साक्ष्य ही है आपकी सबसे बड़ी ताकत- कॉल रिकॉर्डिंग और डिजिटल सबूतों के जरिए कैसे पहुंचाएं आरोपी को सलाखों के पीछे

महिलाओं के मामले में फोन पर होने वाली अभद्रता को कानून और भी गंभीरता से लेता है। यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को फोन पर गंदे कमेंट्स करता है, अश्लील बातें करता है या उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले शब्दों का प्रयोग करता है, तो यह भारतीय न्याय संहिता की धारा 79 के तहत दंडनीय है। इसमें महिला की निजता में खल

May 11, 2026 - 11:30
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साक्ष्य ही है आपकी सबसे बड़ी ताकत- कॉल रिकॉर्डिंग और डिजिटल सबूतों के जरिए कैसे पहुंचाएं आरोपी को सलाखों के पीछे
साक्ष्य ही है आपकी सबसे बड़ी ताकत- कॉल रिकॉर्डिंग और डिजिटल सबूतों के जरिए कैसे पहुंचाएं आरोपी को सलाखों के पीछे
  • फोन पर अभद्रता से न डरें, जानें अपने अधिकार: गाली-गलौज और धमकियों के खिलाफ ऐसे करें कानूनी कार्रवाई
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) के नए नियम: फोन पर गाली देना अब पड़ सकता है भारी, जेल और जुर्माने का है सख्त प्रावधान

आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन गया है, लेकिन इसके साथ ही फोन पर उत्पीड़न और गाली-गलौज की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं। अक्सर लोग अनजान नंबरों या जान-पहचान के लोगों द्वारा फोन पर दी जाने वाली गालियों और धमकियों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे अपराधी का मनोबल और बढ़ जाता है। भारत में अब कानून व्यवस्था बदल चुकी है और 1 जुलाई 2024 से लागू हुई 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) के तहत फोन पर किसी को अपमानित करना या गाली देना एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। यदि कोई व्यक्ति आपको फोन पर अपशब्द कहता है, तो आपको यह समझना चाहिए कि यह आपकी निजता और सम्मान के अधिकार का उल्लंघन है। कानून आपको ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की पूरी आजादी देता है, बशर्ते आप सही प्रक्रिया और अपने अधिकारों से अवगत हों।

फोन पर गाली-गलौज और धमकी देने के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराएं प्रभावी होती हैं। पूर्व के कानून (IPC) की जगह अब नई धाराओं ने ले ली है। यदि कोई आपको फोन पर जान से मारने की धमकी देता है या आपकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की बात करता है, तो इसे 'क्रिमिनल इंटिमिडेशन' माना जाता है। वहीं, फोन पर अभद्र भाषा का प्रयोग करना 'इन्टेन्शनल इन्सल्ट' यानी जानबूझकर अपमान करने के दायरे में आता है। इन अपराधों के लिए दोषी पाए जाने पर दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पहचान छिपाकर या गुमनाम नंबर से आपको परेशान कर रहा है, तो उसके लिए सजा के नियम और भी कड़े किए गए हैं, ताकि तकनीक का दुरुपयोग कर अपराध करने वालों को पकड़ा जा सके। महिलाओं के मामले में फोन पर होने वाली अभद्रता को कानून और भी गंभीरता से लेता है। यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को फोन पर गंदे कमेंट्स करता है, अश्लील बातें करता है या उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले शब्दों का प्रयोग करता है, तो यह भारतीय न्याय संहिता की धारा 79 के तहत दंडनीय है। इसमें महिला की निजता में खलल डालना और उसकी मर्यादा का अपमान करना शामिल है। इसके लिए अपराधी को तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है। कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि केवल शारीरिक हमला ही अपराध नहीं है, बल्कि शब्दों के माध्यम से किया गया मानसिक उत्पीड़न भी उतना ही गंभीर है। पीड़ित महिलाएं इस मामले में महिला हेल्पलाइन नंबर 1091 या 181 पर भी संपर्क कर सकती हैं, जहाँ उन्हें कानूनी सलाह और सुरक्षा दोनों प्रदान की जाती है। फोन पर गाली-गलौज होने की स्थिति में सबसे पहले कॉल रिकॉर्डिंग फीचर को ऑन करें। यदि संभव हो, तो कॉल का समय, तारीख और कॉल करने वाले का नंबर सुरक्षित रख लें। यह डिजिटल साक्ष्य पुलिस जांच और कोर्ट की कार्यवाही में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कानूनी कार्रवाई की शुरुआत करने के लिए सबसे पहला कदम पुलिस में शिकायत दर्ज कराना है। आप अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करा सकते हैं। यदि पुलिस FIR दर्ज करने से मना करती है, तो आप वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों या मजिस्ट्रेट के पास गुहार लगा सकते हैं। इसके अलावा, यदि उत्पीड़न डिजिटल माध्यमों या इंटरनेट कॉलिंग के जरिए हो रहा है, तो आप 'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' (cybercrime.gov.in) पर अपनी शिकायत ऑनलाइन भी दर्ज कर सकते हैं। शिकायत करते समय अपने पास मौजूद सभी कॉल लॉग्स और रिकॉर्डिंग्स की एक कॉपी जरूर संलग्न करें। आज के समय में पुलिस के पास ऐसे तकनीकी सेल मौजूद हैं जो वर्चुअल नंबरों या अपनी लोकेशन छिपाने वाले अपराधियों को भी ट्रैक करने में सक्षम हैं। फोन पर होने वाली गाली-गलौज केवल आपराधिक मामला ही नहीं है, बल्कि यह दूरसंचार नियमों का भी उल्लंघन है। आप अपने टेलीकॉम ऑपरेटर (जैसे जियो, एयरटेल, वीआई) से भी उस विशेष नंबर की शिकायत कर सकते हैं। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के नियमों के अनुसार, बार-बार परेशान करने वाले नंबरों को ब्लॉक किया जा सकता है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, यदि कोई कंपनी का प्रतिनिधि या रिकवरी एजेंट आपको फोन पर गाली देता है, तो आप संबंधित बैंक या कंपनी के नोडल अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। कानून ने उपभोक्ताओं को भी यह अधिकार दिया है कि वे अपनी मानसिक शांति भंग करने वाले किसी भी व्यावसायिक या व्यक्तिगत कॉल के खिलाफ आवाज उठा सकें।

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