दिल्ली में हाई-प्रोफाइल चोरी: वेरिफिकेशन से पहले ही करोड़ों की ज्वेलरी और नकदी लेकर फरार हुई नई नौकरानी।
देश की राजधानी दिल्ली के एक पॉश इलाके से दिल दहला देने वाली और आंखें खोल देने वाली वारदात सामने आई है, जहां एक घरेलू
- विश्वासघात की सनसनीखेज वारदात: आधार कार्ड देने के बहाने घरेलू सहायिका ने साफ किया डेढ़ करोड़ का घर
- पहचान पत्र मांगने पर करती रही टालमटोल, तीसरे ही दिन मालिक को दे गई करोड़ों का चूना
देश की राजधानी दिल्ली के एक पॉश इलाके से दिल दहला देने वाली और आंखें खोल देने वाली वारदात सामने आई है, जहां एक घरेलू सहायिका ने काम पर रखने के महज 72 घंटों के भीतर अपने मालिक के घर में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की चोरी को अंजाम दिया। यह घटना उस समय घटी जब घर के मालिक लगातार उस महिला से उसकी पहचान के प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड की मांग कर रहे थे। आरोपी महिला हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर पहचान पत्र देने की बात को अगले दिन पर टाल देती थी। इसी टालमटोल के बीच, जब उसे मौका मिला, तो उसने अलमारियों के ताले तोड़कर वहां रखे कीमती हीरे-सोने के जेवरात और भारी मात्रा में नकदी पर हाथ साफ कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली के रईस इलाकों में बिना पुलिस वेरिफिकेशन के घरेलू सहायकों को रखने की गंभीर लापरवाही को सामने ला दिया है।
वारदात का विवरण देते हुए पीड़ित परिवार ने बताया कि उन्हें एक परिचित के माध्यम से इस सहायिका के बारे में जानकारी मिली थी। घर में काम की अधिकता को देखते हुए उन्होंने उसे तुरंत काम पर रख लिया। पहले दिन जब उससे पहचान पत्र मांगा गया, तो उसने कहा कि उसका कार्ड गांव में छूट गया है और वह अगले दिन मंगवा लेगी। दूसरे दिन उसने मोबाइल में फोटो होने का दावा किया लेकिन फोन खराब होने का बहाना बना दिया। तीसरे दिन, जब घर के सदस्य किसी काम से बाहर गए थे और कुछ लोग घर के दूसरे हिस्से में व्यस्त थे, तब महिला ने इस स्थिति का फायदा उठाया। उसने बड़ी ही सफाई से मास्टर बेडरूम की अलमारी से डेढ़ करोड़ रुपये की संपत्ति चोरी की और बिना किसी को भनक लगे पिछले दरवाजे से फरार हो गई। पुलिस की प्राथमिक जांच के अनुसार, यह पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा प्रतीत होती है। आरोपी महिला ने घर में प्रवेश करते ही सबसे पहले उन जगहों की रेकी की जहां कीमती सामान रखा जाता था। उसने जानबूझकर आधार कार्ड देने में देरी की ताकि वह अपनी असली पहचान छिपा सके और वारदात के बाद उसे पकड़ना मुश्किल हो जाए। पुलिस को संदेह है कि वह किसी बड़े गिरोह की सदस्य हो सकती है जो इसी तरह पॉश कॉलोनियों में घरेलू सहायिका बनकर घुसते हैं और कुछ ही दिनों में हाथ साफ कर गायब हो जाते हैं। घर के सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पता चला है कि महिला ने बाहर निकलने के बाद एक संदिग्ध वाहन का सहारा लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बाहर उसके साथी उसका इंतजार कर रहे थे।
दिल्ली पुलिस समय-समय पर एडवाइजरी जारी करती है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को घर में काम पर रखने से पहले उसका पुलिस वेरिफिकेशन और आधार कार्ड की जांच अनिवार्य रूप से कराएं। अधिकांश मामलों में अपराधी फर्जी नाम-पते का सहारा लेते हैं। यदि मालिक समय रहते संबंधित थाने में नौकर का विवरण जमा करा दें, तो ऐसे अपराधियों के मन में पकड़े जाने का भय बना रहता है और वारदात होने की स्थिति में उन्हें ट्रैक करना आसान हो जाता है। इस चोरी ने पीड़ित परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। उनका कहना है कि वे महिला की बातों में इसलिए आ गए क्योंकि वह देखने में बेहद सीधी और काम में कुशल लग रही थी। उसने घर के काम को बड़ी ही तत्परता से संभाला था, जिससे किसी को उस पर शक नहीं हुआ। चोरी किए गए सामान में पुश्तैनी गहने, हीरों के सेट और व्यापार के सिलसिले में घर में रखी गई बड़ी नकदी शामिल है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कई टीमें गठित की हैं और उस एजेंट या परिचित से भी पूछताछ की जा रही है जिसने इस महिला को काम दिलवाया था। पुलिस का मानना है कि पहचान पत्र के लिए बार-बार दबाव बनाए जाने के कारण ही उसने तीसरे दिन ही वारदात को अंजाम देने का फैसला किया, वरना वह कुछ और दिनों तक रुककर बड़ी चोरी की फिराक में थी।
दिल्ली के इस रिहायशी इलाके में हुई इस बड़ी वारदात के बाद स्थानीय निवासियों में भी काफी डर और रोष का माहौल है। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) ने अब कड़े नियम लागू करने का निर्णय लिया है कि बिना गेट पास और पहचान पत्र के किसी भी बाहरी व्यक्ति को परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह देखा गया है कि लोग अक्सर जल्दबाजी में या किसी के कहने पर बिना पूरी पड़ताल किए घरेलू सहायकों को चाबियां तक सौंप देते हैं। इस मामले में भी आधार कार्ड की अनुपलब्धता एक बड़ी चेतावनी थी, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ा। अब पुलिस सर्विलांस और मुखबिरों के माध्यम से आरोपी महिला के ठिकानों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। तकनीकी जांच में जुटी टीमों ने पाया है कि महिला ने जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया था, वह भी किसी फर्जी पहचान पत्र पर लिया गया था। वारदात के तुरंत बाद से ही वह नंबर बंद आ रहा है। पुलिस अब उन रास्तों के सीसीटीवी कैमरे चेक कर रही है जहां से आरोपी महिला के भागने की संभावना है। फोरेंसिक टीम ने अलमारी और दरवाजों से फिंगरप्रिंट्स के नमूने लिए हैं ताकि उन्हें अपराधियों के रिकॉर्ड से मैच किया जा सके। यह मामला उन सभी के लिए एक सबक है जो पहचान पत्र मांगने पर टालमटोल करने वाले कर्मचारियों को अपने घर की सुरक्षा सौंप देते हैं। फिलहाल, पुलिस की कई टीमें दिल्ली के नजदीकी राज्यों और आरोपी महिला के बताए गए संभावित पतों पर छापेमारी कर रही हैं। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि जल्द ही अपराधी पकड़ी जाएगी और उनके जीवनभर की कमाई वापस मिल सकेगी।
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