सुप्रीम कोर्ट ने UGC इक्विटी रेगुलेशन 2026 पर लगाई अंतरिम रोक, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
प्रमोद तिवारी ने कहा कि भाजपा सरकार विभाजनकारी राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे कदम उठाती है। प्रमोद तिवारी ने सुप्री

प्रमोद तिवारी का बयान: भाजपा सरकार सिद्धांत भूल गई, वर्ग जाति धर्म के नाम पर देश में आग लगाकर वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाती है
UGC के नए नियमों को अस्पष्ट और दुरुपयोग की संभावना वाला बताकर सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत, 2012 नियम फिलहाल रहेंगे लागू
29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस) रेगुलेशंस 2026 पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने इन नियमों को अस्पष्ट और दुरुपयोग की संभावना वाला बताते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि नियमों में कई प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका दुरुपयोग हो सकता है। इस फैसले के बाद 2012 के UGC नियम फिलहाल लागू रहेंगे। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नियमों को दोबारा तैयार करने का निर्देश दिया। याचिकाओं में नियमों को संविधान और UGC एक्ट 1956 के विपरीत बताया गया था। नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को चुनौती दी गई थी जिसमें सामान्य वर्ग को बाहर रखा गया था।
कांग्रेस सांसद और राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही दिशा में एक कदम है। प्रमोद तिवारी ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार सिद्धांत भूल गई है। उन्होंने कहा कि सरकार का काम है कि यदि कहीं अशांति हो तो वहां शांति पैदा करे लेकिन ये लोग वर्ग, जाति और धर्म के नाम पर देश में आग लगा रहे हैं ताकि लोगों का वास्तविक मुद्दों से ध्यान हट जाए। प्रमोद तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि नए UGC नियमों को रद्द करने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्वागतयोग्य है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच में चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची शामिल थे। कोर्ट ने तीन रिट पिटिशन पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं ने नियमों को मनमाना, बहिष्कारपूर्ण, भेदभावपूर्ण और संविधान के विपरीत बताया। कोर्ट ने कहा कि 2026 के नियमों की जांच की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि नियम बहुत व्यापक हैं। कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए 2012 के नियमों को लागू रखने का आदेश दिया।
नियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए गए थे। ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए थे। नियमों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के खिलाफ भेदभाव पर फोकस था। याचिकाओं में कहा गया कि सामान्य वर्ग के छात्रों की सुरक्षा नहीं की गई है। कोर्ट ने कहा कि नियम सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव की अनुमति दे सकते हैं।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि भाजपा सरकार विभाजनकारी राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे कदम उठाती है। प्रमोद तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देश के लिए सकारात्मक बताया। अन्य विपक्षी दलों ने भी फैसले का स्वागत किया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि फैसला सामाजिक तनाव को देखते हुए उचित है। तृणमूल कांग्रेस नेता कल्याण बनर्जी, शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी कोर्ट के हस्तक्षेप का स्वागत किया।
UGC ने 2026 के नियमों को जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए जारी किया था। नियमों में उच्च शिक्षा संस्थानों में इक्विटी प्रमोट करने के प्रावधान थे। कोर्ट ने कहा कि नियमों में अस्पष्टता है। कोर्ट ने कहा कि नियमों का दुरुपयोग हो सकता है। कोर्ट ने संघ सरकार को नियमों को स्पष्ट बनाने का निर्देश दिया। विपक्षी दलों ने UGC नियमों को सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला बताया। फैसले के बाद छात्र संगठनों ने प्रतिक्रिया दी। NSUI ने कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी। ABVP ने फैसला का स्वागत किया और कहा कि यह संवैधानिक समानता के मूल्यों के अनुरूप है। ABVP ने कहा कि UGC नियमों में अस्पष्टता से देश में भ्रम फैला था।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर सहमति जताई। याचिकाकर्ताओं में विनीत जिंदल और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के रिसर्चर मृत्युंजय तिवारी शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा विवादास्पद है। कोर्ट ने कहा कि नियम सामान्य वर्ग को बाहर रखकर भेदभाव करते हैं।
प्रमोद तिवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश में शांति बनाए रखने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ऐसे नियम लाकर समाज को बांट रही है। प्रमोद तिवारी ने कहा कि सरकार का काम शांति स्थापित करना है न कि अशांति फैलाना। उन्होंने कहा कि वर्ग, जाति और धर्म के नाम पर आग लगाना गलत है। प्रमोद तिवारी ने कहा कि इससे वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटता है। सुप्रीम कोर्ट ने नियमों को रखने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि 2012 के नियम लागू रहेंगे। कोर्ट ने आगे की सुनवाई के लिए मामले को लिस्ट किया। याचिकाओं में नियमों को UGC एक्ट 1956 के विपरीत बताया गया। कोर्ट ने कहा कि नियमों की जांच जरूरी है।
(सुप्रीम कोर्ट का आदेश)
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2026 के नियम रखे जाते हैं। अनुच्छेद 142 के तहत 2012 के नियम लागू रहेंगे। कोर्ट ने नियमों को अस्पष्ट और दुरुपयोग की संभावना वाला बताया।
(प्रमोद तिवारी का बयान)
प्रमोद तिवारी ने कहा कि भाजपा सरकार सिद्धांत भूल गई है। सरकार का काम अशांति में शांति पैदा करना है लेकिन ये वर्ग, जाति और धर्म के नाम पर आग लगा रहे हैं ताकि वास्तविक मुद्दों से ध्यान हट जाए। सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद।
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