चैत्र नवरात्रि 2026 की सही तिथि: 26 या 27 मार्च, जानें, कब होगा समापन और कन्या पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त?

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी दिन से हिंदू नववर्ष यानी नव संवत्सर का आरंभ भी होता है। साल 2026 में चैत्र

Mar 17, 2026 - 13:54
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चैत्र नवरात्रि 2026 की सही तिथि: 26 या 27 मार्च, जानें, कब होगा समापन और कन्या पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त?
चैत्र नवरात्रि 2026 की सही तिथि: 26 या 27 मार्च, जानें, कब होगा समापन और कन्या पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त?
  • नवरात्रि के दिनों का रहस्य: इस बार 8 दिन की पूजा होगी या पूरे 9? तिथियों के फेर में उलझने के बजाय यहाँ समझें पंचांग का गणित।
  • राम नवमी और व्रत पारण का शुभ समय: चैत्र नवरात्रि 2026 की पूर्ण कैलेंडर सूची और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की साधना विधि।

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी दिन से हिंदू नववर्ष यानी नव संवत्सर का आरंभ भी होता है। साल 2026 में चैत्र नवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं के बीच तिथियों के गणित को लेकर कुछ संशय की स्थिति बनी हुई है। पंचांग की गणना के अनुसार, इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च 2026, गुरुवार से हो रहा है। देवी पक्ष की शुरुआत के साथ ही कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह से ही प्रभावी हो जाएगा। भक्त इस उलझन में हैं कि इस बार नवरात्र आठ दिन के होंगे या पूरे नौ दिन के। पंचांग के अनुसार, इस बार सभी तिथियां अपने निर्धारित क्रम में आ रही हैं, जिसके कारण भक्तों को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए पूरे नौ दिन का समय मिलेगा।

तिथियों के विस्तार को समझने के लिए पंचांग का सूक्ष्म विश्लेषण आवश्यक है। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सूर्योदय के साथ ही मान्य होगी, जिससे प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। इसके बाद द्वितीया से लेकर सप्तमी तिथि तक का क्रम बिना किसी क्षय के जारी रहेगा। विशेष रूप से अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर चर्चाएं तेज हैं। वैदिक गणना के अनुसार, महाअष्टमी का व्रत 26 मार्च 2026 को रखा जाएगा। इस दिन मां महागौरी की पूजा का विधान है और कई घरों में इसी दिन कुलदेवी का पूजन और कन्या भोज भी कराया जाता है। वहीं, महानवमी और राम जन्मोत्सव यानी राम नवमी का पर्व 27 मार्च 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा, जो इस पर्व का अंतिम दिन होगा।

इस साल नवरात्रि के दिनों की संख्या को लेकर जो भ्रम है, उसका मुख्य कारण अष्टमी और नवमी तिथि के लगने का समय है। कुछ पंचांगों के अनुसार अष्टमी तिथि 26 मार्च की सुबह समाप्त हो रही है और उसके तुरंत बाद नवमी लग रही है, जिसके कारण लोग इसे आठ दिन की नवरात्रि मान रहे हैं। हालांकि, उदयातिथि के सिद्धांत को मानने वाले विद्वानों का कहना है कि चूंकि 27 मार्च को सूर्योदय के समय नवमी तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए महानवमी का पूजन और व्रत का पारण 27 मार्च को ही करना शास्त्रसम्मत होगा। इस प्रकार, व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह पूरे नौ दिनों का अनुष्ठान होगा, जिसमें नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ समापन होगा। चैत्र नवरात्रि 2026 में घटस्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त 19 मार्च को सुबह 06:52 से 07:43 के बीच रहेगा। यदि कोई इस समय चूक जाता है, तो वह अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:05 से 12:53 के बीच भी कलश स्थापित कर सकता है। इस बार मां दुर्गा का आगमन 'डोली' पर हो रहा है, जिसे शास्त्रों में मिले-जुले परिणामों का संकेत माना जाता है।

धार्मिक दृष्टि से इन नौ दिनों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इस दौरान साधक अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने का प्रयास करते हैं। पहले दिन से लेकर नौवें दिन तक, देवी के अलग-अलग रंग और भोग निर्धारित हैं। जैसे 19 मार्च को पीले रंग के साथ मां शैलपुत्री की पूजा होगी, तो वहीं 27 मार्च को बैंगनी रंग के साथ मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाएगी। कन्या पूजन के लिए इस बार 26 मार्च की दोपहर के बाद और 27 मार्च की सुबह का समय अत्यंत फलदायी बताया गया है। जो लोग नवमी तिथि को कन्या पूजन करते हैं, उनके लिए 27 मार्च का दिन सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्मोत्सव भी उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

राम नवमी का पर्व 27 मार्च को मनाए जाने के पीछे का तर्क यह है कि नवमी तिथि 26 मार्च की दोपहर 11:51 बजे शुरू होगी और 27 मार्च की सुबह 10:09 बजे समाप्त होगी। हिंदू परंपरा में त्योहार उसी दिन मनाया जाता है जिस दिन वह तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो। इसलिए, राम जन्म का उत्सव और नवरात्रि का पारण 27 मार्च, शुक्रवार को ही होगा। यह दिन उन भक्तों के लिए बहुत खास है जो पूरे नौ दिनों का उपवास रखते हैं। नवमी के दिन हवन और कन्या पूजन के पश्चात ही व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इस साल किसी भी तिथि के घटने या बढ़ने का बड़ा प्रभाव नहीं दिख रहा है, इसलिए पूजा की पूर्णता पूरे नौ दिनों में ही मानी जाएगी।

नवरात्रि के दौरान खरमास की उपस्थिति भी एक विचारणीय बिंदु है। चूंकि सूर्य देव इस समय मीन राशि में गोचर कर रहे होते हैं, इसलिए इस अवधि में विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। हालांकि, देवी की उपासना, मंत्र साधना और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के लिए यह समय अत्यंत शुभ होता है। भक्त बिना किसी संशय के मां दुर्गा की सेवा कर सकते हैं। पंचांग के इस दुर्लभ संयोग में माता की विदाई 'हाथी' पर होगी, जिसे कृषि और सुख-समृद्धि के लिए बहुत शुभ माना जाता है। यह संकेत देता है कि आगामी वर्ष देश के लिए आर्थिक और सामाजिक रूप से उन्नति लेकर आएगा। चैत्र नवरात्रि 2026 का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगा। 26 मार्च को महाअष्टमी और 27 मार्च को महानवमी व राम नवमी मनाई जाएगी। भक्तों को अपनी उलझन दूर करते हुए 27 मार्च तक मां की भक्ति में लीन रहना चाहिए। पारण के लिए 27 मार्च की सुबह नवमी तिथि समाप्त होने के बाद का समय सबसे उपयुक्त है। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई यह नौ दिनों की साधना जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी और हिंदू नववर्ष का स्वागत खुशहाली के साथ होगा।

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