बिहार विधानसभा में सम्राट चौधरी की अग्निपरीक्षा: भाजपा के पहले मुख्यमंत्री आज साबित करेंगे अपना बहुमत।
बिहार की राजनीति में 24 अप्रैल 2026 की तारीख एक नए अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रही है। 15 अप्रैल को बिहार के 24वें मुख्यमंत्री
- बिहार की राजनीति में नए सूर्य का उदय: नीतीश युग के बाद सम्राट चौधरी का शक्ति प्रदर्शन, फ्लोर टेस्ट पर टिकीं सबकी नजरें
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का आज शक्ति परीक्षण, 202 विधायकों के समर्थन के साथ बड़ी जीत का दावा
बिहार की राजनीति में 24 अप्रैल 2026 की तारीख एक नए अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रही है। 15 अप्रैल को बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ लेने वाले सम्राट चौधरी आज विधानसभा के विशेष सत्र में अपनी सरकार का बहुमत साबित करेंगे। यह राज्य के राजनीतिक इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ है, क्योंकि पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री के रूप में सदन का नेतृत्व कर रहा है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और उनके द्वारा उत्तराधिकारी के रूप में सम्राट चौधरी को आशीर्वाद देने के बाद राज्य की सत्ता का संतुलन पूरी तरह बदल गया है। आज होने वाला फ्लोर टेस्ट केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सम्राट चौधरी के नेतृत्व और एनडीए की एकजुटता का भी बड़ा प्रमाण होगा।
बिहार विधानसभा की मौजूदा सदस्य संख्या 243 है, जिसमें बहुमत साबित करने के लिए 122 विधायकों के जादुई आंकड़े की आवश्यकता होती है। वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को देखें तो सम्राट चौधरी की सरकार अत्यंत आरामदायक स्थिति में नजर आ रही है। एनडीए खेमे का दावा है कि उन्हें भाजपा के 89 और जदयू के 85 विधायकों के साथ-साथ अन्य घटक दलों और निर्दलीय सदस्यों को मिलाकर कुल 202 विधायकों का भारी समर्थन प्राप्त है। वहीं दूसरी ओर, विपक्षी खेमे में बिखराव की खबरें हैं, जहां उनके पास संख्या बल केवल 35 से 41 के बीच सिमटा हुआ नजर आ रहा है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने आज सुबह 11 बजे विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें विश्वास मत प्रस्ताव पर चर्चा के बाद मतदान कराया जाएगा।
सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार में 'लव-कुश' (कुर्मी-कोइरी) समीकरण को साधने की एक बड़ी रणनीतिक कोशिश मानी जा रही है। नीतीश कुमार द्वारा इस पद को छोड़ने के पीछे का सबसे बड़ा कारण उनकी राष्ट्रीय राजनीति में सक्रियता और राज्यसभा जाने का निर्णय था। सम्राट चौधरी, जो पहले पिछली सरकार में उपमुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की भूमिका निभा चुके हैं, अब मुख्यमंत्री के रूप में अपनी प्रशासनिक क्षमता को सिद्ध करने के लिए तैयार हैं। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद उन्होंने सचिवालय में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर यह स्पष्ट संदेश दिया था कि उनकी सरकार का मुख्य एजेंडा विकास और कानून का राज होगा। आज का शक्ति प्रदर्शन उनके इसी आत्मविश्वास की अगली कड़ी है।
इस नई सरकार के गठन में गठबंधन के संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ जनता दल (यूनाइटेड) के दो दिग्गज नेताओं, विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। यह तालमेल इस बात का संकेत है कि भाजपा और जदयू के बीच का गठबंधन अब केवल चुनावी मजबूरी नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक राजनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहा है। विधानसभा में आज होने वाली चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष द्वारा पिछले दो दशकों में हुए विकास कार्यों और भविष्य की योजनाओं को केंद्र में रखे जाने की संभावना है, जबकि विपक्ष इसे 'जनादेश का अपमान' बताकर घेरने की कोशिश कर सकता है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए यह फ्लोर टेस्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें न केवल विपक्षी दलों के हमलों का सामना करना है, बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर उन नेताओं के विश्वास को भी जीतना है जो उन्हें 'बाहरी' या हालिया आगंतुक मानते रहे हैं। सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर विभिन्न दलों से होते हुए भाजपा तक पहुंचा है, लेकिन उनकी संगठन शक्ति और पिछड़ा वर्ग के बीच उनकी लोकप्रियता ने उन्हें इस सर्वोच्च पद तक पहुंचाया है। आज सदन में उनकी वाकपटुता और तर्कों से यह तय होगा कि वे आने वाले साढ़े चार वर्षों तक बिहार के शासन को किस दिशा में ले जाएंगे। उन्होंने पहले ही संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को राज्य में धरातल पर उतारना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रशासनिक स्तर पर भी इस फ्लोर टेस्ट के बाद बड़े बदलावों की उम्मीद की जा रही है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए हैं कि बहुमत साबित करने के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार मई के पहले सप्ताह में किया जाएगा। फिलहाल मुख्यमंत्री ने गृह विभाग सहित 29 महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे हैं, जबकि शेष विभाग उपमुख्यमंत्रियों के बीच साझा किए गए हैं। आज की कार्यवाही के दौरान सदन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और सभी विधायकों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विपक्षी दल केवल रस्म अदायगी के लिए ही विरोध करेंगे, क्योंकि संख्या बल का पलड़ा पूरी तरह से सम्राट चौधरी के पक्ष में झुका हुआ है।
What's Your Reaction?







