गीत : गीत हैं बेटियाँ, मीत हैं बेटियाँ। प्रीति का छंद हैं, नेह आनंद  हैं...

ये  जला  दीप  हैं , शुभ्र  ज्यों  सीप  हैं । पाक ये  हव्य सी  ,ज्योति हैं भव्य सी

Jul 3, 2025 - 15:49
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गीत : गीत हैं बेटियाँ, मीत हैं  बेटियाँ। प्रीति का छंद हैं, नेह आनंद  हैं...

                   गीत

रचना- अनामिका सिंह 'अना'

गीत    हैं   बेटियाँ ,  मीत   हैं  बेटियाँ ।
प्रीति   का  छंद  हैं  , नेह  आनंद  हैं ।।

हैं   घटा   सावनी  , आयतें    पावनी ।
लाड़ली   ये अली , मोहिनी  हैं कली ।।

ये  जला  दीप  हैं , शुभ्र  ज्यों  सीप  हैं ।
पाक ये  हव्य सी  ,ज्योति हैं भव्य सी ।।

क्षोभ   ने   है  गसा, कोख  में हादसा ।
रोम   में  पीर   है , तथ्य   गंभीर    है ।।

पुत्र  की कामना ,क्यों जहां को अना ।
सोच  क्यों  तंग है , छू  लिया श्रृंग है ।।

रक्त  भी एक  है ,  क्षोभ क्यों टेक   है ।
झेलती  दंश  हैं , कोख   का  अंश हैं ।।

मारियेगा   नहीं , भूल  से  भी   कहीं ।
               बेटियाँ  शान  हैं ,  सृष्टि  की जान हैं ।।               

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