कड़ाके की ठंड में सरसों की फसल पर मंडरा रहा पाले का खतरा, किसान अपनाएं ये देसी और आसान उपाय ताकि फसल रहे सुरक्षित। 

जनवरी 2026 की शुरुआत में देश के उत्तरी हिस्सों खासकर राजस्थान में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जिससे रबी फसलों पर पाले का खतरा बढ़ गया है। सरसों की फसल

Jan 1, 2026 - 12:55
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कड़ाके की ठंड में सरसों की फसल पर मंडरा रहा पाले का खतरा, किसान अपनाएं ये देसी और आसान उपाय ताकि फसल रहे सुरक्षित। 
कड़ाके की ठंड में सरसों की फसल पर मंडरा रहा पाले का खतरा, किसान अपनाएं ये देसी और आसान उपाय ताकि फसल रहे सुरक्षित। 

जनवरी 2026 की शुरुआत में देश के उत्तरी हिस्सों खासकर राजस्थान में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जिससे रबी फसलों पर पाले का खतरा बढ़ गया है। सरसों की फसल इस समय फूल और फली बनने की अवस्था में है, और पाला पड़ने से फूल झड़ने लगते हैं, पत्तियां झुलस जाती हैं तथा फली बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। इससे दानों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर बुरा असर पड़ता है। राजस्थान के कई जिलों में तापमान गिरने से खेतों में पाला जमने की स्थिति बन रही है, और किसान बढ़ती लागत के बीच मौसम की इस मार से जूझ रहे हैं। सरसों के अलावा अन्य रबी फसलों जैसे चना, मटर और आलू पर भी पाले का प्रभाव दिख सकता है। पाला तब अधिक पड़ता है जब रात में आसमान साफ हो, हवा शांत रहे और तापमान तेजी से गिर जाए। इस स्थिति में पौधों की कोशिकाएं जम जाती हैं, जिससे ऊपरी हिस्से में नुकसान होता है। सरसों में फूल झड़ने से फलियां कम बनती हैं और दाने छोटे रह जाते हैं। कई क्षेत्रों में ठंडी हवाओं के कारण सरसों के पौधे कमजोर हो रहे हैं, और यदि समय रहते उपाय नहीं किए गए तो पैदावार में भारी कमी आ सकती है।

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है, और पाले से बचाव के लिए कुछ सरल उपाय बताए हैं जो फसल को काफी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं। सबसे प्रभावी उपाय हल्की सिंचाई है। पाले की आशंका होने पर रात में या सुबह-सुबह हल्की सिंचाई करने से मिट्टी से गर्मी निकलकर हवा में फैलती है, जिससे तापमान में अचानक गिरावट रुक जाती है और पाला नहीं जम पाता। सिंचाई से खेत की नमी बनी रहती है, जो पौधों को ठंड के झटके से बचाती है। यह उपाय सरसों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है क्योंकि फूल और फली की अवस्था में नमी की जरूरत अधिक होती है। एक अन्य देसी उपाय खेत में धुआं करना है। पाले वाली रात को खेत की मेड़ों पर उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली ठंडी हवा की ओर कूड़ा-कचरा, घास-फूस या पराली जलाकर धुआं पैदा किया जाए। धुआं वातावरण में एक परत बनाता है, जो तापमान गिरने से रोकता है और पाला जमने नहीं देता।

