29 जून 2025 को भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें: वैश्विक और स्थानीय कारकों के बीच स्थिरता
ये कीमतें भारतीय ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL), और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) जैसे तेल विपणन कंपनियों....
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रोजमर्रा की जिंदगी और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। 29 जून 2025 को देश के प्रमुख शहरों में इनकी कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव देखा गया, जो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों, रुपये-डॉलर विनिमय दर, और स्थानीय करों पर निर्भर करता है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹94.72 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹87.62 प्रति लीटर रही, जबकि अन्य शहरों जैसे मुंबई, चेन्नई, और कोलकाता में कीमतें अलग-अलग थीं।
- 29 जून 2025 को पेट्रोल और डीजल की कीमतें
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें हर दिन सुबह 6 बजे संशोधित की जाती हैं, जिसे डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग कहा जाता है। यह प्रणाली जून 2017 से लागू है, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और बाजार की अस्थिरता को कम करना है। 29 जून 2025 को प्रमुख शहरों में कीमतें निम्नलिखित थीं:
पेट्रोल (प्रति लीटर):
दिल्ली: ₹94.72
मुंबई: ₹103.50
चेन्नई: ₹100.80
कोलकाता: ₹105.41
बेंगलुरु: ₹102.92
हैदराबाद: ₹107.46
अहमदाबाद: ₹94.48
लखनऊ: ₹94.61
डीजल (प्रति लीटर):
दिल्ली: ₹87.62
मुंबई: ₹90.03
चेन्नई: ₹92.43
कोलकाता: ₹90.76
बेंगलुरु: ₹90.99
हैदराबाद: ₹95.70
अहमदाबाद: ₹90.14
लखनऊ: ₹87.52
ये कीमतें भारतीय ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL), और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) जैसे तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा निर्धारित की गई हैं। कीमतों में अंतर मुख्य रूप से राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए वैल्यू एडेड टैक्स (VAT), परिवहन लागत, और डीलर कमीशन के कारण होता है।
- कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण
पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई कारकों से प्रभावित होती हैं, जिनमें वैश्विक और स्थानीय स्तर के आर्थिक और भू-राजनीतिक मुद्दे शामिल हैं। 29 जून 2025 को कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित थे:
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें: भारत अपनी 85% से अधिक तेल आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है। 19 मई 2025 को भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत $64.63 प्रति बैरल थी, जो जून में स्थिर रही। मध्य पूर्व में इजराइल-ईरान तनाव और चीन के आर्थिक प्रोत्साहन उपायों ने कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता पैदा की, लेकिन जून के अंत तक कीमतें स्थिर हो गईं।
रुपये-डॉलर विनिमय दर: चूंकि कच्चा तेल अमेरिकी डॉलर में खरीदा जाता है, रुपये की कमजोरी या मजबूती का सीधा असर कीमतों पर पड़ता है। जून 2025 में रुपये में मामूली मजबूती देखी गई, जिसने कीमतों को कुछ हद तक नियंत्रित रखा।
केंद्र और राज्य सरकारों के कर: पेट्रोल और डीजल की कीमत का लगभग 55% हिस्सा करों (केंद्रीय उत्पाद शुल्क, VAT, और रोड सेस) से आता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में VAT पेट्रोल पर 19.4% और डीजल पर 16.75% है, जबकि मुंबई में यह क्रमशः 26% और 24% है। यह करों का अंतर ही विभिन्न शहरों में कीमतों का मुख्य कारण है।
परिवहन और डीलर कमीशन: तेल रिफाइनरियों से पेट्रोल पंप तक परिवहन लागत और डीलर कमीशन भी कीमतों को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, मुंबई में परिवहन लागत अधिक होने के कारण पेट्रोल और डीजल दिल्ली की तुलना में महंगे हैं।
मांग और आपूर्ति: जून 2025 में मांग स्थिर रही, क्योंकि यह त्योहारों का मौसम नहीं था। हालांकि, मॉनसून और औद्योगिक गतिविधियों के कारण डीजल की मांग में थोड़ी वृद्धि देखी गई।
पिछले 10 दिनों का रुझान
