25 मार्च 2026: दिल्ली-NCR से लेकर मुंबई-कोलकाता तक ईंधन कीमतें: आज का ताजा अपडेट जो हर वाहन चालक को जानना चाहिए
देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा सुबह छह बजे जारी
आज 25 मार्च 2026 को देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा सुबह छह बजे जारी किए गए नए भाव पिछले कुछ दिनों से स्थिर बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू बाजार में स्थिरता बनी हुई है। यह स्थिरता उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है क्योंकि ईंधन की कीमतों में हर छोटा बदलाव ट्रांसपोर्ट, किराना सामान, सब्जी-फल और दैनिक जीवन की हर चीज की लागत को प्रभावित करता है।
नीचे दी गई तालिका में निर्दिष्ट सभी जगहों पर पेट्रोल और डीजल का भाव (रुपये प्रति लीटर में) दिया गया है। ये भाव भरोसेमंद स्रोतों से एकत्रित और क्रॉस-वेरिफाई किए गए हैं। कीमतें सभी करों, एक्साइज ड्यूटी, वैट और डीलर कमीशन सहित हैं।
| जगह | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 94.77 | 87.67 |
| नोएडा | 94.85 | 87.98 |
| लखनऊ | 94.69 | 87.81 |
| कानपुर | 94.44 | 87.75 |
| बरेली | 94.82 | 88.03 |
| शाहजहांपुर | 95.00 | 87.76 |
| बाराबंकी | 94.94 | 88.05 |
| मुरादाबाद | 95.38 | 88.23 |
| आगरा | 94.46 | 87.57 |
| हरदोई | 94.93 | 88.09 |
| कोलकाता | 105.41 | 92.02 |
| पुणे | 104.22 | 90.74 |
| मुम्बई | 103.54 | 90.03 |
| असम (गुवाहाटी) | 98.20 | 89.50 |
| चेन्नई (तमिलनाडु) | 101.06 | 92.61 |
| मध्य प्रदेश (भोपाल) | 106.50 | 91.90 |
| राजस्थान (जयपुर) | 104.70 | 90.21 |
पेट्रोल और डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं? यह प्रक्रिया काफी जटिल है। तेल विपणन कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम रोजाना अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, डॉलर-रुपये का एक्सचेंज रेट, रिफाइनरी लागत, परिवहन खर्च, मार्केटिंग मार्जिन और सरकार द्वारा लगाए गए टैक्स को ध्यान में रखकर भाव तय करती हैं। केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लेती है जबकि राज्य सरकारें वैट या सेल्स टैक्स लगाती हैं। यही कारण है कि एक ही राज्य के अलग-अलग शहरों में भी थोड़ा अंतर दिखता है और अलग-अलग राज्यों में बड़ा फर्क आ जाता है। उदाहरण के लिए दिल्ली में वैट कम होने से यहां कीमतें कम हैं जबकि पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में उच्च वैट के कारण कोलकाता और मुंबई महंगे हैं।
आज 25 मार्च 2026 को कीमतों में स्थिरता का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का स्थिर रहना है। पिछले कई हफ्तों से ब्रेंट क्रूड ऑयल 70-75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास घूम रहा है। इसके अलावा सरकार की सतर्क नीतियों और कंपनियों द्वारा मार्जिन को नियंत्रित रखने से आम आदमी को राहत मिली है। यदि हम पिछले एक साल से तुलना करें तो पेट्रोल-डीजल के भाव में औसतन 2-3 रुपये प्रति लीटर की कमी देखी गई है। यह कमी महंगाई को नियंत्रित रखने में मददगार साबित हुई है।
उत्तर प्रदेश के शहरों की बात करें तो नोएडा, लखनऊ, कानपुर, बरेली, शाहजहांपुर, बाराबंकी, मुरादाबाद, आगरा और हरदोई जैसे इलाकों में वाहन चालक और ट्रांसपोर्टर रोजाना इन कीमतों पर निर्भर रहते हैं। दिल्ली-NCR के लोग अक्सर नोएडा की तुलना में दिल्ली में ईंधन भरते हैं क्योंकि यहां 20-30 पैसे सस्ता पड़ता है। लखनऊ और कानपुर जैसे बड़े शहरों में बस, ऑटो और ट्रक ऑपरेटर्स इन दरों पर अपना बजट बनाते हैं। यदि कीमतें बढ़ती हैं तो किराया बढ़ जाता है जो सीधे आम आदमी की जेब पर बोझ बनता है।
