आपके शहर में जानिए 22 अगस्त 2025 को पेट्रोल और डीजल की कीमतें, जाने बाजार का हाल। 

Today Petrol Prices: भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले कुछ समय से स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के कारण इनकी कीमतों पर लगातार नजर रखी जा

Aug 22, 2025 - 12:22
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आपके शहर में जानिए 22 अगस्त 2025 को पेट्रोल और डीजल की कीमतें, जाने बाजार का हाल। 
आपके शहर में जानिए 22 अगस्त 2025 को पेट्रोल और डीजल की कीमतें, जाने बाजार का हाल। 

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले कुछ समय से स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के कारण इनकी कीमतों पर लगातार नजर रखी जा रही है। 22 अगस्त 2025 को देश के विभिन्न शहरों और राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मामूली बदलाव देखने को मिले, हालांकि अधिकांश शहरों में कीमतें पिछले कुछ दिनों की तरह ही स्थिर रहीं। यह स्थिरता सरकार की गतिशील ईंधन मूल्य निर्धारण नीति (डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग) का परिणाम है, जिसके तहत कीमतें हर सुबह 6 बजे संशोधित की जाती हैं। इस नीति को जून 2017 से लागू किया गया था, और यह अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर-रुपये की विनिमय दर, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, राज्य वैट और डीलर कमीशन पर निर्भर करती है। हम लखनऊ, दिल्ली, नोएडा, आगरा, बरेली, असम, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई, तमिलनाडु और बिहार में 22 अगस्त 2025 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर विस्तार से चर्चा करेंगे, साथ ही वैश्विक और घरेलू कारकों का विश्लेषण करेंगे जो इन कीमतों को प्रभावित करते हैं।

22 अगस्त 2025 को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 87.67 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई। दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अन्य मेट्रो शहरों की तुलना में सबसे कम हैं, जिसका कारण यहां कम वैट और अन्य स्थानीय कर हैं। मुम्बई में पेट्रोल की कीमत 103.50 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 90.03 रुपये प्रति लीटर रही। मुम्बई में उच्च वैट और परिवहन लागत के कारण कीमतें दिल्ली से अधिक हैं। कोलकाता में पेट्रोल 105.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.02 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर रहा। चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 100.80 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 92.39 रुपये प्रति लीटर थी। तमिलनाडु के अन्य शहरों में भी चेन्नई के आसपास की कीमतें देखी गईं, हालांकि कुछ छोटे शहरों में स्थानीय करों के कारण मामूली अंतर रहा।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी स्थिर रहीं। लखनऊ में पेट्रोल की कीमत 94.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 87.81 रुपये प्रति लीटर थी। नोएडा में पेट्रोल 94.65 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.42 रुपये प्रति लीटर रहा। आगरा में पेट्रोल की कीमत 94.65 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 87.76 रुपये प्रति लीटर थी। बरेली में पेट्रोल 94.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.81 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर रहा। बिहार की राजधानी पटना में पेट्रोल की कीमत 105.18 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 92.04 रुपये प्रति लीटर थी। बिहार में उच्च वैट के कारण ईंधन की कीमतें उत्तर प्रदेश की तुलना में अधिक हैं। असम के गुवाहाटी में पेट्रोल की कीमत 97.14 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 89.76 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई। असम में परिवहन लागत और स्थानीय करों के कारण कीमतें अन्य राज्यों से कुछ अधिक हैं।

इन कीमतों का आधार भारतीय तेल विपणन कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) हैं, जो हर दिन सुबह 6 बजे कीमतों को अपडेट करती हैं। उपभोक्ता इन कंपनियों की वेबसाइट्स, मोबाइल ऐप्स जैसे फ्यूल@IOC, स्मार्ट ड्राइव (बीपीसीएल), और माय एचपीसीएल, या एसएमएस सेवाओं के माध्यम से नवीनतम कीमतों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, इंडियन ऑयल के ग्राहक 9224992249 पर “RSP डीलर कोड” भेजकर कीमत जान सकते हैं।

