धुएं का गुबार और चीख-पुकार... लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर की बहुमंजिला इमारत में भड़की भीषण आग, खिड़कियों से कूदे छात्र
Lucknow Fire Accident: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर की इमारत में भीषण आग लग गई है। दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में जुटी हैं।

- Lucknow Coaching Center Fire: लखनऊ के कोचिंग सेंटर की इमारत में लगी भीषण आग, मची अफरा-तफरी
- लखनऊ में बड़ा हादसा: हजरतगंज के कोचिंग इंस्टीट्यूट में लगी भयंकर आग, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
- लखनऊ फायर अपडेट: राजधानी लखनऊ के एक प्रतिष्ठित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग, दमकल की गाड़ियां मौके पर
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बेहद चिंताजनक और बड़ी दुर्घटना सामने आई है। लखनऊ के सबसे व्यस्त और प्रमुख व्यावसायिक इलाके हजरतगंज में स्थित एक बहुमंजिला कोचिंग संस्थान की इमारत में सोमवार (22 जून 2026) दोपहर अचानक भीषण आग लग गई। आग लगने के वक्त इमारत के भीतर सैकड़ों छात्र और कोचिंग स्टाफ मौजूद थे, जिससे पूरी बिल्डिंग में अफरा-तफरी और भगदड़ का माहौल बन गया। शुरुआती तौर पर आग लगने की वजह बिजली के पैनल में शॉर्ट सर्किट होना बताया जा रहा है। घटना की भयावहता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग (Fire Department) की कई गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं। फिलहाल, हाइड्रोलिक क्रेन की मदद से फंसे हुए छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
लखनऊ के हजरतगंज स्थित एक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में संचालित होने वाले कोचिंग सेंटर की तीसरी और चौथी मंजिल से अचानक धुएं का काला गुबार उठने लगा। देखते ही देखते आग की लपटों ने इमारत के मुख्य हिस्से और सीढ़ियों वाले रास्ते को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि क्लासरूम में पढ़ रहे छात्रों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। धुएं के कारण दम घुटने जैसी स्थिति पैदा होने पर कई छात्रों ने इमारत की खिड़कियों और शीशों को तोड़कर मदद की गुहार लगानी शुरू कर दी। स्थानीय नागरिकों की सूचना पर पहुंची पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमों ने सामूहिक रूप से एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह हादसा दोपहर करीब 2:30 बजे हुआ, जब संस्थान में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की क्लासेस चल रही थीं। अचानक नीचे की मंजिल पर लगे बिजली के मीटर बॉक्स से चिंगारी उठी और उसने पूरी वायरिंग को अपनी चपेट में ले लिया। चूंकि सीढ़ियों वाले रास्ते में धुआं भर गया था, इसलिए ऊपरी मंजिलों पर मौजूद बच्चे ऊपर ही फंसकर रह गए।
घबराए हुए कुछ छात्रों ने खिड़की से लटककर नीचे कूदने का भी प्रयास किया, लेकिन नीचे मौजूद स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों ने गद्दे और सीढ़ियां लगाकर उन्हें ऐसा करने से रोका और ढांढस बंधाया। दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचते ही सबसे पहले हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और सीढ़ियों की मदद से खिड़कियों के रास्ते फंसे हुए छात्र-छात्राओं को बाहर निकालना शुरू किया। अब तक करीब 40 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि कुछ बच्चों को मामूली चोटें और धुएं के कारण सांस लेने में तकलीफ होने की वजह से तुरंत एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया है। मौके पर मौजूद मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) ने मीडिया को बताया, "हमारी प्राथमिकता सबसे पहले इमारत के भीतर फंसे एक-एक बच्चे और स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकालना है। आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है, लेकिन केबिन और फॉल्स सीलिंग के कारण धुआं बहुत ज्यादा फैल गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही आग लगने के सटीक कारणों की जांच की जाएगी।" घटना की खबर फैलते ही कोचिंग सेंटर के बाहर अपने बच्चों की तलाश में पहुंचे माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। अभिभावकों ने संस्थानों में फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम न होने को लेकर कड़ा आक्रोश भी व्यक्त किया।
नजदीकी सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि उनके यहां लाए गए सभी छात्र खतरे से बाहर हैं। ज्यादातर बच्चों को घबराहट और धुएं के कारण प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। संकरी गलियों और बिना पर्याप्त वेंटिलेशन (धुआं निकलने का रास्ता) के चल रहे इन कोचिंग सेंटरों में फायर एनओसी (NOC) और इमरजेंसी एग्जिट (Emergency Exit) के नियमों की अनदेखी साफ उजागर हुई है। हजरतगंज के मुख्य मार्ग पर यह हादसा होने के कारण चारों तरफ लंबा जाम लग गया, जिससे राहत और बचाव दल की गाड़ियों को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद अब पूरे लखनऊ शहर और उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में चल रहे कोचिंग संस्थानों की सेफ्टी ऑडिट की मांग तेज हो गई है।
स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रेस्क्यू ऑपरेशन और आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद इस पूरी इमारत की जांच की जाएगी। यदि जांच में यह पाया गया कि कोचिंग संस्थान के पास वैध फायर एनओसी नहीं थी या उन्होंने सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया था, तो संस्थान के संचालकों और भवन मालिक के खिलाफ लापरवाही का आपराधिक मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए घायलों के मुफ्त और समुचित इलाज के निर्देश जिला प्रशासन को दिए हैं।
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