कोलकाता में पेट्रोल 105 रुपये से ऊपर होने के कारण पब्लिक ट्रांसपोर्ट और छोटे व्यापारियों पर दबाव अधिक है। मुंबई और पुणे में भी यही स्थिति है। महाराष्ट्र के इन शहरों में ऑफिस जाने वाले लोग और लंबी दूरी के ट्रांसपोर्टर ईंधन पर सबसे ज्यादा खर्च करते हैं। चेन्नई और पूरे तमिलनाडु में कीमतें मध्यम स्तर पर हैं लेकिन यहां की औद्योगिक गतिविधियां और ट्रक ट्रांसपोर्ट इन भावों से प्रभावित होते हैं। असम में गुवाहाटी के आसपास कीमतें अपेक्षाकृत कम हैं क्योंकि यहां स्थानीय उत्पादन का कुछ प्रभाव पड़ता है। मध्य प्रदेश और राजस्थान कृषि प्रधान राज्य हैं। यहां डीजल की कीमत ट्रैक्टर और फसल ढुलाई पर सीधा असर डालती है। जयपुर और भोपाल में ऊंची कीमतें किसानों की लागत बढ़ाती हैं जो अंततः सब्जी और अनाज के दामों में दिखती है।
ईंधन की कीमतों का अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। हर साल हम लगभग 85 प्रतिशत तेल आयात करते हैं। इसलिए डॉलर की मजबूती या क्रूड ऑयल का महंगा होना सीधे हमारी मुद्रास्फीति को प्रभावित करता है। वर्तमान में स्थिर भावों के कारण ट्रांसपोर्ट सेक्टर, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और कृषि सभी क्षेत्रों में लागत नियंत्रित है। इससे माल ढुलाई सस्ती हुई है और बाजार में सामान की कीमतें स्थिर हैं। यदि हम व्यक्तिगत स्तर पर देखें तो एक साधारण कार मालिक जो महीने में 1000 किलोमीटर चलाता है उसे पेट्रोल पर औसतन 8000-9000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यदि कीमत 2 रुपये बढ़ जाए तो यह खर्च 200 रुपये मासिक बढ़ जाता है। बड़े ट्रक ड्राइवरों और बेड़े मालिकों के लिए यह आंकड़ा हजारों रुपये का होता है।
सरकार समय-समय पर ईंधन पर सब्सिडी या टैक्स में छूट देती रही है। हाल के वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएं चलाई गई हैं। फिर भी पेट्रोल-डीजल अभी भी हमारे परिवहन का मुख्य स्रोत है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे ईंधन बचाने के लिए नियमित टायर प्रेशर चेक करें, अनावश्यक एसी का इस्तेमाल कम करें, कार풲ूलिंग अपनाएं और पुरानी गाड़ियों का रखरखाव ठीक रखें। शहरों में मेट्रो और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा उपयोग करें तो ईंधन पर बचत हो सकती है।
वर्तमान स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार भी स्थिर है। तेल उत्पादक देशों की बैठकें और जियो-पॉलिटिकल घटनाएं भविष्य में प्रभाव डाल सकती हैं। लेकिन फिलहाल 25 मार्च 2026 को सभी उल्लिखित शहरों और राज्यों में ऊपर दी गई तालिका के अनुसार ही भाव हैं। उपभोक्ता इनकी निगरानी कर सकते हैं और अपनी यात्रा योजनाएं उसी हिसाब से बना सकते हैं।
इसके अलावा यदि हम राज्य स्तर पर टैक्स स्ट्रक्चर देखें तो दिल्ली में पेट्रोल पर वैट मात्र 30 प्रतिशत के आसपास है जबकि कुछ राज्यों में यह 40 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। यही अंतर कीमतों में 5-10 रुपये प्रति लीटर का फर्क पैदा करता है। उत्तर प्रदेश में सभी उल्लिखित शहरों में वैट समान होने के कारण भाव लगभग एक जैसे हैं। राजस्थान में कृषि सब्सिडी के बावजूद डीजल थोड़ा महंगा है क्योंकि राज्य राजस्व की जरूरतें अधिक हैं। मध्य प्रदेश में भी इसी तरह का बैलेंस रखा गया है। तमिलनाडु और असम में स्थानीय उत्पादन और टैक्स नीति के कारण मध्यम स्तर बना हुआ है।
दैनिक जीवन में इन कीमतों का असर हर वर्ग पर पड़ता है। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, टैक्सी ड्राइवर, डिलीवरी बॉय, किसान, छोटे व्यापारी, उद्योगपति – सभी इससे प्रभावित होते हैं। स्थिरता बनी रहने से महंगाई दर नियंत्रित रहती है और अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। सरकार भी ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए सीएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन और बायोफ्यूल को बढ़ावा दे रही है। आने वाले वर्षों में यह ट्रेंड और तेज हो सकता है।
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