चेन्नई से कोलकाता तक वोटिंग की धूम: कमल हासन, रजनीकांत और ममता बनर्जी सहित दिग्गजों ने किया मतदान।
देश के दो प्रमुख राज्यों, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में आज लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव मनाया जा रहा है। 23 अप्रैल 2026 की सुबह
- लोकतंत्र का महापर्व 2026: तमिलनाडु की सभी 234 सीटों और बंगाल के प्रथम चरण में मतदान का शंखनाद
- चुनावी समर 2026: तमिलनाडु में स्टालिन बनाम पलानीस्वामी और बंगाल में सत्ता के लिए पहले चरण का कड़ा मुकाबला
देश के दो प्रमुख राज्यों, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में आज लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव मनाया जा रहा है। 23 अप्रैल 2026 की सुबह होते ही दोनों राज्यों में मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं। तमिलनाडु में जहां सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक साथ मतदान हो रहा है, वहीं पश्चिम बंगाल में 294 सीटों के लिए आठ चरणों में होने वाले चुनाव के पहले चरण की वोटिंग 152 निर्वाचन क्षेत्रों में शुरू हुई। चुनाव आयोग ने इस महापर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। दोनों राज्यों के मतदाता अपनी क्षेत्रीय अस्मिता, विकास और भविष्य की नीतियों को ध्यान में रखकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, जो आने वाले पांच वर्षों के लिए सत्ता की चाबी किसके हाथ होगी, यह तय करेगा। तमिलनाडु में इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प मोड़ पर है। द्रविड़ राजनीति के दो स्तंभों, द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच की पारंपरिक लड़ाई के साथ-साथ इस बार कुछ नए चेहरों और गठबंधनों ने मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है। चेन्नई के विभिन्न मतदान केंद्रों पर सुबह से ही फिल्मी सितारों और राजनीतिक दिग्गजों का जमावड़ा लगा रहा। अभिनेता और मक्कल निधि मय्यम के प्रमुख कमल हासन अपनी बेटी श्रुति हासन के साथ अलवरपेट स्थित केंद्र पर वोट डालने पहुंचे। सुपरस्टार रजनीकांत ने भी अपनी बेटी सौंदर्या के साथ मतदान किया। इन सितारों की मौजूदगी ने न केवल प्रशंसकों में उत्साह भरा, बल्कि आम नागरिकों को भी भारी संख्या में घर से बाहर निकलकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी अपने परिवार के साथ चेन्नई में मतदान कर जीत का भरोसा जताया।
पश्चिम बंगाल की बात करें तो पहले चरण में 16 जिलों की 152 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। राज्य में चुनावी हिंसा के इतिहास को देखते हुए इस बार केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, जबकि विपक्षी दल इसे परिवर्तन का चुनाव बता रहे हैं। पहले चरण में मुख्य रूप से जंगलमहल और उत्तरी बंगाल के कुछ हिस्सों में मतदान हो रहा है। सुबह 9 बजे तक बंगाल में मतदान का प्रतिशत उत्साहजनक रहा, जो यह दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपने अधिकारों के प्रति कितने सजग हैं। कई मतदान केंद्रों पर 'लाल अलर्ट' घोषित होने के बावजूद शांतिपूर्ण मतदान की खबरें आ रही हैं, जो चुनाव आयोग के लिए राहत की बात है। इस बार के चुनावों में पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। तमिलनाडु में लगभग 14.6 लाख और बंगाल में भी लाखों युवा मतदाता पहली बार बटन दबा रहे हैं। वहीं, महिला मतदाताओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए कई 'पिंक बूथ' बनाए गए हैं, जिनका संचालन पूरी तरह से महिला कर्मियों द्वारा किया जा रहा है। दोनों राज्यों के राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी घोषणाओं में महिलाओं और युवाओं को केंद्र में रखा है, जो परिणामों में निर्णायक साबित हो सकते हैं।
राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो तमिलनाडु में द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन का मुकाबला अन्नाद्रमुक और भाजपा के नेतृत्व वाले मोर्चों से है। अभिनेता विजय की नई पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) के चुनावी मैदान में होने से युवा वोटों के बंटवारे की संभावना जताई जा रही है। विजय ने खुद नीलंकरई में वोट डाला, जहां उनके प्रशंसकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। उधर बंगाल में, भाजपा और वाम-कांग्रेस गठबंधन तृणमूल कांग्रेस को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। पहले चरण की ये 152 सीटें किसी भी दल के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। चुनाव आयोग ने तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करते हुए वेबकास्टिंग के जरिए संवेदनशील बूथों पर सीधी नजर रखी है ताकि किसी भी तरह की धांधली को रोका जा सके। दोपहर होते-होते तमिलनाडु में मतदान का प्रतिशत 35% के पार पहुंच गया, जबकि बंगाल में यह आंकड़ा 40% को छूता नजर आया। चेन्नई की गर्मी और बंगाल की उमस भी मतदाताओं के हौसलों को पस्त नहीं कर पाई। दिग्गजों के वोट डालने की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर भी काफी हलचल मचाई। अभिनेता अजित कुमार ने सुबह-सुबह थिरुवनमियूर में वोट डाला, जिससे उनके प्रशंसक काफी खुश दिखे। वहीं, बंगाल के कई इलाकों में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए विशेष वाहन सुविधाओं का प्रबंध किया गया था। यह दृश्य भारतीय लोकतंत्र की उस मजबूती को दर्शाते हैं जहां हर एक वोट की कीमत और गरिमा को सर्वोपरि रखा गया है।
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