्र के भैया फरेंदा के पास 8 जून 2025 की रात करीब 1 बजे हुआ। गनीमत रही कि चालक ने समय रहते ब्रेक लगा दिया, जिससे कार नीचे गिरने से बच गई और कोई जनहानि नहीं हुई। इस घटना ने गूगल मैप की विश्वसनीयता और सड़क निर्माण एजेंसियों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 

घटना का मुख्य पात्र एक युवक था, जो लखनऊ से गोरखपुर की ओर अकेले कार से यात्रा कर रहा था। कार का मालिक हारीश सिद्दीकी, खोराबार थाना क्षेत्र के जंगल रामगढ़, गोरखपुर का निवासी बताया गया है, जो वर्तमान में लखनऊ के खुर्रमनगर में रहता है। रात का समय और अंधेरा होने के कारण चालक पूरी तरह गूगल मैप के नेविगेशन पर निर्भर था। गूगल मैप ने उसे भैया फरेंदा चौराहे पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर की ओर निर्देशित किया, जो अभी आधा-अधूरा है।

चालक ने जैसे ही फ्लाईओवर पर कार चढ़ाई, उसे अंधेरे में यह नहीं दिखा कि पुल का दूसरा सिरा अधूरा है। हेडलाइट की रोशनी में जब उसे रास्ता खत्म होने का एहसास हुआ, तब तक कार फ्लाईओवर के किनारे पहुंच चुकी थी। उसने तुरंत ब्रेक लगाया, जिससे कार नीचे गिरने से बच गई, लेकिन इसका अगला हिस्सा हवा में लटक गया। गनीमत रही कि पुल के नीचे गिट्टियां और मिट्टी का ढेर था, जिसके कारण कार बीच में अटक गई और पूरी तरह नीचे नहीं गिरी।

हादसे की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और देखा कि कार फ्लाईओवर के किनारे लटकी हुई है। चालक किसी तरह कार से बाहर निकला, लेकिन वह मौके पर नहीं रुका और बिना कोई जानकारी दिए वहां से चला गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। फरेंदा थानाध्यक्ष प्रशांत पाठक के नेतृत्व में पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। सुबह तक कार्यदायी संस्था ने क्रेन की मदद से कार को फ्लाईओवर से हटाया।

  • हादसे के कारण: गूगल मैप की गलती या प्रशासन की लापरवाही?

इस हादसे के लिए दो मुख्य कारण सामने आए हैं: गूगल मैप की गलत नेविगेशन और निर्माण एजेंसी की लापरवाही। गूगल मैप ने चालक को एक ऐसे रास्ते पर ले गया, जो अधूरा था और आवागमन के लिए बंद होना चाहिए था। जांच में यह भी सामने आया कि गूगल मैप में डायवर्जन की जानकारी थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं थी, जिसके कारण चालक भटक गया।

दूसरी ओर, स्थानीय लोगों और पुलिस ने निर्माण एजेंसी पीएनसी कंपनी की लापरवाही को प्रमुख कारण बताया। फ्लाईओवर पर न तो कोई बैरिकेडिंग थी, न ही डायवर्जन का संकेत, और न ही पर्याप्त साइन बोर्ड लगाए गए थे। भैया फरेंदा चौराहे पर गोरखपुर की ओर से फ्लाईओवर का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन सोनौली की ओर अभी काम चल रहा है। बावजूद इसके, निर्माण स्थल पर कोई स्पष्ट चेतावनी या अवरोधक नहीं लगाया गया था, जो इस तरह के हादसों को न्योता देता है।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस स्थान पर पहले भी छोटे-मोटे हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन और निर्माण एजेंसी ने कोई सबक नहीं लिया। हादसे के बाद सोमवार सुबह 11 बजे डिवाइडर और मिट्टी डालकर फ्लाईओवर के रास्ते को बंद किया गया, जो पहले करना चाहिए था।

  • पहले भी गूगल मैप के कारण हो चुके हैं हादसे

यह कोई पहला मामला नहीं है जब गूगल मैप की गलत नेविगेशन के कारण हादसा हुआ हो। पिछले साल नवंबर 2024 में बरेली के फरीदपुर थाना क्षेत्र में एक कार रामगंगा नदी पर बने अधूरे पुल से नीचे गिर गई थी, जिसमें तीन लोगों—विवेक कुमार, अमित, और कौशल कुमार—की मौत हो गई थी। उस मामले में भी गूगल मैप ने चालकों को अधूरे पुल का रास्ता दिखाया था, और वहां भी बैरिकेडिंग या साइन बोर्ड की कमी थी। इस हादसे के बाद बदायूं पुलिस ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के चार इंजीनियरों और गूगल मैप के क्षेत्रीय प्रबंधक के खिलाफ FIR दर्ज की थी।

इसी तरह, हाथरस और नैनीताल में भी गूगल मैप के गलत रास्ते दिखाने के कारण हादसे हो चुके हैं। इन घटनाओं ने गूगल मैप की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गूगल मैप सैटेलाइट डेटा और यूजर इनपुट पर आधारित होता है, लेकिन सड़कों और पुलों के निर्माण या बदलाव की जानकारी समय पर अपडेट न होने से इस तरह की घटनाएं होती हैं।

हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें कार फ्लाईओवर के किनारे लटकी हुई दिखाई दे रही है। X पर कई यूजर्स ने इस घटना पर टिप्पणी की। एक यूजर ने लिखा, "गूगल मैप अजब-गजब कारनामे कर रहा है। रात में इसका इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए।" एक अन्य यूजर ने स्थानीय प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा, "निर्माण एजेंसी ने कोई साइन बोर्ड क्यों नहीं लगाया? यह गूगल मैप की गलती से ज्यादा प्रशासन की नाकामी है।"

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लोगों ने गूगल मैप पर पूरी तरह निर्भर रहने के खतरों पर भी चर्चा शुरू की। एक यूजर ने सुझाव दिया, "रात में यात्रा करते समय गूगल मैप के साथ-साथ अपनी आंखें भी खुली रखें, वरना अंजाम खतरनाक हो सकता है।"

फरेंदा थानाध्यक्ष प्रशांत पाठक ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची थी। चालक को मामूली चोटें आई थीं, लेकिन वह मौके पर नहीं मिला। कार को हारीश सिद्दीकी के सुपुर्द कर दिया गया है। पुलिस ने कार्यदायी संस्था को निर्माण स्थल पर बैरिकेडिंग और साइन बोर्ड लगाने के निर्देश दिए हैं। मामले की जांच जारी है, और यह पता लगाया जा रहा है कि गूगल मैप ने गलत रास्ता क्यों दिखाया।

यह हादसा गूगल मैप जैसे जीपीएस नेविगेशन सिस्टम पर अंधविश्वास और सड़क निर्माण में लापरवाही के गंभीर परिणामों को दर्शाता है। हालांकि इस बार कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन बरेली जैसे पिछले हादसों ने दिखाया है कि ऐसी गलतियां जानलेवा हो सकती हैं। यह घटना यात्रियों के लिए एक चेतावनी है कि रात में यात्रा करते समय जीपीएस के साथ-साथ सड़क के संकेतों और आसपास के माहौल पर भी ध्यान देना जरूरी है।

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