पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने लगाई लंबी छलांग- दिल्ली से मुंबई तक ईधन हुआ महंगा, जानें आज आपके शहर में क्या हैं नए रेट्स?

ईधन की कीमतों में आई यह तेजी सीधे तौर पर खाद्य पदार्थों की महंगाई को भी बढ़ा सकती है। डीजल की कीमतों में वृद्धि का मतलब है कि ट्रकों के जरिए

May 15, 2026 - 08:39
May 15, 2026 - 10:11
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पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने लगाई लंबी छलांग- दिल्ली से मुंबई तक ईधन हुआ महंगा, जानें आज आपके शहर में क्या हैं नए रेट्स?
पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने लगाई लंबी छलांग- दिल्ली से मुंबई तक ईधन हुआ महंगा, जानें आज आपके शहर में क्या हैं नए रेट्स?

भारतीय ईधन बाजार में शुक्रवार, 15 मई 2026 को तेल की कीमतों में आए उछाल ने उपभोक्ताओं और व्यापारियों के बीच हलचल पैदा कर दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में आई अस्थिरता और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति ने घरेलू तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की दरों में संशोधन करने पर मजबूर कर दिया है। आज सुबह 6 बजे जारी हुए नए रेट्स के अनुसार, देश के विभिन्न राज्यों और प्रमुख शहरों में ईधन की कीमतों में 3 रुपये तक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। भारतीय मध्यम वर्गीय परिवार के बजट में ईधन की कीमतें एक निर्णायक भूमिका निभाती हैं। शुक्रवार की सुबह जब देश के विभिन्न हिस्सों में लोग जगे, तो उन्हें पेट्रोल पंपों पर नई और बढ़ी हुई दरों का सामना करना पड़ा। तेल कंपनियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं और रिफाइनिंग लागत में वृद्धि के कारण ईधन की कीमतों में यह समायोजन करना अनिवार्य हो गया था। विशेष रूप से दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कीमतों में एक समान बढ़ोत्तरी देखी गई है, जिससे परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने की आशंका प्रबल हो गई है।

उत्तर प्रदेश के परिदृश्य की बात करें तो नोएडा, लखनऊ और कानपुर जैसे बड़े केंद्रों के साथ-साथ शाहजहांपुर, बाराबंकी और हरदोई जैसे जिलों में भी ईधन की कीमतों में उछाल आया है। उत्तर प्रदेश में लगने वाला वैट (Value Added Tax) अन्य राज्यों की तुलना में अलग होने के कारण यहाँ की कीमतें दिल्ली या मुंबई से भिन्न होती हैं। आज की मूल्य वृद्धि के बाद लखनऊ में पेट्रोल की कीमतें अब 97 रुपये के पार निकल गई हैं, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिल रहा है। छोटे जिलों में भी ईधन की उपलब्धता और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने के कारण आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है। महानगरों की स्थिति पर नजर डालें तो मुंबई हमेशा की तरह देश के सबसे महंगे ईधन वाले शहरों में शामिल है। यहाँ पेट्रोल की कीमतें अब 100 रुपये प्रति लीटर के बेहद करीब पहुँच गई हैं। वहीं दक्षिण भारत में चेन्नई और तमिलनाडु के अन्य हिस्सों में भी कीमतों में 3 रुपये का इजाफा देखा गया है। कोलकाता और असम जैसे पूर्वी क्षेत्रों में भी तेल की कीमतों ने नए रिकॉर्ड छुए हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में, जहाँ ईधन पर कर की दरें काफी ऊंची रहती हैं, वहां उपभोक्ताओं को आज भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है।

15 मई 2026: भारत के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की ताजा दरें

नीचे दी गई तालिका में देश के विभिन्न राज्यों और शहरों के लिए आज के नवीनतम भाव दर्शाए गए हैं:

शहर/स्थान का नाम पेट्रोल का भाव (प्रति लीटर) डीजल का भाव (प्रति लीटर)
नई दिल्ली 97.77 रुपये 90.67 रुपये
नोएडा (उत्तर प्रदेश) 97.94 रुपये 91.09 रुपये
लखनऊ (उत्तर प्रदेश) 97.58 रुपये 90.76 रुपये
कानपुर (उत्तर प्रदेश) 97.22 रुपये 90.41 रुपये
बरेली (उत्तर प्रदेश) 97.80 रुपये 90.98 रुपये
शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) 97.45 रुपये 90.63 रुपये
बाराबंकी (उत्तर प्रदेश) 97.66 रुपये 90.84 रुपये
मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) 97.35 रुपये 90.52 रुपये
आगरा (उत्तर प्रदेश) 97.10 रुपये 90.28 रुपये
हरदोई (उत्तर प्रदेश) 97.55 रुपये 90.72 रुपये
मुंबई (महाराष्ट्र) 107.51 रुपये 95.64 रुपये
पुणे (महाराष्ट्र) 106.88 रुपये 93.36 रुपये
कोलकाता (पश्चिम बंगाल) 104.25 रुपये 93.12 रुपये
चेन्नई (तमिलनाडु) 103.11 रुपये 94.70 रुपये
गुवाहाटी (असम) 98.45 रुपये 91.20 रुपये
भोपाल (मध्य प्रदेश) 109.12 रुपये 94.35 रुपये
जयपुर (राजस्थान) 105.67 रुपये 91.10 रुपये

ईधन की कीमतों में आई यह तेजी सीधे तौर पर खाद्य पदार्थों की महंगाई को भी बढ़ा सकती है। डीजल की कीमतों में वृद्धि का मतलब है कि ट्रकों के जरिए होने वाली फल, सब्जी और अनाज की ढुलाई महंगी हो जाएगी। खुदरा विक्रेताओं का मानना है कि यदि कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं या इनमें और बढ़ोत्तरी हुई, तो इसका असर आने वाले हफ्तों में राशन की कीमतों पर भी साफ़ तौर पर दिखाई देगा। इसके अतिरिक्त, ई-कॉमर्स कंपनियों की डिलीवरी सेवाओं और कैब एग्रीगेटर्स (जैसे ओला और उबर) के किरायों में भी इजाफे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

भारत अपनी तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है। इसलिए, जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ओपेक (OPEC) देशों द्वारा उत्पादन में कटौती की जाती है या किसी युद्ध जैसी स्थिति के कारण आपूर्ति बाधित होती है, तो भारतीय बाजार में इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। 15 मई 2026 को हुई यह वृद्धि इसी वैश्विक चक्र का हिस्सा है। रिफाइनरी से लेकर पेट्रोल पंप तक पहुँचने के दौरान ईधन पर लगने वाले केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्यों के वैट के कारण अंतिम कीमत इतनी अधिक हो जाती है। राजस्थान के श्रीगंगानगर जैसे इलाकों में जहाँ परिवहन खर्च अधिक है, वहां कीमतें देश में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच जाती हैं।

आम जनता के लिए सलाह यह है कि वे ईधन के उपयोग में मितव्ययिता बरतें और जहाँ तक संभव हो, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों तक तेल की कीमतों में इसी तरह की अस्थिरता बनी रह सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय क्रूड बास्केट की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल से नीचे नहीं आती हैं, तो घरेलू स्तर पर राहत मिलने की गुंजाइश कम है। 2026 के इस दौर में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती पैठ ने कुछ हद तक राहत जरूर दी है, लेकिन अब भी देश की एक बड़ी आबादी पेट्रोल और डीजल पर ही निर्भर है।

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