मुंबई में 'डिजिटल जाल' बिछाने वाला आरोपी अशरफ सिद्दीकी गिरफ्तार, हिंदू लड़कियों को अश्लील वीडियो भेजकर प्रताड़ित करने का आरोप।

मुंबई की आग्रीपाडा पुलिस ने एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले में कार्रवाई करते हुए अशरफ सिद्दीकी नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार

Apr 24, 2026 - 10:49
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मुंबई में 'डिजिटल जाल' बिछाने वाला आरोपी अशरफ सिद्दीकी गिरफ्तार, हिंदू लड़कियों को अश्लील वीडियो भेजकर प्रताड़ित करने का आरोप।
मुंबई में 'डिजिटल जाल' बिछाने वाला आरोपी अशरफ सिद्दीकी गिरफ्तार, हिंदू लड़कियों को अश्लील वीडियो भेजकर प्रताड़ित करने का आरोप।
  • आग्रीपाडा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: ऑफिस की सहकर्मी को अश्लील मैसेज भेजकर फंसाने की कोशिश करने वाला सिरफिरा पहुंचा सलाखों के पीछे
  • कॉर्पोरेट जगत में महिला सुरक्षा पर सवाल: मुंबई पुलिस ने सहकर्मी के डिजिटल उत्पीड़न के मामले में अशरफ को दबोचा

मुंबई की आग्रीपाडा पुलिस ने एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले में कार्रवाई करते हुए अशरफ सिद्दीकी नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि वह विशेष रूप से हिंदू लड़कियों को अपना निशाना बनाता था और उन्हें जाल में फंसाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेता था। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी न केवल आपत्तिजनक सामग्री भेजता था, बल्कि वह लड़कियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए अश्लील वीडियो और संदेशों का भी उपयोग करता था। इस मामले के प्रकाश में आने के बाद महानगरीय सुरक्षा और कार्यस्थलों पर महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों को लेकर चिंता गहरा गई है। आग्रीपाडा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच की प्रक्रिया को तेज कर दिया है ताकि इस नेटवर्क के अन्य संभावित पहलुओं का पता लगाया जा सके। मामले की विस्तृत पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक कॉर्पोरेट ऑफिस से हुई। मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस मामले की मुख्य पीड़िता एक प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट कंपनी के लिए 'थर्ड पार्टी टेलीकॉलर' के रूप में कार्य करती है। आरोपी अशरफ सिद्दीकी भी उसी कंपनी में कार्यरत था, जहां उसने धीरे-धीरे पीड़िता की जानकारी और उसका संपर्क नंबर हासिल किया। सहकर्मी होने का फायदा उठाकर उसने पहले पीड़िता से सामान्य संवाद स्थापित करने का प्रयास किया, लेकिन बाद में उसकी नीयत बदल गई। आरोपी ने पीड़िता को लगातार परेशान करना शुरू कर दिया और उसे उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले संदेश भेजने लगा, जिससे पीड़िता अत्यंत तनाव और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हो गई।

पुलिस की जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि आरोपी अशरफ सिद्दीकी की कार्यप्रणाली केवल एक पीड़िता तक सीमित नहीं थी। वह सुनियोजित तरीके से सोशल मीडिया और कार्यस्थल के संपर्कों का उपयोग करके हिंदू लड़कियों की पहचान करता था और फिर उन्हें अश्लील वीडियो भेजकर ब्लैकमेल करने या अनुचित संबंध बनाने के लिए दबाव डालता था। जब पीड़िता ने उसके व्यवहार का विरोध किया, तो आरोपी ने उसे और अधिक परेशान करना शुरू कर दिया। पीड़िता ने साहस का परिचय देते हुए मामले की जानकारी अपने परिवार को दी और आग्रीपाडा पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता के बयान और उसके पास मौजूद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए जाल बिछाया और आरोपी अशरफ को उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया। भारतीय कानून के अनुसार, किसी भी महिला को उसकी मर्जी के बिना अश्लील संदेश, चित्र या वीडियो भेजना 'साइबर स्टॉकिंग' और यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है। आईटी एक्ट की धारा 67 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत ऐसे अपराधों में कड़ी सजा का प्रावधान है। पुलिस प्रशासन अपील करता है कि यदि कोई भी व्यक्ति डिजिटल माध्यम से आपको परेशान कर रहा है, तो डरे बिना तुरंत शिकायत दर्ज कराएं, क्योंकि आपकी चुप्पी अपराधी का मनोबल बढ़ाती है।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी अशरफ सिद्दीकी के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर लिया है, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। प्रारंभिक तकनीकी विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि आरोपी के फोन में कई अन्य लड़कियों के संपर्क और आपत्तिजनक डेटा मौजूद हो सकता है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या वह किसी संगठित गिरोह का हिस्सा था जो विशेष विचारधारा या मंशा के तहत लड़कियों को अपना शिकार बनाता था। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि आरोपी सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बदलकर या अपनी गतिविधियों को गुप्त रखकर इस तरह के अपराधों को अंजाम दे रहा था। उसके बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की भी जांच की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि उसे इस काम में किसी और का सहयोग तो प्राप्त नहीं था। कार्यस्थल पर इस तरह के अपराध ने कॉर्पोरेट जगत में 'आंतरिक शिकायत समितियों' (ICC) की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। चूंकि पीड़िता एक थर्ड पार्टी कर्मचारी थी, इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी ने अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए किन प्रोटोकॉल्स का पालन किया था। पुलिस इस दिशा में भी जांच कर रही है कि क्या कंपनी के अन्य कर्मचारियों को भी आरोपी की इन गतिविधियों के बारे में कोई भनक थी। आग्रीपाडा पुलिस ने समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया है कि वे ऐसे अपराधियों के झांसे में न आएं और डिजिटल दुनिया में अपनी गोपनीयता को लेकर सतर्क रहें। आरोपी के खिलाफ मजबूत चार्जशीट तैयार की जा रही है ताकि उसे अदालत से सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।

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