चूना और बेकिंग सोडा से मस्से हटाने का घरेलू नुस्खा: आयुर्वेदिक दावों में शामिल लेकिन विज्ञान से कोई प्रमाण नहीं, त्वचा पर जलन और निशान का खतरा।
मस्से (warts) त्वचा पर होने वाली एक सामान्य समस्या है जो ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के कारण होती है। यह वायरस त्वचा में छोटे-छोटे कट या
- मस्सों के लिए चूना-बेकिंग सोडा मिश्रण: लोकप्रिय घरेलू उपाय लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी, जलन, झुलसन और रंग बदलाव की संभावना
- आयुर्वेदिक तरीके से मस्से हटाने का दावा: चूना और बेकिंग सोडा का पेस्ट लगाने की सलाह लेकिन चिकित्सकीय प्रमाण नहीं, त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है
मस्से (warts) त्वचा पर होने वाली एक सामान्य समस्या है जो ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के कारण होती है। यह वायरस त्वचा में छोटे-छोटे कट या घाव के माध्यम से प्रवेश करता है और मस्से के रूप में उभरता है। मस्से आमतौर पर हाथ, पैर, चेहरा या अन्य हिस्सों पर दिखाई देते हैं और ज्यादातर मामलों में हानिरहित होते हैं लेकिन सौंदर्य की दृष्टि से परेशानी पैदा कर सकते हैं। कई लोग इनके इलाज के लिए घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं जिनमें चूना (slaked lime) और बेकिंग सोडा (sodium bicarbonate) का मिश्रण शामिल है। इस मिश्रण को मस्से पर लगाने का दावा किया जाता है कि यह मस्से को सूखाकर गिरा देता है।
चूना और बेकिंग सोडा का पेस्ट बनाने के लिए आधा चम्मच चूना लें, उसमें आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं और 2-3 बूंद पानी डालकर अच्छी तरह मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को केवल मस्से पर लगाने की सलाह दी जाती है। दावा है कि यह पेस्ट मस्से को जल्दी सूखाकर गिरा देता है और त्वचा पर कोई निशान नहीं छोड़ता। कुछ स्रोतों में इसे एक मिनट में लगाने और 2 दिनों में मस्से के गिरने की बात कही गई है। यह नुस्खा सोशल मीडिया और घरेलू उपचार वीडियोज में काफी लोकप्रिय है जहां इसे सस्ता और आसान बताया जाता है।
आयुर्वेद में मस्सों को चार्मकील (Charmakeela) कहा जाता है जो वात और कफ दोष के असंतुलन से जुड़ा माना जाता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में मस्सों के लिए विभिन्न क्षार (alkaline) पदार्थों का उपयोग बताया गया है। चूना (dehydrated lime powder) को कुछ मिश्रणों में शामिल किया जाता है जैसे यवक्षार, सैंधव लवण और गोमूत्र के साथ पेस्ट बनाकर लगाना। कुछ पारंपरिक तरीकों में चूना और तांबे के सल्फेट का मिश्रण बेटेल पत्ती के डंठल से लगाने की बात है। ये तरीके क्षारकर्म (chemical cauterization) पर आधारित हैं जो मस्से के ऊतकों को नष्ट करने का काम करते हैं।
बेकिंग सोडा को आयुर्वेद में सीधे नहीं बताया गया लेकिन घरेलू उपचारों में इसे सिरका या कास्टर ऑयल के साथ मिलाकर लगाने की सलाह दी जाती है। बेकिंग सोडा में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो मस्से पर लगाने से सूजन और संक्रमण कम करने में मदद कर सकते हैं। कुछ उपचारों में इसे गर्म पानी में मिलाकर पैर भिगोने की सलाह है जिससे मृत त्वचा हटाने में सहायता मिलती है।
चूना एक अत्यधिक क्षारीय पदार्थ है जो त्वचा पर लगाने से रासायनिक जलन पैदा कर सकता है। बेकिंग सोडा भी क्षारीय है लेकिन कम तीव्रता का। दोनों को मिलाकर पेस्ट बनाना त्वचा पर मजबूत प्रतिक्रिया पैदा करता है जो मस्से के ऊतकों को नष्ट करने का प्रयास करता है लेकिन साथ ही स्वस्थ त्वचा को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मिश्रण से त्वचा में जलन, लालिमा, छिलना, पोस्ट-इंफ्लेमेटरी हाइपरपिगमेंटेशन और गंभीर मामलों में निशान पड़ सकते हैं।
चिकित्सकीय रूप से मस्सों के लिए सैलिसिलिक एसिड, क्रायोथेरेपी (फ्रीजिंग), इलेक्ट्रोकॉटरी, लेजर या सर्जिकल तरीके अधिक सुरक्षित और प्रभावी माने जाते हैं। इनमें वायरस को लक्षित करके मस्से को हटाया जाता है। घरेलू नुस्खों में चूना जैसे पदार्थों का उपयोग जोखिम भरा हो सकता है खासकर संवेदनशील त्वचा या चेहरे पर।
कई फेक्ट चेक रिपोर्ट्स में इस नुस्खे को झूठा या असुरक्षित बताया गया है। विशेषज्ञों ने कहा कि चूना और बेकिंग सोडा का मिश्रण मस्से हटाने में प्रभावी नहीं है और त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ मामलों में लोगों ने इस मिश्रण से जलन और निशान की शिकायत की। आयुर्वेद में मस्सों के लिए अन्य सुरक्षित तरीके जैसे नीम, तुलसी, लहसुन, एलोवेरा या टैंकन भस्म का उपयोग सुझाया गया है लेकिन सभी को डॉक्टर की सलाह से अपनाना चाहिए। मस्से वायरल होने के कारण फैल सकते हैं इसलिए सफाई और सावधानी जरूरी है।
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