छत्तीसगढ़ के दुर्ग में ‘राधे-राधे’ बोलने पर नर्सरी की बच्ची से प्राचार्या की मारपीट, गिरफ्तारी, हिंदू संगठनों का प्रदर्शन। 

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक निजी स्कूल की प्राचार्या द्वारा नर्सरी की साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। बच्ची ने कक्षा ...

Aug 1, 2025 - 12:37
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छत्तीसगढ़ के दुर्ग में ‘राधे-राधे’ बोलने पर नर्सरी की बच्ची से प्राचार्या की मारपीट, गिरफ्तारी, हिंदू संगठनों का प्रदर्शन। 
प्रतीकात्मक तस्वीर

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक निजी स्कूल की प्राचार्या द्वारा नर्सरी की साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। बच्ची ने कक्षा में ‘राधे-राधे’ बोलने पर प्राचार्या ने उसकी कलाई पर प्रहार किया और मुंह पर चिपकने वाली टेप चिपका दी। इस घटना ने स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों में आक्रोश पैदा कर दिया। बच्ची के पिता की शिकायत पर पुलिस ने प्राचार्या को गिरफ्तार कर लिया है, और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस घटना के विरोध में हिंदू संगठनों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया और कड़ी कार्रवाई की मांग की। यह घटना 31 जुलाई 2025 को दुर्ग के भिलाई क्षेत्र में हुई, जिसके बाद से यह मामला चर्चा में है।

घटना दुर्ग जिले के भिलाई में स्थित एक निजी स्कूल में हुई। बच्ची, जो नर्सरी कक्षा में पढ़ती है, ने कक्षा में ‘राधे-राधे’ कहकर अभिवादन किया। यह एक सामान्य धार्मिक अभिवादन है, जो राधा-कृष्ण की भक्ति को दर्शाता है। लेकिन प्राचार्या एला इव्हान कोल्विन ने इसे आपत्तिजनक माना और बच्ची को दंडित करने का फैसला किया। बच्ची के पिता के अनुसार, प्राचार्या ने बच्ची की कलाई पर जोर से मारा, जिससे उसे चोट आई। इसके बाद, उन्होंने बच्ची का मुंह बंद करने के लिए उसके चेहरे पर चिपकने वाली टेप चिपका दी, जिससे बच्ची डर गई और रोने लगी। बच्ची ने घर पहुंचकर अपने माता-पिता को यह बात बताई, जिसके बाद परिवार ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज की।

पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया और 31 जुलाई 2025 को ही प्राचार्या एला इव्हान कोल्विन को गिरफ्तार कर लिया। भिलाई नगर पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 506 (आपराधिक धमकी), और किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस अधीक्षक (SP) विजय अग्रवाल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में प्राचार्या की हरकत को अनुचित और अमानवीय पाया गया है। उन्होंने कहा कि बच्ची की उम्र और घटना की प्रकृति को देखते हुए मामले की गहन जांच की जा रही है। पुलिस ने स्कूल के अन्य कर्मचारियों और बच्चों से भी पूछताछ शुरू की है ताकि घटना की पूरी जानकारी मिल सके।

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग और हिंदू संगठन स्कूल के बाहर जमा हो गए। उन्होंने प्राचार्या के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल प्रशासन पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया और मांग की कि प्राचार्या को तुरंत बर्खास्त किया जाए। कुछ संगठनों ने स्कूल की मान्यता रद्द करने की भी मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे थे, और पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि मामले में निष्पक्ष जांच होगी।

बच्ची के पिता ने बताया कि उनकी बेटी इस घटना से बहुत डर गई है और स्कूल जाने से मना कर रही है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने केवल एक सामान्य धार्मिक अभिवादन किया था, जो उनके परिवार की आस्था का हिस्सा है। उन्होंने प्राचार्या के व्यवहार को क्रूर और असंवेदनशील बताया। परिवार ने मांग की है कि स्कूल प्रशासन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि उनकी बेटी को मानसिक आघात से उबरने में मदद मिले।

यह घटना सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है। कई लोगों ने इसकी निंदा करते हुए इसे बच्चों के साथ दुर्व्यवहार का गंभीर मामला बताया। कुछ यूजर्स ने लिखा कि स्कूल, जो बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान होना चाहिए, वहां इस तरह की घटनाएं चिंताजनक हैं। एक यूजर ने टिप्पणी की, “एक छोटी बच्ची को धार्मिक अभिवादन के लिए सजा देना अस्वीकार्य है। स्कूलों को बच्चों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।” वहीं, कुछ लोगों ने इस घटना को धार्मिक असहिष्णुता से जोड़ा और स्कूल प्रशासन से जवाबदेही की मांग की।

शिक्षा विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना पर चिंता जताई है। बाल अधिकार कार्यकर्ता अनीता वर्मा ने कहा कि बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार न केवल उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उनके शिक्षा के प्रति रवैये को भी नकारात्मक बनाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए संवेदनशीलता प्रशिक्षण (sensitivity training) अनिवार्य किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की सुरक्षा और सम्मान स्कूलों की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

दुर्ग जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की है। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। DEO ने कहा कि यदि स्कूल प्रशासन की ओर से कोई लापरवाही पाई गई, तो स्कूल के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को स्कूल में होने वाली किसी भी असामान्य घटना के बारे में तुरंत सूचित करें।

यह घटना छत्तीसगढ़ में बच्चों के साथ स्कूलों में होने वाले दुर्व्यवहार के मामलों को फिर से सामने लाती है। हाल के वर्षों में, राज्य में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां शिक्षकों या स्कूल कर्मचारियों द्वारा बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार की शिकायतें मिली हैं। उदाहरण के लिए, 2023 में रायपुर के एक स्कूल में एक शिक्षक पर छात्र को थप्पड़ मारने का आरोप लगा था, जिसके बाद शिक्षक को निलंबित किया गया था। इन घटनाओं ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर सवाल उठाए हैं।

हिंदू संगठनों ने इस मामले को धार्मिक असहिष्णुता का मुद्दा बनाते हुए सरकार से स्कूलों में धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग की है। एक संगठन के प्रतिनिधि ने कहा कि बच्चों को उनकी धार्मिक आस्था के लिए दंडित करना गलत है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने मांग की कि स्कूलों में धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

पुलिस ने प्राचार्या को कोर्ट में पेश किया, जहां उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या प्राचार्या का यह व्यवहार अन्य बच्चों के साथ भी हुआ है। स्कूल प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, स्कूल ने प्राचार्या को निलंबित करने का फैसला किया है।

दुर्ग के भिलाई में नर्सरी की बच्ची के साथ प्राचार्या द्वारा की गई मारपीट की घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों को फिर से सामने ला दिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्राचार्या को गिरफ्तार कर लिया है, और मामला दर्ज किया गया है। हिंदू संगठनों के प्रदर्शन और जनता के आक्रोश ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।

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