बॉक्स ऑफिस पर 'गिन्नी वेड्स सनी 2' की बेहद सुस्त शुरुआत: अविनाश तिवारी और मेधा शंकर की जोड़ी दर्शकों को रिझाने में रही नाकाम।

बॉलीवुड में सीक्वल फिल्मों का दौर काफी समय से चल रहा है, लेकिन हर बार यह फॉर्मूला सफल साबित हो, ऐसा जरूरी नहीं है। इसी कड़ी

Apr 25, 2026 - 11:42
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बॉक्स ऑफिस पर 'गिन्नी वेड्स सनी 2' की बेहद सुस्त शुरुआत: अविनाश तिवारी और मेधा शंकर की जोड़ी दर्शकों को रिझाने में रही नाकाम।
बॉक्स ऑफिस पर 'गिन्नी वेड्स सनी 2' की बेहद सुस्त शुरुआत: अविनाश तिवारी और मेधा शंकर की जोड़ी दर्शकों को रिझाने में रही नाकाम।
  • ठंडी पड़ी 'गिन्नी वेड्स सनी 2' की चमक: पहले दिन के कलेक्शन ने फिल्म पंडितों को चौंकाया, क्या वीकेंड पर संभल पाएगी फिल्म?
  • अविनाश और मेधा की केमिस्ट्री का जादू बॉक्स ऑफिस पर फेल, सिनेमाघरों में छाई वीरानी; दूसरे भाग की कहानी ने प्रशंसकों को किया निराश

बॉलीवुड में सीक्वल फिल्मों का दौर काफी समय से चल रहा है, लेकिन हर बार यह फॉर्मूला सफल साबित हो, ऐसा जरूरी नहीं है। इसी कड़ी में हालिया रिलीज फिल्म 'गिन्नी वेड्स सनी 2' की बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत बेहद निराशाजनक रही है। अविनाश तिवारी और मेधा शंकर जैसे उभरते कलाकारों के मुख्य अभिनय से सजी इस फिल्म को लेकर सिनेमा प्रेमियों के बीच काफी उम्मीदें थीं, लेकिन पहले दिन के शुरुआती आंकड़ों ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। फिल्म के प्रति दर्शकों की बेरुखी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के कई प्रमुख केंद्रों पर मॉर्निंग और नून शो की ऑक्यूपेंसी मात्र 8 से 10 प्रतिशत के बीच सिमट कर रह गई। इस सुस्त शुरुआत ने फिल्म के भविष्य पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। फिल्म की कहानी और इसके निर्माण के पीछे के उद्देश्यों पर अगर नजर डालें, तो ऐसा प्रतीत होता है कि निर्माताओं ने पहले भाग की सफलता को भुनाने की कोशिश की थी। हालांकि, पहले भाग की तुलना में इस बार न तो पटकथा में वह धार नजर आई और न ही संगीत में वह जादू, जो दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच लाता। फिल्म के पहले दिन का कलेक्शन उम्मीद से काफी कम रहा है, जो यह संकेत देता है कि दर्शक अब केवल बड़े नाम या सीक्वल के टैग के भरोसे थिएटर नहीं आ रहे हैं। फिल्म के मुख्य कलाकारों, अविनाश तिवारी और मेधा शंकर ने अपनी तरफ से बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश की है, लेकिन कमजोर निर्देशन और उबाऊ कहानी के सामने उनकी प्रतिभा भी दबती हुई नजर आई। फिल्म समीक्षकों के अनुसार, फिल्म के प्रचार-प्रसार में बरती गई कमी और बड़े बजट की अन्य फिल्मों के साथ मुकाबले ने भी इसके शुरुआती कलेक्शन को काफी हद तक प्रभावित किया है। क्षेत्रीय बाजारों में भी फिल्म की पकड़ उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखी।

बॉक्स ऑफिस की बारीकियों को समझने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि फिल्म की मार्केटिंग रणनीति में कुछ बुनियादी खामियां थीं। फिल्म के ट्रेलर और गानों ने वह बज क्रिएट नहीं किया जो एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म के लिए जरूरी होता है। पहले दिन के कारोबार में बड़े शहरों के मल्टीप्लेक्सों से थोड़ी बहुत उम्मीद थी, लेकिन वहां भी फिल्म को खास तवज्जो नहीं मिली। छोटे शहरों और सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में तो स्थिति और भी चिंताजनक रही, जहां कई शो दर्शकों की कमी के कारण रद्द करने की नौबत तक आ गई। यह स्थिति तब है जब फिल्म को पर्याप्त संख्या में स्क्रीन आवंटित की गई थीं, लेकिन कंटेंट की कमी ने वितरण रणनीति को पूरी तरह विफल कर दिया। अभिनय की दृष्टि से देखा जाए तो अविनाश तिवारी ने सनी के किरदार में जान फूंकने की पूरी कोशिश की है, लेकिन स्क्रिप्ट की सीमाएं उन्हें एक दायरे से बाहर निकलने की अनुमति नहीं देतीं। वहीं मेधा शंकर, जिन्होंने अपनी पिछली फिल्म से काफी सुर्खियां बटोरी थीं, इस फिल्म में काफी साधारण नजर आईं। दोनों के बीच की केमिस्ट्री जो पर्दे पर आग लगा सकती थी, वह पटकथा की धीमी गति और बेदम संवादों की वजह से फीकी पड़ गई। फिल्म के सहायक कलाकारों ने भी औसत दर्जे का प्रदर्शन किया है, जिससे पूरी फिल्म एक थकाऊ अनुभव बनकर रह गई है। संवादों में ताजगी का अभाव और पुरानी घिसी-पीटी कॉमेडी की वजह से युवा दर्शक वर्ग फिल्म से जुड़ाव महसूस नहीं कर पा रहा है।

फिल्म के संगीत विभाग की बात करें तो यह भी फिल्म की असफलता का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। आमतौर पर रोमांटिक कॉमेडी फिल्मों की सफलता में उनके गानों का बड़ा योगदान होता है, जो फिल्म के रिलीज होने से पहले ही चार्टबस्टर बन जाते हैं। 'गिन्नी वेड्स सनी 2' के मामले में एक भी गाना ऐसा नहीं रहा जो लोगों की जुबान पर चढ़ सके। बैकग्राउंड स्कोर भी कुछ खास प्रभावित नहीं करता और कई जगहों पर बेवजह भारी लगता है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और एडिटिंग में भी काफी खामियां नजर आती हैं, जहां कई दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे खिंचे हुए लगते हैं, जिससे दर्शकों का ध्यान फिल्म से भटकने लगता है। अब सबकी नजरें शनिवार और रविवार के कलेक्शन पर टिकी हैं। अक्सर देखा गया है कि जो फिल्में शुक्रवार को धीमी शुरुआत करती हैं, वे शनिवार को वर्ड ऑफ माउथ (दर्शकों की प्रशंसा) के जरिए वापसी करती हैं। लेकिन इस फिल्म के लिए रास्ता काफी कठिन लग रहा है क्योंकि शुरुआती समीक्षाएं बहुत उत्साहजनक नहीं हैं। यदि फिल्म दूसरे और तीसरे दिन अपनी कमाई में कम से कम 50 से 60 प्रतिशत की वृद्धि नहीं करती है, तो इसके लिए अपना बजट निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। सिनेमाघरों के मालिकों को भी डर है कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो सोमवार से फिल्म के शो में बड़ी कटौती की जा सकती है ताकि अन्य सफल फिल्मों को जगह दी जा सके।

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