बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने पैतृक गांव बुढ़ाना में 55 बीघा कृषि भूमि खरीदी।

बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी हाल ही में अपने पैतृक जिले मुजफ्फरनगर पहुंचे, जहां उन्होंने अपने जन्मस्थान बुढ़ाना में

Mar 13, 2026 - 10:26
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बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने पैतृक गांव बुढ़ाना में 55 बीघा कृषि भूमि खरीदी।
बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने पैतृक गांव बुढ़ाना में 55 बीघा कृषि भूमि खरीदी।
  • मुजफ्फरनगर के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में खुद पहुंचकर कराई रजिस्ट्री, भाइयों के साथ की प्रक्रिया पूरी
  • ईद तक गांव में रहने की योजना, जड़ों से जुड़ाव और शांत जीवन की इच्छा

बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी हाल ही में अपने पैतृक जिले मुजफ्फरनगर पहुंचे, जहां उन्होंने अपने जन्मस्थान बुढ़ाना में करीब 55 बीघा कृषि भूमि की खरीदारी पूरी की। यह भूमि बुढ़ाना बांगर क्षेत्र में स्थित है, जिसे उन्होंने अभिषेक जैन सहित सात व्यक्तियों से खरीदा है। रजिस्ट्री की प्रक्रिया के लिए अभिनेता स्वयं उप-निबंधक कार्यालय पहुंचे और आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। उनके साथ उनके भाई फैजुद्दीन सिद्दीकी और अन्य परिजन भी मौजूद थे। इस खरीदारी की कुल कीमत लगभग छह करोड़ रुपये बताई जा रही है। नवाजुद्दीन का जन्म 19 मई 1974 को बुढ़ाना में हुआ था और उनका परिवार मूल रूप से कृषि पृष्ठभूमि से संबंधित है, जहां उनके पिता नवाबुद्दीन भी किसान थे। यह कदम उनके गांव से गहरे जुड़ाव को दर्शाता है, जहां वे बचपन से ही खेती-बाड़ी में भाग लेते आए हैं।

नवाजुद्दीन सिद्दीकी की यह खरीदारी उनके जीवन के उस पहलू को सामने लाती है जो हमेशा से कृषि और ग्रामीण जीवन से जुड़ा रहा है। वे अक्सर मुंबई की व्यस्त जिंदगी से दूर अपने गांव लौटते हैं और खेतों में समय बिताते हैं। पहले भी उन्होंने बुढ़ाना में परिवार की जमीन पर खेती की है और स्थानीय किसानों को केंद्र पिवट सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों से परिचित कराया था, जिससे पानी की बचत हुई और फसल उत्पादन बढ़ा। इस नई भूमि की खरीद से वे अपनी कृषि गतिविधियों को और विस्तार दे सकेंगे। अभिनेता का मानना है कि खेती उन्हें प्रेरणा देती है और शहर की भागदौड़ से दूर रहकर वे मानसिक शांति प्राप्त करते हैं। बुढ़ाना में उनकी उपस्थिति स्थानीय लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहती है, क्योंकि वे सादगी से जीवन जीते हैं और गांव की समस्याओं में रुचि लेते हैं।

रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवाजुद्दीन ने कुछ समय बुढ़ाना में ही बिताने का फैसला किया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार वे ईद के अवसर तक गांव में रहेंगे और परिवार के साथ समय व्यतीत करेंगे। यह दौर उनके लिए न केवल छुट्टियों का है बल्कि जड़ों से जुड़ने और ग्रामीण जीवन की सादगी का आनंद लेने का भी है। वे बचपन से खेतों में काम करते आए हैं और 10 साल की उम्र से ही खेती में हाथ बंटाते थे। मुंबई जाने से पहले तक उन्होंने 22 साल की उम्र तक खेती की और फिर पढ़ाई के लिए वडोदरा चले गए। अब सफलता के बाद भी वे गांव लौटकर पुरानी आदतों को जीवित रखते हैं। इस दौरान वे नई जमीन का निरीक्षण करेंगे, संभावित फसल योजनाएं बनाएंगे और स्थानीय किसानों से बातचीत करेंगे।

नवाजुद्दीन सिद्दीकी का बुढ़ाना से गहरा नाता उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने पहले भी गांव में ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा दिया है और फल-सब्जियां उगाई हैं। उनकी मुंबई की हवेली 'नवाब' भी बुढ़ाना के बचपन के घर से प्रेरित है, जिसमें ग्रामीण वास्तुकला के तत्व शामिल हैं। इस नई भूमि की खरीद उनके निवेश दृष्टिकोण को भी दिखाती है, जहां वे उत्पादक कृषि भूमि में पैसा लगाते हैं बजाय लग्जरी आइटम्स के। विभिन्न रिपोर्ट्स में उनके कुल संपत्ति में कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा बताया जाता है, जो उनकी वित्तीय समझदारी को रेखांकित करता है। वे गांव में रहकर पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण जैसे मुद्दों पर भी काम करते हैं।

इस खरीदारी के पीछे अभिनेता की योजना कुछ समय गांव में रहकर शांत और सादा जीवन जीने की है। वे फिल्मों की व्यस्तता से ब्रेक लेकर परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं। बुढ़ाना में उनकी उपस्थिति से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचता है, क्योंकि वे अक्सर सामाजिक कार्यों में भाग लेते हैं। पहले उन्होंने गांव में वृक्षारोपण अभियान चलाया और जरूरतमंद बच्चों को भोजन वितरित किया। ईद तक ठहरने से वे त्योहार परिवार के साथ मना सकेंगे और नई जमीन पर शुरुआती कार्य शुरू कर सकेंगे। यह कदम उनके लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे हमेशा कहते हैं कि गांव उनकी असली ताकत का स्रोत है।

नवाजुद्दीन सिद्दीकी की यह पहल बॉलीवुड में सफल होने के बाद भी जड़ों को न भूलने का उदाहरण पेश करती है। वे अक्सर मीडिया में अपनी ग्रामीण पृष्ठभूमि का जिक्र करते हैं और कहते हैं कि खेती उन्हें जीने का असली मतलब सिखाती है। नई भूमि पर वे संभवतः आधुनिक कृषि विधियों को अपनाएंगे, जैसे ड्रिप इरिगेशन या ऑर्गेनिक तरीके, जो स्थानीय किसानों के लिए मॉडल बन सकते हैं। उनकी यह यात्रा दिखाती है कि सफलता के बावजूद वे सादगी और मेहनत को महत्व देते हैं। गांव वासियों के लिए यह गर्व की बात है कि एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के अभिनेता उनके बीच समय बिता रहे हैं।

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