पेट्रोल और डीजल की कीमतें विभिन्न राज्यों और शहरों में अलग-अलग होने का कारण स्थानीय कर, परिवहन लागत और डीलर कमीशन हैं। भारत में ईंधन की कीमतें वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में नहीं आतीं, बल्कि केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए वैट पर निर्भर करती हैं। दिल्ली में वैट की दर कम होने के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें अन्य मेट्रो शहरों जैसे मुम्बई, कोलकाता और चेन्नई की तुलना में कम हैं। उदाहरण के लिए, मुम्बई में वैट की दर 26% (पेट्रोल) और 24% (डीजल) है, जबकि दिल्ली में यह क्रमशः 19.4% और 9.7% है। बिहार में वैट की दर 24.5% तक जाती है, जिसके कारण पटना में ईंधन की कीमतें अधिक हैं।

वैश्विक तेल बाजार में हाल के उतार-चढ़ाव ने भी भारत में ईंधन की कीमतों पर असर डाला है। 22 अगस्त 2025 को ब्रेंट क्रूड की कीमत 81.74 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 76.48 डॉलर प्रति बैरल थी, जो पिछले दिन की तुलना में 0.54% और 0.8% कम थी। लाल सागर संकट और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति में अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, भारत सरकार ने हाल ही में कीमतों को स्थिर रखने के लिए कदम उठाए हैं। 15 अगस्त 2025 को सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी, जिसे कुछ विश्लेषकों ने लोकसभा चुनाव से पहले मतदाताओं को आकर्षित करने की रणनीति बताया। इस कटौती के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 96.72 रुपये से घटकर 94.77 रुपये और डीजल की कीमत 89.67 रुपये से घटकर 87.67 रुपये प्रति लीटर हो गई थी।

सोशल मीडिया पर भी ईंधन की कीमतों को लेकर चर्चा जोरों पर है। कुछ यूजर्स ने सरकार की नीतियों की सराहना की, जबकि अन्य ने उच्च करों की आलोचना की। एक यूजर ने लिखा, “35 रुपये का पेट्रोल और 65 रुपये टैक्स, यह कहां का इंसाफ है?” दूसरी ओर, कुछ लोगों ने रूस से सस्ते कच्चे तेल के आयात की सराहना की, जिसकी कीमत 60-70 डॉलर प्रति बैरल रही है। रूस ने हाल ही में भारत को 5% छूट की पेशकश की है, जिससे आयात लागत और कम हो सकती है।

भारत में ईंधन की कीमतें न केवल व्यक्तिगत उपभोक्ताओं को प्रभावित करती हैं, बल्कि परिवहन और वस्तुओं की कीमतों पर भी असर डालती हैं। डीजल की कीमतों में वृद्धि से माल ढुलाई की लागत बढ़ती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों और अन्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। दिल्ली में डीजल की कीमत 87.67 रुपये प्रति लीटर होने के बावजूद, यह अन्य मेट्रो शहरों जैसे चेन्नई (92.39 रुपये) और कोलकाता (92.02 रुपये) से कम है। असम में डीजल की कीमत 89.76 रुपये प्रति लीटर है, जो पूर्वोत्तर राज्यों में परिवहन लागत को प्रभावित करती है।

सरकार ने हाल के वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं ताकि कच्चे तेल पर निर्भरता कम की जा सके। भारत अपनी तेल आवश्यकताओं का लगभग 85% आयात करता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतों का घरेलू कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईवी को बढ़ावा देने से भविष्य में ईंधन की मांग कम हो सकती है। हालांकि, वर्तमान में पेट्रोल और डीजल की मांग शहरी क्षेत्रों में अधिक बनी हुई है।

22 अगस्त 2025 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता के बावजूद, विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण भविष्य में कीमतें बढ़ सकती हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह कीमतों को नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर कदम उठाती रहेगी। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से तेल कंपनियों की वेबसाइट्स और ऐप्स के जरिए कीमतों की जांच करें ताकि सटीक जानकारी मिल सके।

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