आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर लूट- फर्जी IAS के रसूख ने यात्रियों को ठगा, फर्जी SDM- IAS का नियुक्ति पत्र दिखाया, दो गिरफ्तार।
Agra-Lucknow Expressway - Fake IAS: आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हाल ही में एक सनसनीखेज लूट का मामला सामने आया है, जिसमें दो लोग फर्जी IAS अधिकारी बनकर यात्रियों को लूट...
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हाल ही में एक सनसनीखेज लूट का मामला सामने आया है, जिसमें दो लोग फर्जी IAS अधिकारी बनकर यात्रियों को लूट रहे थे। ये लोग ब्ला-ब्ला कार ऐप के जरिए बुकिंग कर यात्रियों को अपनी गाड़ी में बिठाते थे और फिर हथियारों के दम पर लूटपाट करते थे। एक आरोपी खुद को शामली का SDM बताता था और फर्जी नियुक्ति पत्र दिखाकर लोगों को भरोसे में लेता था। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से अवैध हथियार, फर्जी दस्तावेज और लूटा गया सामान बरामद किया गया है।
यह मामला इटावा जिले के सैफई थाना क्षेत्र का है। 11 जुलाई 2025 को आजमगढ़ के एक यात्री रामप्रवेश ने ब्ला-ब्ला कार ऐप के जरिए लखनऊ से यात्रा के लिए एक स्कॉर्पियो गाड़ी बुक की थी। गाड़ी में सवार होने के बाद, चालक और उसके साथी ने हथियारों के बल पर यात्री से नकदी, गहने और अन्य कीमती सामान लूट लिया। गाड़ी पर मजिस्ट्रेट की नेमप्लेट लगी थी, जिससे यात्री को भरोसा हो गया कि चालक कोई वरिष्ठ अधिकारी है। आरोपी अमर पांडे ने खुद को शामली का SDM बताया और एक फर्जी IAS नियुक्ति पत्र दिखाया। लूट के बाद यात्री को सुनसान जगह पर छोड़ दिया गया।
पीड़ित यात्री ने तुरंत गश्त कर रही पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए गाड़ी का पीछा किया और उसे बरामद कर लिया। कुछ देर बाद एक युवक गाड़ी लेने वापस आया और उसने खुद को SDM बताकर वही फर्जी नियुक्ति पत्र दिखाया। पुलिस को शक हुआ और पीड़ित यात्री से उसकी पहचान कराई गई। यात्री ने दोनों आरोपियों को तुरंत पहचान लिया। इसके बाद पुलिस ने अमर पांडे और उसके साथी रामाधीन को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी अमर पांडे और उसका साथी रामाधीन संगठित तरीके से लूट की वारदात को अंजाम देते थे। अमर पांडे ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे, जिसमें एक IAS अधिकारी का नियुक्ति पत्र शामिल था। वह खुद को शामली का SDM बताता था और अपनी गाड़ी पर मजिस्ट्रेट की नेमप्लेट लगाकर यात्रियों को भरोसे में लेता था। दोनों आरोपी ब्ला-ब्ला कार ऐप का इस्तेमाल करते थे, जो साझा यात्रा के लिए एक लोकप्रिय प्लेटफॉर्म है। वे लखनऊ के चारबाग इलाके से यात्रियों को अपनी गाड़ी में बिठाते और फिर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के सुनसान हिस्सों में लूटपाट करते थे।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से एक अवैध तमंचा, कारतूस, फर्जी दस्तावेज और लूटा गया सामान बरामद हुआ है। इनमें नकदी, मोबाइल फोन और कुछ गहने शामिल हैं। इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि यह एक सुनियोजित अपराध था। आरोपी फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतते थे और फिर हथियारों के बल पर लूटपाट करते थे।
सैफई थाना पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई शुरू की। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 392 (लूट), 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग) के साथ-साथ आर्म्स एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया और उनसे पूछताछ शुरू कर दी। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या ये आरोपी पहले भी इस तरह की वारदातों में शामिल रहे हैं।
पुलिस को संदेह है कि अमर पांडे और रामाधीन ने अन्य यात्रियों को भी निशाना बनाया होगा। उनके मोबाइल फोन और ब्ला-ब्ला कार ऐप के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है ताकि अन्य पीड़ितों का पता लगाया जा सके। पुलिस ने ब्ला-ब्ला कार ऐप के अधिकारियों से भी संपर्क किया है ताकि आरोपियों की बुकिंग हिस्ट्री और अन्य जानकारियां प्राप्त की जा सकें।
यह घटना ऑनलाइन राइड-शेयरिंग प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग का एक गंभीर उदाहरण है। ब्ला-ब्ला कार जैसे ऐप यात्रियों को किफायती और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प प्रदान करते हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं इनके सुरक्षित उपयोग पर सवाल उठाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे प्लेटफॉर्म्स को ड्राइवरों की पृष्ठभूमि और दस्तावेजों की गहन जांच करनी चाहिए। साथ ही, यात्रियों को भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गाड़ी के बारे में तुरंत पुलिस को सूचित करने की जरूरत है।
इस घटना ने एक बार फिर फर्जी पहचान और धोखाधड़ी के मामलों पर ध्यान खींचा है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख मार्ग है, जो यात्रियों और पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। इस तरह की घटनाएं न केवल यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं, बल्कि क्षेत्र की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं। स्थानीय लोग और व्यापारी संगठनों ने मांग की है कि एक्सप्रेसवे पर गश्त बढ़ाई जाए और राइड-शेयरिंग ऐप्स पर सख्त निगरानी रखी जाए।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अधिकारी की पहचान का दावा करने वाले व्यक्ति से सावधान रहें और उनके दस्तावेजों की जांच करें। साथ ही, यात्रा के दौरान हमेशा अपने परिजनों या दोस्तों को अपनी लोकेशन और गाड़ी की जानकारी साझा करने की सलाह दी गई है।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुई इस लूट की घटना ने फर्जी पहचान और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग की गंभीर समस्या को उजागर किया है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने पीड़ित को तुरंत राहत दी और अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया। यह घटना हमें सिखाती है कि डिजिटल युग में सतर्कता और जागरूकता कितनी जरूरी है। यात्रियों को चाहिए कि वे राइड-शेयरिंग ऐप्स का उपयोग करते समय सावधानी बरतें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें। इस मामले की गहन जांच से उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
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