गीत : गीत हैं बेटियाँ, मीत हैं बेटियाँ। प्रीति का छंद हैं, नेह आनंद हैं...
ये जला दीप हैं , शुभ्र ज्यों सीप हैं । पाक ये हव्य सी ,ज्योति हैं भव्य सी
गीत
रचना- अनामिका सिंह 'अना'
गीत हैं बेटियाँ , मीत हैं बेटियाँ ।
प्रीति का छंद हैं , नेह आनंद हैं ।।
हैं घटा सावनी , आयतें पावनी ।
लाड़ली ये अली , मोहिनी हैं कली ।।
ये जला दीप हैं , शुभ्र ज्यों सीप हैं ।
पाक ये हव्य सी ,ज्योति हैं भव्य सी ।।
क्षोभ ने है गसा, कोख में हादसा ।
रोम में पीर है , तथ्य गंभीर है ।।
पुत्र की कामना ,क्यों जहां को अना ।
सोच क्यों तंग है , छू लिया श्रृंग है ।।
रक्त भी एक है , क्षोभ क्यों टेक है ।
झेलती दंश हैं , कोख का अंश हैं ।।
मारियेगा नहीं , भूल से भी कहीं ।
बेटियाँ शान हैं , सृष्टि की जान हैं ।।
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