"पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं..." विदेश मंत्रालय ने 1967 के कानून और हाई कोर्ट के फैसले का दिया हवाला, चौंकाए आंकड़े

MEA on Passport Rules: विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का सबूत नहीं। मंत्रालय ने पासपोर्ट एक्ट 1967 का भी हवाला दिया।

Jun 25, 2026 - 13:15
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"पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं..." विदेश मंत्रालय ने 1967 के कानून और हाई कोर्ट के फैसले का दिया हवाला, चौंकाए आंकड़े
विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है
  • Passport Identity Proof: पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं, केवल यात्रा दस्तावेज है; विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान
  • MEA on Passport Rules: पासपोर्ट एक्ट 1967 का हवाला देकर विदेश मंत्रालय ने किया साफ, पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं
  • MEA Big Statement: पासपोर्ट सिर्फ एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, नागरिकता का सर्टिफिकेट नहीं; विदेश मंत्रालय की बड़ी स्पष्टता

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पासपोर्ट को लेकर चल रहे विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक सवालों पर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। नई दिल्ली में आयोजित एक आधिकारिक ब्रीफिंग के दौरान मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा कि पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है, इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण (Proof of Citizenship) नहीं माना जा सकता। जून 2026 में जारी इस आधिकारिक बयान में मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था कोई नई नहीं है, बल्कि दशकों पुराने नियमों के तहत ही संचालित है। इस दौरान मंत्रालय ने देश में दी जा रही पासपोर्ट सेवाओं और आवेदनों से जुड़े कई नए डिजिटल आंकड़े भी पेश किए, जो देश में बढ़ती वैश्विक गतिशीलता को दर्शाते हैं।

पासपोर्ट की कानूनी स्थिति और विभिन्न सरकारी एवं न्यायिक प्रक्रियाओं में इसके इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि कानूनी रूप से पासपोर्ट का प्राथमिक उद्देश्य किसी व्यक्ति की अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना और उसकी पहचान को प्रमाणित करना है। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि किसी व्यक्ति के पास पासपोर्ट होने मात्र से यह स्वचालित रूप से प्रमाणित नहीं हो जाता कि वह भारत का कानूनी नागरिक है। इसके साथ ही मंत्रालय ने देश में पासपोर्ट जारी करने की रफ्तार, आवेदनों के निस्तारण और सेवा केंद्रों की संख्या से जुड़े प्रशासनिक आंकड़े भी देश के सामने रखे हैं।

विदेश मंत्रालय ने इस संदर्भ में ऐतिहासिक कानूनों और न्यायिक नजीरों का विस्तृत ब्योरा पेश किया ताकि किसी भी प्रकार के भ्रम की गुंजाइश न रहे।

  • पासपोर्ट एक्ट 1967 का हवाला: मंत्रालय ने अपने पक्ष को मजबूती देने के लिए देश के बुनियादी कानून 'पासपोर्ट एक्ट 1967' का संदर्भ लिया। मंत्रालय ने कहा कि यह नियम आज या पिछले 12 वर्षों में तय नहीं हुआ है। पासपोर्ट अधिनियम की धाराएं स्पष्ट करती हैं कि कुछ विशेष और असाधारण परिस्थितियों में पासपोर्ट उन व्यक्तियों को भी जारी किया जा सकता है जो देश के पूर्ण नागरिक नहीं हैं (जैसे शरणार्थी या विशिष्ट दर्जे वाले लोग)।

  • बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: बयान में न्यायिक स्पष्टता का जिक्र करते हुए बताया गया कि साल 2013 में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण फैसलों से यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि पासपोर्ट को नागरिकता के अकाट्य साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। नागरिकता का निर्धारण पूरी तरह से नागरिकता अधिनियम (Citizenship Act) के प्रावधानों के तहत होता है।

  • पासपोर्ट सेवाओं के रिकॉर्ड आंकड़े: इस कानूनी स्पष्टीकरण के साथ-साथ डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क को मिली जानकारी के अनुसार, मंत्रालय ने पिछले कुछ वर्षों में पासपोर्ट इकोसिस्टम में हुए बड़े सुधारों के आंकड़े साझा किए। देश भर में पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्रों (POPSK) के नेटवर्क के विस्तार और सरलीकृत पुलिस वेरिफिकेशन प्रक्रियाओं के कारण पासपोर्ट जारी करने की अवधि में भारी कमी आई है।

इस महत्वपूर्ण मसले पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "यह बात पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए कि पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का अकाट्य सबूत नहीं रहा है। हमारा कानून और व्यवस्था इसी सिद्धांत पर काम करती है। पासपोर्ट एक्ट 1967 साफ कहता है कि यह दस्तावेज गैर-नागरिकों को भी विशेष परिस्थितियों में दिया जा सकता है। हम केवल इस स्थापित कानूनी स्थिति को दोहरा रहे हैं ताकि आम जनता और एजेंसियों के बीच कोई संशय न रहे।"

कानूनी विशेषज्ञों और वरिष्ठ वकीलों ने भी मंत्रालय के इस रुख का समर्थन किया है। कानूनविदों के मुताबिक, नागरिकता एक अलग संवैधानिक दर्जा है, जबकि पासपोर्ट एक विदेशी धरती पर यात्रा करने और राजनयिक संरक्षण प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार पत्र मात्र है।

विभिन्न वित्तीय संस्थानों, बैंकों और सरकारी विभागों में जहां अब तक पासपोर्ट को नागरिकता के एकमात्र प्रमाण के रूप में स्वीकार कर लिया जाता था, वहां अब अन्य सहायक दस्तावेजों (जैसे जन्म प्रमाण पत्र या नागरिकता प्रमाण पत्र) की मांग बढ़ सकती है। अदालतों में नागरिकता और अवैध प्रवासन से जुड़े मुकदमों में अब पासपोर्ट को ढाल बनाकर नागरिकता का दावा करना आसान नहीं होगा, क्योंकि अदालतों के पास अब मंत्रालय का बिल्कुल स्पष्ट रुख मौजूद है। यह स्पष्टता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के आव्रजन (Immigration) और प्रवासन नियमों को अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाएगी।

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पासपोर्ट प्राप्त करने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, डिजिटल और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए 'पासपोर्ट सेवा परियोजना 2.0' (PSP-V2.0) के तहत काम जारी रहेगा। आने वाले समय में चिप-आधारित ई-पासपोर्ट (e-Passport) के बड़े पैमाने पर रोलआउट की तैयारी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर सुरक्षा जांच और इमिग्रेशन की प्रक्रिया बेहद तेज हो जाएगी। सरकार सभी राज्य पुलिस बलों के साथ मिलकर वेरिफिकेशन सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर रही है ताकि नागरिकों को बिना किसी परेशानी के तय समय सीमा के भीतर उनका यात्रा दस्तावेज मिल सके।

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