- पिछले 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मामूली बदलाव देखे गए:
20 जून 2025: दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77, डीजल ₹87.62।
24 जून 2025: पेट्रोल ₹94.72 (₹0.05 की कमी), डीजल ₹87.62 (स्थिर)।
26 जून 2025: कुछ X पोस्ट्स में दावा किया गया कि पेट्रोल ₹5 महंगा हुआ, लेकिन यह जानकारी गलत थी। कीमतें स्थिर रहीं।
27 जून 2025: पेट्रोल ₹94.72, डीजल ₹87.62 (कोई बदलाव नहीं)।
28 जून 2025: मुंबई में पेट्रोल ₹103.50, डीजल ₹90.03।
कुछ X पोस्ट्स में दावा किया गया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें ₹82 और ₹78 तक गिर गईं, लेकिन ये दावे विश्वसनीय स्रोतों से पुष्ट नहीं हुए।
- उपभोक्ताओं पर प्रभाव
पेट्रोल और डीजल की कीमतें आम लोगों के बजट पर सीधा असर डालती हैं। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹94.72 और डीजल की ₹87.62 प्रति लीटर होने के कारण यह अन्य मेट्रो शहरों की तुलना में सस्ता है। हालांकि, मुंबई और हैदराबाद जैसे शहरों में उच्च VAT और परिवहन लागत के कारण कीमतें अधिक हैं, जिससे वहां के उपभोक्ताओं पर अधिक बोझ पड़ता है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतें परिवहन, माल ढुलाई, और सामान की कीमतों को भी प्रभावित करती हैं। जून 2025 में कीमतों में स्थिरता के कारण उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया। हालांकि, डीजल की कीमतें कम होने से ट्रक और बस ऑपरेटरों को कुछ राहत मिली।
- डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग
भारत में जून 2017 से डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग लागू है, जिसके तहत कीमतें हर दिन सुबह 6 बजे संशोधित होती हैं। यह प्रणाली वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और रुपये-डॉलर विनिमय दर के आधार पर काम करती है। उपभोक्ता IOC, BPCL, और HPCL की वेबसाइटों, मोबाइल ऐप्स (जैसे Fuel@IOC, Smart Drive, My HPCL), या SMS सेवाओं (IOC के लिए RSP <डीलर कोड> 9224992249 पर) के जरिए नवीनतम कीमतें देख सकते हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने हाल ही में कहा कि अगर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें कम रहती हैं, तो OMCs के पास पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम करने की गुंजाइश है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 के अंत तक कीमतें ₹94-₹100 (पेट्रोल) और ₹87-₹95 (डीजल) के बीच रह सकती हैं, बशर्ते मध्य पूर्व में कोई बड़ा भू-राजनीतिक संकट न हो।
वास्तव में, जून 2025 में कच्चे तेल की कीमतों में कमी और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की बढ़ती उपलब्धता ने कीमतों को स्थिर रखा। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाती है, तो कीमतों में एकरूपता आ सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
- पेट्रोल और डीजल में अंतर
पेट्रोल की तुलना में डीजल की कीमतें कम रहती हैं, क्योंकि डीजल पर VAT और उत्पाद शुल्क कम होता है। डीजल का उपयोग मुख्य रूप से ट्रकों, बसों, और कृषि उपकरणों में होता है, जिसके कारण सरकार इसे सस्ता रखने की कोशिश करती है। हालांकि, डीजल की रिफाइनिंग प्रक्रिया पेट्रोल की तुलना में आसान होती है, जिससे इसकी उत्पादन लागत कम होती है।
- उपभोक्ताओं के लिए सुझाव
कीमतों की जांच: उपभोक्ता रोजाना सुबह 6 बजे OMCs की वेबसाइटों या ऐप्स पर कीमतें देख सकते हैं।
ईंधन की बचत: वाहनों की नियमित सर्विसिंग, सही टायर प्रेशर, और सुचारु ड्राइविंग से ईंधन की खपत कम की जा सकती है।
वैकल्पिक विकल्प: इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और CNG वाहनों पर विचार करें, क्योंकि सरकार EV को बढ़ावा दे रही है।
29 जून 2025 को भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहीं, दिल्ली में पेट्रोल ₹94.72 और डीजल ₹87.62 प्रति लीटर रहा। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता, रुपये की मजबूती, और कम मांग ने कीमतों को नियंत्रित रखा। हालांकि, विभिन्न शहरों में VAT और परिवहन लागत के कारण कीमतों में अंतर देखा गया।
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