ह पुराना लेकिन कारगर तरीका आज भी कई किसान अपनाते हैं। इसके अलावा पौधों की जड़ों के आसपास मिट्टी चढ़ाना या अर्थिंग-अप करना भी फायदेमंद है, इससे पौधे ठंड से सुरक्षित रहते हैं। मल्चिंग का उपयोग भी किया जा सकता है, जहां पौधों के चारों ओर पुआल या अन्य सामग्री बिछाई जाती है ताकि मिट्टी का तापमान स्थिर रहे। कुछ विशेषज्ञ सल्फर युक्त यौगिक या थायोयूरिया का छिड़काव करने की सलाह देते हैं, जो पौधों की सहनशीलता बढ़ाता है और ठंड के प्रभाव को कम करता है। गंधक के घोल का छिड़काव भी पाले से बचाव में मददगार साबित होता है। लंबे समय के लिए खेत की मेड़ों पर शहतूत, शीशम, बबूल या जामुन जैसे पेड़ लगाने से ठंडी हवाओं का सीधा असर कम होता है। ये उपाय अपनाकर किसान सरसों की फसल को पाले से बचा सकते हैं। ठंड बढ़ने पर खेत में हवा का प्रवाह बनाए रखना और पानी निकास की व्यवस्था करना भी जरूरी है ताकि अत्यधिक नमी से जड़ें प्रभावित न हों। सरसों में इस समय माहू कीट का खतरा भी रहता है, लेकिन पाले का मुख्य फोकस फूल और फली पर होता है।

कृषि विभाग ने किसानों से मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखने और समय पर उपाय अपनाने को कहा है। राजस्थान में सरसों प्रमुख रबी फसल है, और भरतपुर जैसे क्षेत्रों में इसकी खेती बड़े पैमाने पर होती है। ठंड और पाला यहां आम है, लेकिन सही प्रबंधन से नुकसान कम किया जा सकता है। हल्की सिंचाई और धुआं जैसे देसी उपाय कम खर्च में प्रभावी हैं। पाले से बचाव न करने पर फूल झड़ जाते हैं, फलियां कम बनती हैं और दाने की गुणवत्ता गिर जाती है। किसान इन उपायों से फसल को सुरक्षित रखकर अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। ठंड के इस मौसम में सतर्कता जरूरी है, क्योंकि पाला एक रात में ही भारी नुकसान पहुंचा सकता है। सिंचाई का समय सही चुनना महत्वपूर्ण है, रात में करना अधिक फायदेमंद होता है। धुआं करने के लिए सुरक्षित सामग्री का उपयोग करें ताकि आग का खतरा न हो। सल्फर छिड़काव से पौधों में पोषक तत्व भी बढ़ते हैं। ये सभी उपाय मिलकर सरसों को पाले से बचाते हैं। राजस्थान के किसान इन तरीकों से अपनी मेहनत को सुरक्षित रख सकते हैं।

पाला पड़ने की स्थिति में सुबह खेत का मुआयना करें और आवश्यक कदम उठाएं। फसल की इस अवस्था में नमी और तापमान का संतुलन बनाए रखना ключ है। कृषि विशेषज्ञ बार-बार हल्की सिंचाई पर जोर देते हैं। धुआं का उपाय ग्रामीण क्षेत्रों में लोकप्रिय है। मिट्टी चढ़ाने से जड़ें मजबूत रहती हैं। ये देसी उपाय सरल और सस्ते हैं। ठंड बढ़ने पर इनका पालन करें ताकि फसल सुरक्षित रहे। सरसों की पैदावार पर पाले का सीधा असर पड़ता है। फूल झड़ने से उत्पादन घट जाता है। पत्तियां झुलसने से पौधा कमजोर हो जाता है। उपाय अपनाकर नुकसान कम करें। जनवरी में ठंड चरम पर होती है। पाला जमने से बचाव जरूरी है। किसान सतर्क रहें और फसल बचाएं। हल्की सिंचाई सबसे आसान उपाय है। धुआं पारंपरिक लेकिन प्रभावी है। सल्फर छिड़काव सहनशीलता बढ़ाता है। मेड़ों पर पेड़ लंबे समय का समाधान हैं। ये उपाय मिलकर फसल को मजबूत बनाते हैं। राजस्थान में सरसों महत्वपूर्ण फसल है। पाले से बचाव उत्पादन बढ़ाएगा। किसान इन सलाहों का पालन करें। ठंड के दिनों में खेत की देखभाल बढ़ाएं। पाला एक चुनौती है लेकिन उपाय उपलब्ध हैं। फसल सुरक्षित रहेगी तो पैदावार अच्छी होगी।

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