स्टारलिंक ने भारत में पहला कदम रखा: मुंबई ऑफिस के साथ सैटेलाइट इंटरनेट का डेमो ट्रायल शुरू, 2026 तक लॉन्च की उम्मीद। 

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के स्वामित्व वाली स्टारलिंक ने भारत में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 29 अक्टूबर 2025 को कंपनी ने मुंबई के चंदिवली

Oct 30, 2025 - 14:02
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स्टारलिंक ने भारत में पहला कदम रखा: मुंबई ऑफिस के साथ सैटेलाइट इंटरनेट का डेमो ट्रायल शुरू, 2026 तक लॉन्च की उम्मीद। 
स्टारलिंक ने भारत में पहला कदम रखा: मुंबई ऑफिस के साथ सैटेलाइट इंटरनेट का डेमो ट्रायल शुरू, 2026 तक लॉन्च की उम्मीद। 

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के स्वामित्व वाली स्टारलिंक ने भारत में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 29 अक्टूबर 2025 को कंपनी ने मुंबई के चंदिवली इलाके में पहला ऑफिस लीज पर लिया, जो उसके भारत अभियान का प्रतीक है। इसी के साथ, 30 और 31 अक्टूबर को मुंबई में सैटेलाइट इंटरनेट के तकनीकी और सुरक्षा डेमो ट्रायल शुरू हो रहे हैं। ये ट्रायल्स भारतीय अधिकारियों, उद्योग प्रतिनिधियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने होंगे, जहां कंपनी अपनी हाई-स्पीड इंटरनेट तकनीक की विश्वसनीयता और सुरक्षा का प्रदर्शन करेगी। स्टारलिंक का लक्ष्य ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में तेज इंटरनेट पहुंचाना है, जहां पारंपरिक नेटवर्क कमजोर हैं। ये ट्रायल्स वाणिज्यिक लॉन्च से पहले अनिवार्य हैं, और सफल होने पर 2026 तक सेवाएं शुरू हो सकती हैं। यह कदम भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजार में स्टारलिंक की महत्वाकांक्षी शुरुआत का संकेत देता है।

स्टारलिंक का भारत आगमन लंबे इंतजार के बाद हो रहा है। कंपनी ने जून 2025 में ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (जीएमपीसीएस) लाइसेंस हासिल किया, जो रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के बाद तीसरा ऐसा लाइसेंस है। इससे पहले, 2021 में स्टारलिंक ने बिना मंजूरी के प्री-ऑर्डर लेने की कोशिश की थी, जिसके कारण सरकार ने रिफंड का आदेश दिया था। अब, सभी सुरक्षा शर्तें पूरी करने के बाद कंपनी आगे बढ़ रही है। मुंबई ऑफिस का लीज एग्रीमेंट 14 अक्टूबर 2025 से पांच साल के लिए है। चंदिवली के बूमरैंग कमर्शियल बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर 1,294 वर्ग फुट जगह ली गई है। मासिक किराया 3.52 लाख रुपये है, जिसमें हर साल 5 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान है। सिक्योरिटी डिपॉजिट 31.70 लाख रुपये का है। यह ऑफिस कंपनी के भारत संचालन का केंद्र बनेगा, जहां से ट्रायल्स और भविष्य की गतिविधियां संचालित होंगी।

ट्रायल्स का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पालन दिखाना है। स्टारलिंक को टेलीकॉम डिपार्टमेंट (डीओटी) से अस्थायी स्पेक्ट्रम आवंटन मिला है, जिसके तहत ये डेमो चलेंगे। मुंबई में गेटवे स्टेशन पर ये टेस्ट होंगे, जहां कंपनी दिखाएगी कि डेटा केवल भारत में ही स्टोर और रूट होगा। नियमों के अनुसार, कोई डेटा कॉपी, डिक्रिप्ट या विदेश भेजा नहीं जा सकता। कानून प्रवर्तन एजेंसियां निगरानी करेंगी। स्टारलिंक ने 100 सैटेलाइट टर्मिनल्स इंपोर्ट करने की अनुमति ली है, लेकिन ये केवल टेस्टिंग के लिए हैं, वाणिज्यिक उपयोग नहीं। कंपनी ने 600 गीगाबिट प्रति सेकंड की बैंडविड्थ मांगी है, जो जेन 1 सैटेलाइट कांस्ट्रिलेशन पर आधारित है। ये ट्रायल्स सफल होने पर फाइनल स्पेक्ट्रम आवंटन और लॉन्च की राह खुलेगी।

भारत में स्टारलिंक की योजना व्यापक है। कंपनी नौ से दस गेटवे अर्थ स्टेशनों की स्थापना कर रही है, जो मुंबई, नोएडा, चेन्नई, चंडीगढ़, कोलकाता और लखनऊ जैसे शहरों में होंगे। ये स्टेशन लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) सैटेलाइट्स को जमीन से जोड़ेंगे। मुंबई को मुख्य हब बनाया गया है, जहां तीन ग्राउंड स्टेशन पहले से तैयार हैं। स्टारलिंक ने इक्विनिक्स जैसी कंपनियों से आउटसोर्सिंग की है। कंपनी ने जियो, एयरटेल और टाटा कम्युनिकेशंस के साथ बातचीत की है, ताकि वितरण और मार्केटिंग में साझेदारी हो। जियो ने स्पेसएक्स के साथ एग्रीमेंट साइन किया है, जिससे स्टारलिंक हार्डवेयर जियो स्टोर्स पर उपलब्ध होगा। एयरटेल भी ग्रामीण कनेक्टिविटी के लिए सहयोग करेगी। ये पार्टनरशिप्स स्टारलिंक को तेजी से फैलाने में मदद करेंगी।

