UP Politics: News24 के 'बेरोक-टोक' शो में भिड़े RLD प्रवक्ता रोहित अग्रवाल और सपा पैनलिस्ट, 'टोटी चोर' तंज पर गरमाई यूपी की सियासत
News24 के शो 'बेरोक-टोक' में 'टोटी चोर' टिप्पणी को लेकर RLD प्रवक्ता रोहित अग्रवाल और सपा प्रवक्ता के बीच तीखी बहस छिड़ गई। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

- RLD Spokesperson Rohit Agarwal vs SP: टीवी डिबेट में 'टोटी चोर' बयान पर तीखी तकरार, भाषा की मर्यादा पर उठा सवाल
- टीवी डिबेट में 'टोटी चोर' तंज पर छिड़ा सियासी घमासान: RLD प्रवक्ता रोहित अग्रवाल की टिप्पणी पर भड़की समाजवादी पार्टी, गरमाया माहौल
- UP Politics: 'बेरोक-टोक' में 'टोटी चोर' टिप्पणी को लेकर RLD प्रवक्ता रोहित अग्रवाल और सपा में तीखी नोकझोंक, वीडियो वायरल
उत्तर प्रदेश की राजनीति में टेलीविजन डिबेट्स के दौरान होने वाली जुबानी जंग एक बार फिर तीखे मोड़ पर पहुंच गई है। News24 के चर्चित राजनीतिक डिबेट कार्यक्रम 'बेरोक-टोक' के दौरान राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहित अग्रवाल द्वारा समाजवादी पार्टी के संदर्भ में इस्तेमाल किए गए 'टोटी चोर' वाले पुराने राजनीतिक तंज को लेकर दोनों दलों के प्रतिनिधियों में तीखी नोकझोंक देखने को मिली। लाइव प्रसारण के दौरान सपा प्रवक्ता द्वारा भाषा की मर्यादा बनाए रखने की अपील और एंकर द्वारा टोके जाने के बाद भी दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक जुबानी तकरार जारी रही। सोशल मीडिया पर इस बहस का क्लिप सामने आते ही उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलकों में बयानबाजी और तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।
- टीवी डिबेट में 'टोटी चोर' तंज पर तीखी तकरार
न्यूज चैनल News24 के लाइव राजनीतिक शो 'बेरोक-टोक' में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक नीतियों और चुनावी रणनीतियों पर गर्मागर्म चर्चा चल रही थी। इसी दौरान राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल और नेतृत्व को घेरते हुए 'टोटी चोर' मुहावरे का इस्तेमाल कर दिया।
इस टिप्पणी के आते ही लाइव प्रसारण में माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता ने इस भाषा शैली पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और इसे व्यक्तिगत चरित्र हनन तथा राष्ट्रीय टेलीविजन की मर्यादा का खुला उल्लंघन बताया। डिबेट में मौजूद एंकर को भी हस्तक्षेप करते हुए शब्दों के चयन में सावधानी बरतने की बात कहनी पड़ी।
- कैसे शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सरकारी आवास खाली करने के दौरान कथित रूप से फिटिंग्स और टोटियां गायब होने का यह पुराना विवाद अक्सर चुनावी और टीवी विमर्श में तूल पकड़ता रहा है। डिबेट के दौरान जब प्रशासनिक शुचिता और राजनीतिक जवाबदेही पर बहस चल रही थी, तभी रालोद प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने सपा नेतृत्व पर यह सीधा तंज कस दिया।
इसके तुरंत बाद सपा प्रवक्ता ने पलटवार करते हुए कहा कि राष्ट्रीय चैनल पर बात करते समय भाषा और गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने रालोद के पुराने राजनीतिक स्टैंड और सत्ताधारी गठबंधन में जाने पर सवाल उठाए। दोनों प्रवक्ताओं के बीच लगभग कई मिनटों तक एक-दूसरे के अतीत और राजनीतिक फैसलों को लेकर सीधी तू-तू, मैं-मैं चली, जिससे एंकर को बीच-बचाव कर डिबेट को मूल विषय पर वापस लाने का प्रयास करना पड़ा।
- सपा और रालोद का रुख
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं और नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक मंचों पर जनहित के मुद्दों जैसे बेरोजगारी, महंगाई और विकास पर सार्थक संवाद होना चाहिए। सपा की ओर से आरोप लगाया गया कि वास्तविक सवालों से ध्यान भटकाने के लिए सत्ताधारी गठबंधन के सहयोगी दल व्यक्तिगत स्तर की अपमानजनक शब्दावली का सहारा ले रहे हैं, जिसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर, राष्ट्रीय लोक दल के प्रवक्ता रोहित अग्रवाल और उनके समर्थकों का तर्क है कि राजनीति में सार्वजनिक आचरण और पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यशैली पर सवाल उठाना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है। रालोद खेमे का कहना है कि उन्होंने जनता के बीच मौजूद ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भों को ही रेखांकित किया है, जिस पर विपक्ष को असहज होने के बजाय जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।
- राजनीतिक विमर्श और गठबंधन की कड़वाहट
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में सार्वजनिक संवाद के गिरते स्तर और व्यक्तिगत तंज की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में नीतिगत बहस की जगह व्यक्तिगत आक्षेपों का हावी होना लोकतांत्रिक मर्यादा के लिहाज से चिंताजनक है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी के बीच अतीत में रहे चुनावी गठबंधन के टूटने के बाद दोनों दलों के प्रवक्ताओं में बढ़ी कटुता अब सार्वजनिक बहसों में साफ झलक रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच जमीनी स्तर पर भी इसका मनोवैज्ञानिक असर देखने को मिल सकता है।
- भाषा की मर्यादा पर सख्त दिशा-निर्देश
इस टीवी विवाद के बाद समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल दोनों की मीडिया इकाइयों में अपने प्रवक्ताओं के लिए डिबेट गाइडलाइंस को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सपा जहां ऐसे आक्रामक बयानों पर कानूनी और मीडिया स्तर पर सख्त आपत्ति दर्ज कराने की रणनीति बना रही है, वहीं रालोद भी अपने तर्कों को और अधिक आक्रामक तरीके से रखने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में जब रैलियों और चुनावी अभियानों का दौर आगे बढ़ेगा, तो दोनों दलों के बीच यह जुबानी जंग थमने के बजाय और अधिक तीखी होने के पूरे आसार हैं।
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