स्टारलिंक की तकनीक क्रांतिकारी है। यह 5,000 से ज्यादा एलईओ सैटेलाइट्स का नेटवर्क इस्तेमाल करती है, जो पारंपरिक जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट्स से अलग हैं। एलईओ सैटेलाइट्स कम ऊंचाई पर होते हैं, इसलिए लेटेंसी कम (20-40 मिलीसेकंड) और स्पीड हाई (100-200 एमबीपीएस) मिलती है। भारत जैसे देश में, जहां 97 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच सीमित है, यह गेम चेंजर साबित हो सकती है। स्टारलिंक दूरदराज के गांवों, पहाड़ों और समुद्री इलाकों में ब्रॉडबैंड लाएगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, ई-कॉमर्स और रिमोट वर्क को बढ़ावा मिलेगा। कंपनी का दावा है कि यह किफायती होगा, लेकिन प्राइसिंग पर ट्राई ने अभी फैसला नहीं लिया। ट्राई ने 4 प्रतिशत एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) चार्ज सुझाया है, लेकिन अर्बन और रूरल के लिए अलग फीस पर चर्चा जारी है।

भारतीय सरकार का स्टारलिंक को स्वागत है। संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत 'टेरेस्ट्रियल, फाइबर और सैटेलाइट' का मिश्रण चाहता है। उन्होंने स्पेसएक्स की प्रेसिडेंट ग्विन शॉटवेल से मुलाकात की और लाइसेंस की पुष्टि की। इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 में स्टारलिंक के इंडिया मार्केट एक्सेस डायरेक्टर पर्निल उर्ध्वरेशे ने कहा कि कंपनी सुरक्षित और हाई-क्वालिटी सर्विस लाने को उत्साहित है। सरकार ने 17 ग्राउंड स्टेशन साइट्स फाइनल की हैं। लेकिन चुनौतियां हैं। स्पेक्ट्रम प्राइसिंग पर ट्राई और डीसीसी चर्चा कर रहे हैं। स्टारलिंक को विदेशी एक्सपर्ट्स के लिए सिक्योरिटी क्लीयरेंस चाहिए। केवल भारतीय नागरिक ही गेटवे ऑपरेट करेंगे। डेटा लोकल रहना जरूरी है। इन शर्तों का पालन स्टारलिंक कर रही है।

स्टारलिंक का भारत आगमन टेलीकॉम बाजार को हिला देगा। रिलायंस जियो और एयरटेल अपनी सैटेलाइट सर्विसेज- जियो-एसईएस और वनवेब- लॉन्च करने की तैयारी में हैं। स्टारलिंक की 10 गेटवे प्लान्स प्रतिद्वंद्वियों से तीन गुना ज्यादा हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह प्रतिस्पर्धा उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद होगी। कीमतें कम होंगी, कवरेज बढ़ेगा। भारत दुनिया का सबसे बड़ा इंटरनेट मार्केट है, जहां 5जी रोलआउट हो रहा है। लेकिन सैटेलाइट ब्रॉडबैंड पूरक बनेगा। स्टारलिंक ने 125 देशों में काम शुरू किया है। भारत में 2026 लॉन्च से पहले 500 करोड़ का निवेश हो सकता है। कंपनी डेटा सेंटर, आईएक्सपी और फाइबर पार्टनर्स से बात कर रही है। डी-सीआईएक्स और एक्सट्रीम आईएक्सपी ने कनेक्शन कन्फर्म किया।

स्टारलिंक की शुरुआत भारत की स्पेस इकॉनमी को बूस्ट देगी। सरकार स्पेस सेक्टर को खोल रही है। इन-स्पेस और डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस ने अप्रूवल दिए। स्टारलिंक डायरेक्ट-टू-सेल कनेक्टिविटी पर फोकस करेगी। ग्रामीण भारत के 50 करोड़ लोग इससे जुड़ सकेंगे। शिक्षा में ऑनलाइन क्लासेस, स्वास्थ्य में टेलीमेडिसिन, किसानों के लिए मौसम अपडेट्स संभव होंगे। लेकिन साइबर सिक्योरिटी चिंता है। सरकार ने सख्त नियम बनाए हैं। स्टारलिंक का मुंबई ट्रायल सफल रहा तो रोडमैप साफ हो जाएगा। एलन मस्क ने भारत को महत्वपूर्ण बाजार माना है। टेस्ला के बाद स्टारलिंक दूसरा बड़ा कदम।

मुंबई ट्रायल्स से स्टारलिंक की राह आसान होगी। कंपनी ने 100 टर्मिनल्स इंपोर्ट किए। ये फिक्स्ड सैटेलाइट सर्विसेज के टेस्ट के लिए हैं। ट्रायल्स में लॉफुल इंटरसेप्शन सिस्टम चेक होगा। डेटा शेयरिंग और मॉनिटरिंग दिखाई जाएगी। सफलता पर कमर्शियल रोलआउट 2026 में। स्टारलिंक भारत में 1.2 अरब टेलीफोन कनेक्शंस और 97 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर्स को टारगेट करेगी। यह डिजिटल इंडिया को मजबूत करेगा। लेकिन स्पेक्ट्रम फीस पर फैसला बाकी। ट्राई ने शहरी ग्राहकों के लिए अलग चार्ज सुझाया। डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन फैसला लेगा।

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